स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बिना स्नान किए माघ मेले से भारी मन से हुए विदा, कहा- मेरी आत्मा को झकझोरा गया
माघ मेला से प्रस्थान से पूर्व सरस्वती ने कहा, “आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहां से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी।”

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए स्नान विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संगम नगरी से बुधवार को भारी मन से मेले से विदा हो गए। अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या के पावन स्नान से मेला पुलिस ने रोक दिया था।
बता दें कि विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई थी। जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी और समर्थकों के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इस दौरान मेला प्रशासन ने उन्हें रोका और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें पालकी से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया। इस दौरान पुलिस और स्वामी के शिष्यों के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। स्वामी का आरोप था कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें उनके धर्मसम्मत 'राजसी स्नान' के अधिकार से वंचित किया।
माघ मेला से प्रस्थान से पूर्व सरस्वती ने कहा, “आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहां से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी।”
उन्होंने कहा, “प्रयाग में जो कुछ भी घटित हुआ, उसने ना केवल हमारी आत्मा को झकझोरा है, बल्कि न्याय और मानवता के प्रति हमारे सामूहिक विश्वास पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संगम की इन लहरों में स्नान करना, अंतरात्मा की संतृप्ति का मार्ग है, लेकिन आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए यहां से विदा ले रहे हैं।”
शंकराचार्य के स्नान किए बिना माघ मेला से चले जाने को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘अत्यंत अनिष्टकारी घटना’ बताया। उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “बीजेपी के दंभ ने अनादिकाल से चली आ रही सनातनी परंपरा को तोड़ दिया है। जगद्गुरु शंकराचार्य जी का बिना पवित्र स्नान किए माघ मेले को छोड़कर जाना अत्यंत अनिष्टकारी घटना है।”
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी और उसके साथी चाहते तो ‘सत्ता की हनक’ और ‘अहंकार’ त्याग कर अपने कंधों पर उनकी पालकी उठाकर उन्हें त्रिवेणी संगम स्नान पर पावन स्नान कराकर उनके मर्माहत सम्मान का मान रख सकते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि मगर भाजपाइयों को भ्रष्ट साधनों से अर्जित अपनी शक्ति का घमंड है जो उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है।
अखिलेश यादव ने लिखा, “संतों का मन दुखी करके कोई सुख नहीं पा सकता है। बीजेपी सनातन की भी सगी नहीं है। आज हर सनातनी मन से बेहद दुखी है। आहत संत अर्थात सत्ता का अंत।”
उल्लेखनीय है कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए संगम जा रहे थे। अत्यधिक भीड़ होने के कारण प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरकर स्नान के लिए जाने को कहा जिसको लेकर विवाद खड़ा हो गया।