गांधी जयंती पर ‘गोडसे अमर रहे’ ट्रेंड करता रहा और चुप रहे सरकार, संतरी और मंत्री

देश और देश की सत्ता ने साबित कर दिया कि गांधीजी कहां पहुंच गए हैं। एक ओर मीडिया गांधी को याद करते प्रधानमंत्री को दिखा रहा था और दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ‘गोडसे अमर रहे’ ट्रेंड कर रहा था। सरकार, संतरी और मंत्री सब खामोश रहे, क्योंकि वे भी ऐसा ही मानते हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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महेन्द्र पांडे

इराक में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन करते लोगों पर पुलिस ने गोलियां दागीं और लगभग 50 लोग मारे गए। दूसरी तरफ दुनिया के तथाकथित सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में जिन 49 लोगों ने एक खुले पत्र के माध्यम से सरकार का ध्यान “उन्मादी समूह की हिंसा” यानी मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों की तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया था, उन्हें राजद्रोही का तमगा दिया गया है। क्या आज के दौर में इराक, सीरिया और भारत के शासकों में कोई अंतर है? देश की वर्तमान सरकार के दौर में जितने राजद्रोही पनप रहे हैं उतने तो अंग्रेजों के दौर में भी नहीं रहे होंगे। हालत यहां तक पहुंच गयी है कि यदि आज गांधी भी जिंदा होते और पहले जैसे सक्रिय रहते तो वो भी राजद्रोही करार दे दिए गए होते।

राहुल गांधी ने ठीक ही कहा है, प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ कोई कुछ बोलता है तो उसे जेल में ठूंस दिया जाता है। उन्होंने कहा कि देश तानाशाही शासन की तरफ बढ़ रहा है और अब यह स्पष्ट हो चुका है। उन्मादी समूह की हिंसा के खिलाफ पत्र लिखने वाले इन 49 लोगों में शामिल, अपर्णा सेन ने कहा कि यह सारा वाकया देश में लोकतांत्रिक जगह सिकुड़ने का सबूत है।

कुछ भी हो, पर इतना तो तय है कि अगले कुछ महीनों में मुजफ्फरपुर के वकील, सुधीर कुमार ओझा, जिन्होंने यह मुक़दमा दायर किया है और चीफ जुडिशीयल मजिस्ट्रेट सूर्यकांत तिवारी किसी मंत्री पद या फिर किसी बड़े ओहदे पर नजर आएंगे। जिस देश में हत्या और बलात्कार जैसे मामलों के बाद भी पुलिस एफआईआर नहीं दर्ज करती, वहां मुजफ्फरपुर पुलिस ने आनन-फानन में इस सन्दर्भ में यह करिश्मा भी कर दिखाया है। इस देश के लोग महात्मा गांधी को ऐसे ही याद करने का जश्न मना रहे हैं।

देश ने और देश की सत्ता ने साबित भी कर दिया है कि गांधी जी कहां पहुंच गए हैं। एक तरफ मीडिया प्रधानमंत्री को गांधी जी को याद करते दिखा रहा था और दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ‘नाथूराम अमर रहे’ ट्रेंड कर रहा था। सरकार, संतरी और मंत्री सब खामोश रहे, क्योंकि वे भी ऐसा ही मानते हैं। मध्य प्रदेश के रीवा के बापू भवन से उसी दिन गांधी जी की राख और कुछ और सामान चोरी हो गया और उनके चित्रों के नीचे हरी स्याही से गद्दार लिख दिया गया। गांधी जी के पुतले पर मीडिया के कैमरे के सामने गोलियां चलाने वाली साध्वी सांसद तो बीजेपी की प्रतिष्ठित सदस्य बनी हुई हैं।

जिस दिन प्रधानमंत्री न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित कर रहे थे, उस दिन वहां बाहर भारत के मानवाधिकार हनन के विरुद्ध बड़ी रैली का आयोजन भी किया गया था। इसमें रुत्गेर्स यूनिवर्सिटी जो न्यू जर्सी की स्टेट यूनिवर्सिटी है, की प्रोफेसर ऑड्रे त्रुस्चे ने कहा था कि हिंदुत्व नाजी विचारधारा से पूरी तरह प्रभावित है और उसे ही अपना आदर्श मानता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे नाजी विचारधारा को केवल संकेत के तौर पर नहीं बता रही हैं बल्कि हिदुत्व का आदर्श वास्तविक और ऐतिहासिक नाजी विचारधारा ही है। हिंदुत्व के स्वयंभू संरक्षक शुरुआती दिनों में हिटलर के खुले समर्थक रहे और उसने जैसा व्यवहार जर्मनी में यहूदियों के साथ किया था वैसा ही व्यवहार देश के मुस्लिनों के साथ करने के हिमायती थे। यही सब आज तक चल रहा है। देश के प्रधानमंत्री भी उसी विचारधारा से आते हैं।

जाहिर है, ऐसे मुखर वक्तव्य के बाद अमेरका से भारत तक, हरेक जगह के बीजेपी समर्थक समूह प्रोफेसर ऑड्रे त्रुस्चे की आलोचना में जुट गए और रुत्गेर्स यूनिवर्सिटी से उन्हें निकालने की वकालत करने लगे। पर, इस यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि प्रोफेसर आधुनिक भारत के सांस्कृतिक, उपनिवेशवाद और बौद्धिक इतिहास की प्रबुद्ध जानकार हैं, इसलिए यह विश्विद्यालय उनके वक्तव्यों से सहमत है। इसके बाद प्रोफेसर ऑड्रे त्रुस्चे ने कहा कि वे सटीक इतिहास पर भरोसा रखने वाले प्रबुद्ध शैक्षणिक समुदाय के बीच रहकर अभीभूत हैं।

श्रीमती सोनिया गांधी ने 2 अक्टूबर के दिन कहा कि भारत में जो हो रहा है उसे देखकर गांधी जी दुखी होते। जो लोग झूठ की राजनीति कर रहे हैं, वे गांधी के अहिंसा का दर्शन कभी नहीं समझ पाएंगे। इतिहासकार मृदुला मुखर्जी के अनुसार गांधी जी धर्मनिरपेक्षता के लिए जाने जाते हैं। गांधी जी के व्यक्तित्व से सबकुछ छोड़कर केवल आप स्वछता को नहीं चुन सकते। गांधी जी की सबसे बड़ी लड़ाई दमन के विरुद्ध थी, पर उसके बारे में कोई कुछ नहीं कहता।

अभी जो देश के हालात हैं- सरकार और हिन्दू अतिवादी संगठन सत्ता के नशे में चूर हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने आप को खुले तौर पर भारत का पर्यायवाची बता रहा है, जनता अपनी समस्याओं से जूझ रही है और खामोश है, विपक्ष का अस्तित्व भी नहीं है- ऐसे में संभव है कि आने वाले दिनों में गांधी पूरी तरह से पटल से गायब हो जाएं और हम गोडसे की जयंती मनाना शुरू कर दें। महात्मा गांधी हम शर्मिंदा हैं, हम आपको भूल चुके हैं।

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