विष्णु नागर का व्यंग्यः यूपी चुनाव आते ही सीना और चौड़ा कर निकली नफरत, फिर जीत गई तो चुनाव तक भूल जाएंगे लोग!

नफरत अपने अलावा किसी से भी की जा सकती है। मुसलमान इसके लिए सर्वसुलभ हैं, दलित, आदिवासी भी। झुग्गी-झोपड़ी वाले, कश्मीरी, किसान, औरतें और गरीब भी। अपने नौकर -चाकर भी। दिहाड़ी पूरी मांगने वाले मजदूर भी। कोई भी जो बराबरी न कर सकता हो, जिसकी आवाज दबाई जा सकती हो।

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

मेहरबान-कदरदान, उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं तो आजकल नफरत अपना सीना 56 इंच से भी ज्यादा चौड़ा करके घूम रही है। आजकल उसका सीना ही सीना दिख रहा है, मुंह, हाथ, पैर सब गायब से हैं। अभी तो सीना ही दिख रहा है, उसका एक-एक बाल, एक-एक रोयां भी दिखाया जाएगा। अभी तो नफरत के शिखर पुरुष ने ठीक से चुनाव एरीना में एंट्री नहीं ली है। तब नफरत अपने सारे आभूषण, सारे कपड़े खोल अट्टहास करेगी। अभी साहेब चुनाव के एकदम पास आने का इंतज़ार कर रहे हैं। अभी तो माननीय मुख्यमंत्री ही माननीय नफरत की माननीय अगुवाई कर रहे हैं। वे भी इसमें कम समर्थ नहीं हैं। उनका तो पद और दादागीरी सब इस चुनाव में दांव पर लगी है!

अभी दिल्ली, परदे के पीछे से कठपुतली नृत्य दिखा रही है। अभी माननीय एक अरब वैक्सीन लगाने के लिए अपनी तारीफ से देश की जनता के कान पका रहे हैं। ठीक से पक जाएं, हर कान से मवाद बहने लगे, फिर देखिए वह एक ही वाक्य से नफरत का कैसा भूतो न भविष्यति शो आयोजित करते हैं। हम-आप उनके वचनों पर थू-थू करेंगे, हम कहेंगे कि यह उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। वे यह सुनकर खुश होंगे, हंसेंगे। कहेंगे- हां अब तीर निशाने पर लगा है। कहेंगे, अभी भी इन मूर्खों के दिमाग से पद की गरिमा का भूत नहीं निकला है। इन्हें अभी न्यू इंडिया में लाना है। इनके इस भूत को भगाकर दिखाना है!

अभी तो उनके निशाने पर शाहरुख खान, आमीर खान ही आए हैं। अभी तो बॉलीवुड में भी बहुत कुछ और निबटाना है। अभी तो जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद के पिता को ही अखिलेश यादव के साथ षड़यंत्र बुनते पाया गया है। अभी तो कश्मीरियों की तुलना पाकिस्तानियों से ही होना शुरू हुई है। अभी तो गोली मारो सालों को कहना बाकी है। नफरत को इस बार भी उत्तर प्रदेश में विजयश्री मिल जाए, फिर देखिए, लोकतंत्र की 'रक्षा' दिल्ली का बादशाह पूरे देश में किस यादगार ढंग से करता है! लोग चुनाव का नाम लेना भूल जाएंगे!


नफरत करना आजकल सबसे लाभदायक और फैशनेबल है, कूल है। यह सबसे आसान है, क्योंकि यह कपड़ों की तरह रेडीमेड उपलब्ध है और ऊपर से मुफ्त भी है। यह अपराधों से रक्षा का बीजमंत्र है। यह देशभक्ति का पद्म और श्री है। नफरत सफलता की सबसे मजबूत सीढ़ी है।यह ऊंचे से ऊंचे पद पर पहुंचा सकती है। जो जहां है, उससे बहुत ऊपर पहुंचा देती है। यह विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री कुछ भी बनाने की संभावनाओं से लैस है!

नफरत, आदमी को तुरंत नेता के सिंहासन पर बैठा देती है, सरकार का लाडला अफसर बना देती है, योग्य पुलिस अफसर बना देती है। नफरत सड़क पर 'न्याय' करने में सक्षम बनाती है।यह घोटाला करने की क्षमता का विकास करती है। जो जितना नफरती है, उसे उतने ही बड़े पद के योग्य बना देती है। उसे आदरणीय, सम्मानित और महामहिम तक बना देती है। नफरत आज की प्राणवायु है। आक्सीजन में तो कार्बनडाई आक्साइड की मात्रा अधिक है, मगर नफरत की आक्सीजन प्योर है, शुद्ध है।

नफरत अपने अलावा किसी से भी की जा सकती है। मुसलमान इसके लिए सर्वसुलभ हैं, दलित और आदिवासी भी। झुग्गी-झोपड़ी वाले, कश्मीरी, किसान, औरतें और गरीब भी। अपने नौकर -चाकर भी। दिहाड़ी पूरी मांगने वाले मजदूर भी। कोई भी जो आपकी बराबरी न कर सकता हो।कोई भी जिससे न डर हो, न खतरा। कोई भी जिसकी आवाज दबाई जा सकती हो। कोई भी जो आज दुनिया में न हो, चाहे वह जवाहर लाल नेहरू हो, महात्मा गांधी हो। कोई भी जो जेएनयू, जामिया में पढ़ा हो मगर सीतारमण, एस.जयशंकर न बन सका हो। कोई भी जो सीएए का विरोध करता हो। कोई भी जो नाथूराम गोडसे को देशभक्त न मानता हो!

नफरत आज का गंगा स्नान है। रामभक्ति है। मूर्खतापूर्ण आत्मविश्वास है। तो नफरत के इस न्यू इंडिया में आपका स्वागत है।

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