तेजी से विलुप्त हो रहे हैं प्रवासी पक्षी, मानव की गलतियों का बन रहे हैं शिकार

प्रवासी पक्षियों के लिए अब दुनिया खतरनाक होती जा रही है क्योंकि मानव गतिविधियां और कारोबार बढ़ते जा रहे हैं, साथ ही दुनिया के अनेक हिस्से अशांत हैं, युद्ध या गृहयुद्ध की चपेट में हैं। तापमान वृद्धि जैसे अनेक कारण प्रवासी पक्षियों पर खतरा बढ़ाते जा रहे हैं।

तेजी से विलुप्त हो रहे हैं प्रवासी पक्षी, मानव की गलतियों का बन रहे हैं शिकार
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प्रवासी पक्षियों की एक अलग दुनिया है, ये यायावर होते हैं, एक जगह नहीं टिकते और जहां अधिक अनुकूल माहौल होता है वहां विस्थापित हो जाते हैं। वैश्विक स्तर पर 1843 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों की पहचान की गई है। ये पक्षी देशों की, महादेशों की और यहां तक कि महासागरों की सीमाओं से परे हैं– सही में प्रवासी पक्षी “वसुधैव कुटुंबकम” का सर्वोत्तम उदाहरण हैं क्योंकि ये हरेक देश को एक-दूसरे से जोड़ कर रखते हैं। उदाहरण के तौर पर अकेले रूस से प्रवासी पक्षियों के माध्यम से दुनिया के 200 से अधिक देश जुड़े हैं।

हर 9 में एक प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर

प्रवासी पक्षियों से जुड़ा एक दुखद तथ्य यह है कि इनकी हर 9 में एक प्रजाति विलुप्त होने की तरफ बढ़ रही है और 45 प्रतिशत प्रजातियां खतरे में हैं। लगभग 30 प्रतिशत प्रजातियां स्थिर हैं, यानि इनकी संख्या में विशेष अंतर नहीं आ रहा है, 14 प्रतिशत प्रजातियों के सदस्यों की संख्या बढ़ रही है, जबकि शेष 11 प्रतिशत प्रजातियों के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

150 साल में प्रवासी पक्षियों की 7 प्रजातियां विलुप्त

पिछले वर्ष प्रवासी पक्षियों की एक प्रजाति “स्लेन्डर बिल्ड कर्लू” के विलुप्त होने की आधिकारिक घोषणा की गई थी। यह यूरेशिया और अफ्रीका से जुड़ा प्रमुख प्रवासी पक्षी था। दुनिया भर में पिछले 150 वर्षों के दौरान प्रवासी पक्षियों के 7 प्रजातियों के विलुप्त होने की घोषणा की जा चुकी है। यह सभी जानकारी बर्डलाइफ इंटरनेशनल नामक अन्तरराष्ट्रीय संस्था द्वारा हरेक 4 वर्ष के अंतराल पर प्रकाशित किए जाने वाले, स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स बर्ड्स रिपोर्ट, के नए अंक में दी गई है।

प्रवासी पक्षियों के लिए अब दुनिया खतरनाक होती जा रही है क्योंकि मानव की गतिविधियां और कारोबार बढ़ता जा रहा है, साथ ही दुनिया के अनेक हिस्से अशांत हैं, युद्ध या गृहयुद्ध की चपेट में हैं। सघन खेती का बढ़ता दायरा, अवैध शिकार, प्रदूषण, जंगलों की आग, बाहरी हमलावर प्रजातियों का विस्तार और तापमान वृद्धि जैसे अनेक कारण प्रवासी पक्षियों पर खतरा बढ़ाते जा रहे हैं– ये सभी समस्याएं पूरी दुनिया में बढ़ रही हैं।


सागर तटों से जुड़े प्रवासी पक्षियों पर संकट अधिक

इस रिपोर्ट के अनुसार, महासागरों में या फिर सागर तटों से जुड़े प्रवासी पक्षियों पर संकट अधिक तेजी से बढ़ रहा है। पक्षियों की कुल प्रवासी प्रजातियों में से 11 प्रतिशत इतने संकटग्रस्त हैं कि अब विलुप्त होने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि महासागरों से जुड़ी 42 प्रतिशत प्रजातियों पर संकट बढ़ रहा है। प्रवासी पक्षी एक ऐसे संदेश-वाहक की तरह हैं जो पर्यावरण संकट का वैश्विक हाल बताते हैं– पर्यावरण संकट बढ़ते जा रहे हैं, पर पूरी दुनिया इनकी उपेक्षा कर रही है– ऐसे में प्रवासी पक्षियों पर खतरे बढ़ रहे हैं। हरेक वर्ष लगभग 1 करोड़ से 4.5 करोड़ प्रवासी पक्षियों का अवैध शिकार किया जाता है, जबकि प्रवासी पक्षियों के आश्रय स्थलों से जुड़े 1099 प्रमुख जैव-विविधता वाले क्षेत्रों में से 58 प्रतिशत की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।

प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए और इन पर मडराते खतरों के समाधान के लिए केन्या के नैरोबी शहर में ग्लोबल फ्लाइवेज समिट का आयोजन किया गया था और इसी दौरान बर्डलाइफ इंटेरनेशनल की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया गया। इस अधिवेशन में विशेषज्ञों ने बताया कि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के बेहतर प्रबंधन से प्रवासी पक्षियों की समस्याओं को कम किया जा सकता है। इस काम के लिए तीन अन्तराष्ट्रीय विकास बैंकों ने 6 अरब डॉलर से अधिक की सहायता राशि का ऐलान भी किया। एशियन डेवलपमेंट बैंक ने अगले दशक तक 3 अरब डॉलर स्वीकृत करने का संकल्प लिया, डेवलपमेंट बैंक ऑफ लैटिन अमेरिका एंड कैरीबिया ने वर्ष 2050 तक 3 से 5 अरब डॉलर स्वीकृत करने का ऐलान किया। वर्ल्ड बैंक ने अफ्रीका, यूरोप और एशिया में प्रवासी पक्षियों के मार्गों को सुरक्षित करने के लिए भी सहायता देने का आश्वासन दिया।

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कई देशों ने संरक्षण के लिए कदम उठाए

ऑस्ट्रेलिया के सघन जैव-विविधता वाले मकुआरी द्वीप से खरगोश, बिल्लियां, चूहे इत्यादि गैर-स्थानिक जीवों को दूसरे जगहों पर स्थानांतरित किया गया, इसके बाद वहां प्रवासी पक्षियों की संख्या कई गुणा तक बढ़ गई। चीन ने बड़े पैमाने पर अपने जैव-विविधता वाले क्षेत्रों के साथ ही दलदली भूमि और वेट्लैन्ड को संरक्षित किया, इसके बाद से वहां भी प्रवासी पक्षियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। ब्रिटेन में वेट्लैन्ड से कृषि भूमि हटाने के बाद से प्रवासी पक्षियों की भरमार होने लगी है। इन उदाहरणों से इतना तो स्पष्ट है कि प्रवासी पक्षियों पर ध्यान देकर इनकी समस्याओं को कम किया जा सकता है।

प्रवासी पक्षियों की कुल प्रजातियों में से 2 प्रतिशत तेजी से विलुप्त हो रही हैं, 3 प्रतिशत प्रजातियां गंभीर तौर पर संकटग्रस्त हैं और 12 प्रतिशत प्रजातियां गंभीर संकट की दिशा में अग्रसर हैं। प्रवासी पक्षियों की 139 प्रजातियां अपने आश्रय स्थलों पर गैर-स्थानिक प्रजातियों की बढ़ती संख्या के कारण संकटग्रस्त हैं, 103 प्रजातियों पर सघन कृषि का प्रभाव है, जलवायु परिवर्तन से 103 प्रजातियों पर खतरा बढ़ रहा है, शिकार के कारण 99 प्रजातियों के सदस्यों की संख्या लगातार कम हो रही है, 96 प्रजातियां प्रदूषण की चपेट में हैं, 71 प्रजातियां निर्बाध शहरीकरण से प्रभावित हैं, आवास स्थलों पर मनुष्यों की बढ़ती गतिविधियों से 65 प्रजातियां, मछलियों के अवैध शिकार से 62 प्रजातियां, ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर से 55 प्रजातियां और पेड़ों के कटने से 39 प्रजातियां प्रभावित हैं।

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मानव के स्वयं के अस्तित्व पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न

एक अध्ययन के अनुसार, बड़े पंखों वाले पक्षियों, बड़े शरीर वाले पक्षियों और सागर तटीय पक्षियों के अस्तित्व समाप्त होने का खतरा सामान्य पक्षियों की तुलना में अधिक है। वैश्विक  स्तर पर पक्षियों की लगभग 5 प्रतिशत प्रजातियां समाप्त होने के कगार पर हैं पर सागर तटीय पक्षियों में से 12 प्रतिशत प्रजातियां खतरे में हैं। बड़े शरीर वाले पक्षियों पर शिकार और जलवायु परिवर्तन का खतरा अधिक रहता है। बड़े पंखों वाले पक्षियों में प्राकृतिक आवास नष्ट होने के कारण खतरा बढ़ रहा है। इस अध्ययन को ग्रेट ब्रिटेन के यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के वैज्ञानिकों ने किया है और इसे नेचर एंड ईकोलॉजी ईवोलूशन नामक जर्नल में प्रकाशित किया है।

मनुष्य की गतिविधियां पूरी पृथ्वी और महासागरों तक फैलती जा रही हैं, जैव-विविधता का नाश होता जा रहा है, प्राकृतिक संसाधन व्यापार का केंद्र बन गए हैं, प्रदूषण की चपेट में हवा, पानी, भूमि सभी हैं, जलवायु परिवर्तन और तापमान वृद्धि के प्रभाव पूरी दुनिया में हैं– ऐसे में प्रवासी पक्षियों का ही नहीँ बल्कि मानव के स्वयं के अस्तित्व पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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