विष्णु नागर का व्यंग्यः मोदी-शाह के बुरे दिन चल रहे हैं, इधर नेतन्याहू हार गया, उधर ट्रंप को भी झटका लगा

राहुल गांधी बेचारों को रोज तंग कर रहे हैं। यहां तक कि उन बेचारों को देशद्रोही तक कह दिया। देश नहीं बिकने दूंगा, मार्का के बारे में ऐसी बात करना अन्यायपूर्ण है। ये मोदी जी की भलमनसाहत समझो कि उन्होंने राहुल गांधी पर एक और मुकदमा नहीं ठोका!

मोदी-शाह के बुरे दिन चल रहे हैं, इधर नेतन्याहू हार गया, उधर ट्रंप को भी झटका लगा
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ओ, पतिदेव जी,

हां, पत्नी देवी जी।

याद है न तुम्हें, आज दीपावली है? हां क्यों नहीं, तुमने कल बीस बार कहा था कि रविवार के दिन दीपावली है और अखबार देखकर याद आया कि आज रविवार भी है और दीपावली भी। मैं तुम्हारा फरमाबदार पति इस बात को भूल कैसे सकता हूं?

तुम फालतू बातें बनाने की आदत अब छोड़ो। मैं तुम्हें उस दिन से जानती हूं, जब तुम मुझे प्रेम-पत्र लिखा करते थे। तभी मैं समझ गई थी कि तुम किस किस्म के आदमी हो। फिर भी मैंने दया करके तुमसे शादी कर ली। तुम मेरी बातें इस कान से सुनकर उस कान से निकाल देते हो। आज ध्यान से सुनना वरना मुझसे बुरा क़ोई न होगा। तुम जानते हो कि अगर मैं बिगड़ गई तो इस दुनिया में तुम्हें कोई ठौर नहीं मिलेगा। सुन लो कि आज शुभ दिन है। क्या दिन है आज, बताओ तो? शुभ दिन।

हां केवल शुभ दिन नहीं है, दीपावली का शुभ दिन है। आज के दिन तुम किसी के बारे में भी उल्टी-सीधी बातें नहीं लिखोगे, जो कि तुम्हारा अब पुराना मर्ज हो चुका है। न मोदी जी के बारे में, न अमित शाह जी के बारे में और न बुलडोजर बाबा के बारे में। और न राहुल गांधी, नेहा बोरा आदि की तारीफ करते हुए एक शब्द भी लिखोगे। इससे उन बेचारे मोदी जी, शाह जी का दिल जलता है तो आज ऐसा क्यों करना! ये 20 जुलाई से ही लगातार बहुत परेशानी में चल रहे हैं। पच्चीस साल में पहली बार इतना बड़ा संकट उन पर बरपा हुआ है। दुखियारे हैं बेचारे। भारत की परंपरा है कि दुखियों का दुख दूर किया जाता है, उन्हें दुखी नहीं किया जाता! कम से कम आज उन पर कृपा करना!

रोज इन बेचारों के सिर पर एक न एक नई परेशानी आकर खड़ी हो जाती है। इनके योग आजकल बहुत बुरे चल रहे हैं। अभी इनका खास दोस्त नेतन्याहू हार गया। कितनी ही तिकड़म लड़ाई उस गरीब ने मगर फिर से प्रधानमंत्री नहीं बन सका। उसके गम से वे किसी तरह उबरे  ही थे कि इधर इंडिया गठबंधन की विशाल रैली ऐन उनके सिर पर रामलीला मैदान में हो गई।

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फिर राहुल गांधी की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि वह मोदी जी को बहस करने की चुनौती देने लगा, जबकि वह जानता है कि मोदी जी न बहस कर सकते हैं, न विकसित भारत बना सकते हैं।फिर भी बेचारों को रोज तंग कर रहा है। यहां तक कि उन बेचारों को देशद्रोही तक कह दिया। देश नहीं बिकने दूंगा, मार्का के बारे में ऐसी बात करना अन्यायपूर्ण है। ये मोदी जी की भलमनसाहत समझो कि उन्होंने राहुल गांधी पर एक और मुकदमा नहीं ठोका! बेचारे की सदाशयता का गलत फायदा उठाया जा रहा है और सब चुप हैं। तुम भी चुप हो। असली लेखक होते तो राहुल गांधी की निंदा करते।

इस बीच अमेरिका से यह खबर भी आ गई कि इनका असली से भी असली से भी असली बड़े भाई डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी को मध्यावधि चुनाव में बहुत ही बड़ा झटका लगा है। उसका शॉक भी मोदी जी को जबर्दस्त लगा है। तुम्हें मालूम है कि नहीं कि उन्हें दो रात तक नींद नहीं आई। आजकल  सहजन के परांठे भी उन्हें कड़ुए लगने‌ लगे हैं। ट्रंप में उन्हें अपना अंधकारमय भविष्य दिख रहा है। इससे उनकी तबीयत अगर मान लो, बिगड़ गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? कहीं तुम्हारा नाम न आ जाए, इसलिए आज कुछ मत लिखना। छठ तक उस 'विजनरी ' प्राइममिस्टर को बख्शो। जीओ और जीने दो।

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मगर देवी जी मेरे जैसे बीसियों क्या हजारों लोग उन पर दिन में दस बार लिखते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं। मेरा नाम ही क्यों आएगा? फिर भी सावधान रहने में कोई बुराई है क्या? अच्छा, दीपावली की बधाई तो उन्हें दे  सकता हूं? उसकी भी कोई जरूरत नहीं। उसमें भी कहीं तुम तंज मार दोगे। तुमसे एक वाक्य भी सीधा-सिंपल लिखा नहीं जाता। हर वक्त उसमें कुछ न कुछ टेढ़ापन रहता है। मैं तो तंग आ गई हूं तुमसे। आज तुम बिलकुल चुप रहोगे समझे!

खुद भी मनाओ दीपावली और उन्हें भी मनाने दो। इसमें विध्न-बाधा मत डालो। सुन‌ लिया न? घंटे-घंटे भर में मैं चैक करती रहूंगी। एक दिन तो उन बेचारों के लिए छोड़ दो! उन्हें लक्ष्मी पूजन करने दो। सोचो, बेचारे मोदी जी अकेले लक्ष्मी पूजन करते हैं। कितना खाली-खाली लगता होगा न उन्हें। उनकी इस दशा पर तुम्हें दया नहीं आती? कैसे लेखक हो? संवेदना तो लगता है तुम्हारे भीतर से मर चुकी है।

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कोई दुश्मनी है क्या तुम्हारी उनसे ? राहुल तो कहता है कि उसकी मोदी, शाह, ज्ञानेश कुमार से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। तुम्हें ही क्यों तलवार चलाते रहना जरूरी लगता है? तुम क्या महाराणा प्रताप हो या शिवाजी हो? हो क्या तुम? ईमानदारी से बताओ कि मेरे पति, बेटों के पिता, बहू के ससुर और पोतों के दादा होने के अलावा कुछ और हो क्या? चलो आज मेरा हाथ बटाओ वरना तुम बिना गड़बड़ किए मानोगे नहीं! ईनाम में शाम को तुम्हें बढ़िया-बढ़िया मिठाइयां मिलेंगी! चलो उठो भी अब। रखो उधर अपना ये लैपटाप। चलो। अब एक मिनट की भी देरी मत करना वरना तुम मेरा गुस्सा जानते हो!

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