विष्णु नागर का व्यंग्य: देशवासियों के लिए बेहद दुखद और मुश्किल क्षण! आटोक्रेसी जिंदाबाद, डेमोक्रेसी अमर रहे

मैं ऐसा व्यक्ति हूं कि भाइयो-बहनो एक दिन भी मां के बगैर रह नहीं सकता। आपको आज रहस्य की बात बताता हूं कि 'मदर आफ डेमोक्रेसी' की नाज़ुक हालत को देखते हुए मैंने अपने लिए आटोक्रेसी और हिप्पोक्रेसी की माताजी का प्रबंध पहले ही कर लिया था।

फोटोः सोशल मीडिया
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विष्णु नागर

राष्ट्र के नाम संदेश, भाइयो और बहनों

 आज मैं आपके सामने बहुत भारी मन से यह दुखद समाचार देने आया हूं कि हमारी सम्माननीय 'मदर आफ डेमोक्रेसी 'यानी' लोकतंत्र की अम्मा जी' का देहांत हो गया है। यह हम सबके लिए, देशवासियों के लिए बेहद दुखद और मुश्किल क्षण है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और हमें दुख का यह भार सहने की शक्ति दे!

 मेरे लिए तो यह व्यक्तिगत क्षति है। जब मैं मुख्यमंत्री के रूप में दिल्ली आता था तो 'लोकतंत्र की अम्मा जी ' का आशीर्वाद लेने जाता था। प्रधानमंत्री जी से मिलूं या न मिलूं, पार्टी अध्यक्ष से भेंट हो या न हो, अम्मा जी से मेरी भेंट अवश्य होती थी। उनके चरणों में बैठने का सुख कुछ और था! वे मुझे अपना सबसे लाड़ला बेटा मानती थीं।

मेरी एक मां अहमदाबाद में थी, दूसरी यहां। दोनों माताओं को मैंने आज खो दिया है। मैं अनाथ हो गया हूं। कुछ समय पहले जन्मदात्री मां चली गई थी और आज हम सब की-विशेषकर -मेरी ये वाली अम्मा जी भी चली गईं। न जाने कैसे हिम्मत जुटाकर आपसे यह समाचार मैंने साझा किया है। ऐसा समाचार देने के लिए भी पुरुषार्थ चाहिए। न मेरी जननी गई थीं तो लगा था कि चलो, मेरी एक मां दिल्ली में है मगर अब दोनों ईश्वर को प्यारी हो गई हैं। (रोने का अभिनय)।

वैसे होनी को कौन रोक सकता है, प्रभु भी नहीं, फिर मैं तो मात्र एक मनुष्य हूं। वे कहा करती थीं कि बेटा तू दिल्ली क्यों नहीं आ जाता! मुझसे मिलने के लिए तुझे बार- बार दिल्ली आना पड़ता है। तेरे लिए मैं यहीं कुछ प्रबंध करती हूं। भगवान की कृपा से अगले ही दिन मां गंगा का बुलावा चुनाव लड़ने का बुलावा आ गया। इसके पीछे निश्चित रूप से 'मदर आफ डेमोक्रेसी' जी की प्रेरणा थी। आज मैं जो भी हूं 'मदर आफ डेमोक्रेसी' और 'मदर गंगा' की कृपा से हूं।

मै समझ नहीं पा रहा हूं कि जो मां मुझसे हमेशा कहती थीं कि तू दिल्ली आ, वह मेरे यहां आते ही कोमा में क्यों चली गईं! जैसे ही मुझे यह समाचार मिला, मैंने विचार किया कि एक समर्पित पुत्र के नाते मैं उनके लिए क्या- क्या कर सकत हूं! विचार आया कि जो भी अब किसी संवैधानिक पद पर बैठे, वह संविधान की शपथ अवश्य ले। भाइयो-बहनों, आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इससे पहले ऐसा नहीं होता था। प्रधानमंत्री अपने खास- खास लोगों के नाम राष्ट्रपति के पास मंत्री बनाने के लिए भेज देते थे और वे मंत्री बन जाते थे। योग्य व्यक्ति मंत्री बनने को तरसते थे। वे मेरे पास आते थे कि हमारे साथ ऐसा अन्याय हो रहा है!


तब मीडिया पर सरकार का ऐसा भयंकर कब्जा था कि सब चलता था। खबर छपती थी कि मंत्रियों ने शपथ ली मगर क्या -किस बात की ली, संविधान की ली या खुदा की ली,यह कोई नहीं जानता था। सबकुछ सीक्रेट था। किसी को परवाह नहीं थी कि सरकार संविधान के अनुसार चल रही है या नहीं! मैंने आकर यह घपला रोका। मैंने सबको संविधान की शपथ दिलवाई। प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो, मुख्यमंत्री हो,कोई भी इससे बच नहीं सकता। इसका परिणाम है कि आज संविधान का अक्षरशः पालन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट को एक बार भी अवसर नहीं मिला कि वह कह सके कि मोदी जी,आपकी सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल रही है। बाबासाहेब अम्बेडकर और महात्मा गांधी के पदचिह्नों पर नहीं चल रही है।मैं उन न्यायाधीश महोदय का नाम नहीं लूंगा मगर उन्होंने अभी एक बार मिलने पर कहा कि मोदी जी,ये आप क्या कर रहे हो! हमें एक बार भी आपकी सरकार को क्रिटिसाइज करने का मौका नहीं मिलता! मेरा जवाब था कि मेरी मां, मदर आफ डेमोक्रेसी, भले ही पिछले करीब नौ वर्षों से कोमा में हों मगर आज भी उनका आशीर्वाद मेरे साथ है। मैं एक भी ग़लत काम नहीं होने दे सकता। मुझे बचपन से भगवान की कृपा से ऐसे संस्कार मिले हैं। जज साहब ने कहा,ये बात तो हम भी मानते हैं मगर एक मौका तो दो प्लीज़ हमें,बस एक,ताकि हमारा रिकार्ड दुरुस्त रहे!हमें तो अब लगने लगा है कि हम सुप्रीम कोर्ट न होकर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट हैं! इस कारण आलमोस्ट सभी जजों को ब्लडप्रेशर रहता है। आप कुछ उपाय कीजिए। मैंने कहा कि सारी, मेरे रहते ग़लत और अन्यायपूर्ण निर्णय संभव नहीं। हां आपको बेहतर हैल्थ चैक अप और इलाज की सुविधाएं चाहिए, तो बताइए। एक और जज की आवश्यकता हो तो बताइए । मेरे यह कहते उनकी बोलती बंद हो गई,वे आगे बढ़ गए।तो इसका श्रेय मुझे नहीं, आप सबके समर्थन को है। भारत माता को है, डेमोक्रेसी की अम्मा जी को है।

मैं ऐसा व्यक्ति हूं कि भाइयो-बहनो एक दिन भी मां के बगैर रह नहीं सकता। आपको आज रहस्य की बात बताता हूं कि 'मदर आफ डेमोक्रेसी' की नाज़ुक हालत को देखते हुए मैंने अपने लिए आटोक्रेसी और हिप्पोक्रेसी की माताजी का प्रबंध पहले ही कर लिया था। आज उनका फुल आशीर्वाद मेरे साथ है। आज से ही नहीं, 2014 से। विपक्ष को मेरी निन्दा का कोई अवसर नहीं मिल रहा, इसलिए वह कह रहा है कि मोदी जी ने आटोक्रेसी और हिप्पोक्रेसी की मम्मी जी को भारत में आमंत्रित कर उन्हें अपने लोक कल्याण स्थित आवास में स्थान दिया है। उनका इरादा डेमोक्रेसी की मम्मी जी की हत्या का है। विपक्ष झूठ की मशीन है। वे मुझे अपनी प्यारी अम्मा का हत्यारा कह रहे हैं। डेमोक्रेसी की माताजी जबकि खुश थीं।कहती थीं कि बेटा,तू आ। पता नहीं मैं कितने दिन की अब मेहमान हूं। बहुत थक गई हूं। तू मम्मी के बगैर रह नहीं सकता तो पहले ही दो मम्मियों का इंतजाम कर ले। गुजरात में इन दोनों मम्मियों का परफार्मेंस लेवल देख कर वह खुश थीं। उनकी दिली इच्छा थी कि मैं अब उन्हें आराम करने दूं। ऐसी' मदर आफ डेमोक्रेसी ' का मैं मर्डर नहीं कर सकता। न मैं किसी भी कीमत पर हिप्पोक्रेसी और आटोक्रेसी की मम्मी जी का मर्डर होने दूंगा। बस आपको विपक्ष पर निगाह रखना है।उसमें हिप्पोक्रेसी और आटोक्रेसी के बहुत से मर्डरर बैठे हैं। उनके हर षड़यंत्र को विफल करने में सरकार आपके साथ है।

 अब हम मदर को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखेंगे। वह स्वर्ग में ही रहें और प्रसन्न रहें। वहां कोई प्राब्लम आए तो मुझे सूचित करें। मेरे वहां भी संपर्क हैं। आप एक -एक कर यहां आएं और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करें। एक सप्ताह तक सारे देश में 'श्रद्धांजलि यज्ञ' चलना चाहिए ताकि 'मदर आफ डेमोक्रेसी' जी की आत्मा को शांति मिले।

 मैं कहूंगा, डेमोक्रेसी, आप कहेंगे, अमर रहे।

मैं कहूंगा हिप्पोक्रेसी, आप कहेंगे, जिन्दाबाद।

मैं कहूंगा आटोक्रेसी, आप कहेंगे , जिन्दाबाद।

फिर दोहराता हूं। अमर रहे और जिन्दाबाद में कन्फ्यूजन न होने दें। जिंदाबाद को अमर न करें, अमर को जिंदाबाद न करें।

डेमोक्रेसी.....अमर रहे।

शाबाश।

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