विष्णु नागर का व्यंग्य: राम मंदिर से काम नहीं चलेगा, विकास-विकास के नाम पर भी फेंकाफेंकी करनी पड़ेगी!

इन्हें समझ में आ गया है कि राम मंदिर से काम नहीं चलेगा। विकास-विकास के नाम पर भी फेंकाफेंकी करनी पड़ेगी। आदिवासियों-दलितों पर राम मंदिर का जादू बिलकुल काम नहीं करेगा। पढ़ें विष्णु नागर का व्यंग्य।

फोटोः विदेश मंत्रालय के Facebook पेज से
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विष्णु नागर

इनको अगर अगला चुनाव जिता दिया तो ये नए-नए शिगूफे छोड़कर हमारे अगले पांच साल भी बर्बाद कर देंगे। इन्होंने अयोध्या में राम मंदिर क्या बना लिया, अब इन्हें एक हजार साल के लिए 'रामराज्य' लाने के सपने आने लगे हैं। ये जब भी फेंकते हैं, ऊंची ही फेंकते हैं। इस बार कुछ ज्यादा ही ऊंची, एक हजार साल वाली फेंकी है। थोड़ी नीची फेंकते तो चल जाती! इतनी ऊंची फेंकी है कि आकर इनके मुंह पर धम्म से आकर गिरेगी और थोबड़ा बिगाड़ जाएगी। ये फांकालाजी के एक्सपर्ट हैं। अभी तक इन्होंने पचासवीं या सत्तरवीं या सौवीं बार फेंकाफेंकी की है। हर दो-तीन महीने में ये एक नया शिगूफा छोड़ देते हैं। कभी-कभी तो बेधड़क होकर आठ- दस छोड़ देते हैं और थोड़े दिन बाद सब भूल जाते हैं। फिर नया शिगूफा छोड़ते हैं, फिर भूल जाते हैं।

इन्हें समझ में आ गया है कि राम मंदिर से काम नहीं चलेगा। विकास-विकास के नाम पर भी फेंकाफेंकी करनी पड़ेगी। आदिवासियों-दलितों पर राम मंदिर का जादू बिलकुल काम नहीं करेगा। उन्हें बताना पड़ेगा कि हमने पिछले दस साल में जो भी किया है, सब तुम्हारे लिए ही तो किया है। तुम हमारे लाभार्थी हो, हमें वोट देना, तुम्हारा कर्तव्य बनता है।

मुसलमान तो इनकी बुलडोजरवाली सूची में अग्रिम पंक्ति में हैं। उन्हें तो बताने की जरूरत नहीं कि हम फिर आ गए तो आपके लिए क्या  करेंगे। उन्हें मालूम है कि ये क्या करेंगे। हमारे घरों और दुकानों पर और तेजी से बुलडोजर चलाएंगे और ताली बजाएंगे। हमारा खान-पान, रहन- सहन सब तय करने की कोशिश करेंगे। नौकरियों में हमारी भागीदारी 68 फीसदी घटा दी है, बाकी 32 फीसदी को भी खाकर पचाएंगे। मस्जिदों-दरगाहों के नीचे ये मंदिर ढूंढेंगे। मंदिर नहीं मिला तो उन्हें गैरकानूनी करार देकर तोड़फोड़ करेंगे। मुसलमानों को पंचर जोड़ने के काबिल रखेंगे।

उधर किसानों को भी मालूम है कि ये हमारे साथ क्या करेंगे। जो दो- तीन साल पहले हुआ था और जो आज भी हो रहा है, फिर-फिर वही करेंगे। उन्हें  आतंकवादी घोषित करेंगे। गोलियां चलवाएंगे,आंसू गैस छोड़ेंगे, रास्ते में कीलें ठुकवाएंगे। बैरिकेड्स लगवाएंगे। किसान नेताओं पर रासुका लगाएंगे, उनकी संपत्ति कुर्क करवाएंगे, उनके बैंक खातों पर रोक लगवाएंगे। और कोई समझौता कर भी लिया तो उसका पालन नहीं करेंगे। छात्रों को भी पता है कि ये आ गए तो स्कूलों- कालेजों- विश्वविद्यालयों की रही-सही बर्बादी के यज्ञ की पूर्णाहुति कर देंगे। अपनी विचारधारा के प्रतिकूल हर छात्र और अध्यापक को चिह्नित करेंगे। उसे उखाड़ फेंकेंगे। विरोध की आवाज़ कहीं से भी उठी तो उसे और उसकी सात पुश्तों को कुचल देंगे। कोई छात्राएं भी विरोध में आईं तो उन्हें आधी रात को विश्वविद्यालय के होस्टल से निकलवाकर सड़क पर खड़ा कर देंगे और साथ में बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा जोर से लगाएंगे। चुनावी बांड का खेला इस तरह से नहीं खेलने दिया गया तो दूसरी तरह खेलेंगे। सुप्रीम कोर्ट को ठेंगा दिखाएंगे। सेठों की सेवा अहर्निश करेंगे। उनके  पसीना क्या, खून तक बहा देंगे। अडानी का साथ, अडानी का विकास जारी रहेगा।


इनके विरोधी जानते हैं कि ये फिर आ गए तो उन पर छापामार युद्ध और तेज किया जाएगा, गिरफ्तारियां और की जाएंगी। जेलें और भरी जाएंगी।‍ विपक्ष की कमर पूरी तरह तोड़ दी जाएगी। पुतिनवाद का चरम यहां देखने को मिलेगा। सब जानते हैं कि ये आ गए तो लूट और लूट और लूट मचेगी, महंगाई अंतरिक्ष की ऊंचाई को छुएगी, चांद के बाद सूरज के सफर पर रवाना हो जाएगी। ब्रह्मांड से आगे जाने की महत्वाकांक्षा में गोते खाती रहेगी।

 गेहूं दुनिया में सस्ता होगा, भारत में महंगा। दुनिया में यूरिया के भाव घटेंगे, यहां बढ़ेंगे। लोग टमाटर, प्याज और लहसुन के लिए त्राहिमाम न करें तो फिर कैसा रामराज्य? मणिपुर अभी एक है, अनेक मणिपुर न बनें तो फिर कैसा रामराज्य? अडानी जी-अंबानी जी और ऊपर और ऊपर न चढ़ें, एक हजार साल हमें और न चूसें तो कैसा रामराज्य? जब तक सबके मुंह सिल न दिये जाएं, हाथ -पैर बांध न दिये जाएं, तो कैसा रामराज्य?जब सबकी आंखें बाहर निकली हुई हों, समझो, रामराज्य आ गया। जंगल सब कट चुके हों, बेरोजगारी चरम पर पहुंच चुकी हो, मजदूरी और घट चुकी हो, तो समझो, इनका वाला रामराज्य पधार गया। इस रामराज्य में जनता के अलावा बाकी सब हर्षित होंगे, रोग-शोक से मुक्त होंगे। जनता को हिंदुत्व का नया से नया उपहार मिलेगा। उसे नफरत करने के और काबिल बनाया जाएगा। दुनिया में ये अपने घामड़पन और बेवकूफियों का डंका इतना जोर से बजाएंगे कि इनके और हमारे सबके कान फूट जाएंगे। इतिहास इनकी हास्यास्पदताओं के किस्सों से भर जाएगा! युगों-युगों तक इन किस्सों को याद कर दुनिया भर में लोग हंसते रहेंगे। और दोष हम पर आएगा कि इनके हम पूर्वज कितने गये-बीते थे, अकल से कितने पैदल थे कि कैसे-कैसों के चक्कर में आ जाते थे! बरबादियों के रास्ते पर कितनी दूर तक राम-राम भजते हुए चले जाते थे। आगे की पीढ़ियों के लिए कुएं और खाइयां खोदते हुए जरा नहीं सोचते थे।

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