विष्णु नागर का व्यंग: मंदिर ही अब स्कूल-कॉलेज माने जाएँगे, घंटी बजाना होगी सबसे बड़ी योग्यता

मंदिर ही अब स्कूल -कालेज माने जाएँगे। घंटी बजाना सबसे बड़ी योग्यता होगी। मंदिर ही अब अस्पताल होंगे। भक्ति की वरिष्ठता के आधार पर भक्त ही डाक्टर से लेकर सफाईकर्मी तक होंगे।

फोटो: IANS
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विष्णु नागर

स्कूल-कालेज जितने खुलने थे, खुल चुके। अब उन्हें बंद और बर्बाद करने का समय आ चुका है। इस दिशा में प्रगति काफी त्वरित है। 2018 से 2019 के बीच ऐसे 51000 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ईश्वर की कृपा रही तो जल्दी ही बाकी सभी बंद हो जाएँगे। शिक्षा का संपूर्ण निजीकरण हो जाएगा। स्कूलों के सभी भवन, खाली जमीन समेत 50 साल की लीज पर अडाणी जी को दे दिए जाएँगे। इनमें से कुछ वे बाबा रामदेव और विश्व हिंदू परिषद को सबलेट कर देंगे।जाहिर है कि वह एक अच्छे दाता की तरह वीएचपी से कोई किराया नहीं लेंगे मगर उसे किराए की रसीद जारी करते रहेंगे।

अधिकांश सरकारी अस्पताल खुद बीमार और मरणासन्न हैं। शीघ्र ही इनके लिए बजट में शून्य प्रतिशत राशि का प्रावधान किया जानेवाला है। सरकारी पक्ष इस पर मेजें थपथपा कर इस घोषणा का स्वागत करेगा। यह शोक का विषय इसलिए नहीं है कि समय की माँग है कि नये- नये मंदिर बनें। जो हैं, उन्हें पोषाहार प्रदान करके अतिशीघ्र हृष्ट पुष्ट बनाया जाए। मंदिर ही अब स्कूल -कालेज माने जाएँगे। घंटी बजाना सबसे बड़ी योग्यता होगी। मंदिर ही अब अस्पताल होंगे। भक्ति की वरिष्ठता के आधार पर भक्त ही डाक्टर से लेकर सफाईकर्मी तक होंगे। हनुमान चालीसा का पाठ सभी रोगों की रामबाण औषधि होगी। मूर्छा आने पर हिंदू को अजान के समय हनुमान चालीसा का पाठ सुनाकर होश में लाया जाएगा। अगर किसी मुसलिम रोगी का आपरेशन करने के लिए उसे बेहोश करना होगा तो उसे बुलडोजर ध्वनि सुनाई जाएगी। होश में लाने के लिए साथ में जयश्री राम का नारा सुनाया जाएगा। जैसा कि गुरुजी ने बताया है वेद पुराणों में इस विधि का वर्णन विस्तार से किया गया है।


जो होगा, मंदिर में होगा। मंदिर से मेरा आशय राममंदिर से है। एक बड़ा सा राममंदिर अयोध्या में बन ही रहा है। उससे भी डेढ़ गुना बड़ा रामायण मंदिर पूर्वी चंपारण में निर्माणाधीन है। बताया जाता है कि इस जगह वापसी में रामजी की बारात ठहरी थी। वैसे सोचें तो राम जी ने विवाह से पहले और विवाह के बाद भी बहुत से पुण्य कार्य किए होंगे। कुछ का विवरण रामचरित मानस आदि में मिलता है, कुछ का नहीं , इसलिए यह आज भी शोध का विषय बना हुआ है। मसलन जब उन्होंने घुटने के बल चलना सीखा था तो वह स्थली विशेष कहाँ है? जब उनकी जन्मस्थली और बारात विश्राम स्थली की खोज आसानी से हो सकती है तो घुटना चलन स्थल की खोज क्यों संभव नहीं? यूजीसी इसके लिए शोध राशि प्रदान अवश्य करेगी। वहाँ भी एक मंदिर बने। एक मंदिर वहाँ भी हो, जहाँ से उन्होंने पैरों के बल खड़ा होना सीखा था। पता नहीं तब बच्चे कबड्डी खेलते थे या नहीं। कबड्डी-खो खो नहीं , तो कुछ और खेलते होंगे। पहली बार क्रिकेट -कबड्डी टाइप खेल उन्होंने जहाँ खेले होंगे, वहाँ भी एक-एक मंदिर की दरकार है। राम जी क्रिकेट भी खेलते थे, वॉलीबॉल और फुटबॉल भी। इनका संधान आज से पाँच लाख या छह हजार वर्ष पहले स्वयं राम जी ने किया था। ये भी शोध का अनछुआ विषय है। इससे हमें यह सिद्ध करने में आसानी होगी कि अयोध्या से ही ये खेल पश्चिम में पहुँचे और उन बदमाशों ने हड़प लिए।

रामजी की जो तस्वीर आज हम देखते हैं, उनमें उनका चेहरा सफाचट नजर आता है। अवश्य राम जी रोज दाढ़ी बनवाते होंगे। उस स्थल को पवित्र मान एक मंदिर वहाँ भी हो। मतलब अंत तक उन्होंने मंदिर बनवाने योग्य बहुत कुछ किया होगा। कम से कम एक-एक मंदिर वहाँ भी हो। आदमी की पूरी जिंदगी राममंदिरों की यात्रा में गुजर जाए, इससे उत्तम जीवन का ध्येय और क्या हो सकता है? तब इस देश का हर हिंदू गाय की पूँछ मजबूती से पकड़ कर उपयुक्त समय पर इस दुखमय-मायावी संसार से मुक्ति पा सकेगा। स्वर्ग में उसका स्थान सुनिश्चित होगा। नरक में उल्लू बोला करेंगे।


कुछ खोज और कुछ निर्णय छत्तीसगढ़ सरकार ने करके काम थोड़ा आसान कर दिया हैं। उसकी खोज के अनुसार राम जी ने वनवास काल में छत्तीसगढ़ के 75 स्थलों का भ्रमण किया था और 65 जगहों पर ठहरे थे। उन सब स्थलों को तीर्थ और पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया गया है। रामवन गमन पथ का निर्माण भी करने का सुंदर कदम उसने उठाया है। इस दिशा में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड आदि सरकारों को भी अपनी प्रगति की रिपोर्ट राष्ट्र के सामने पेश करना चाहिए। देश माँगे लाखों राम मंदिर।

भारतभूमि वैसे तो तीस- चालीस लाख मंदिरों से पटी पड़ी है मगर इस देश की महानता और प्राचीनता की दृष्टि से यह कुछ भी नहीं। मेरी तो सदेच्छा है कि भारत में, हर शहर, हर गाँव, हर नुक्कड़, हर सड़क, हर खेत में हर सौ मीटर पर एक मंदिर हो। केवल मंदिर हो और कुछ नहीं हो और सारे के सारे राम मंदिर हों। इतने मंदिर हों कि कार, मोटरसाइकिल, स्कूटर वाले रोये कि हाय कभी वह भी जमाना था, जब हम इन्हें चलाया करते थे और अब ये सब कचरा हो चुका है। हर पैदल चलने वाला खुश हो कि देखो सालों की अकड़ रामजी ने फुस्स कर दी। भूखा कहे कि रामजी ने सच्चा समाजवाद ला दिया। हमीं क्यों तुम भी अब भूखों मरो। अब बाँच कर दिखाओ, हनुमान चालीसा। अब करके दिखाओ सुंदरकांड का पाठ। अब करके दिखाओ, नरसंहार का आह्वान। अब कहो कि सारी दुनिया, भारत की ओर देख रही है।

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