विष्णु नागर का व्यंग्यः जिधर देखो, उधर इनकी टांय-टांय फिस्स, अब लोगों ने इनसे और इनके गुंडों से डरना बंद कर दिया!
किसी दिन एसआईआर के जरिए चुनाव जीतने का इनका ताश का महल भी इसी तरह ढह जाएगा, हवा हो जाएगा तो फिर बचेगा क्या? अंबानी और अडानी? इस टाइप के प्राणी किसी के नहीं होते। जिधर बम, उधर हम इनकी बुनियादी आइडियोलॉजी है!

मोदी के भारत में मोदी का हर पांसा आज उल्टा पड़ रहा है। भैया जी ने सुदूर किर्गिस्तान से बेहद उत्साहित होकर इंस्टाग्राम पर पहली तिमाही में विकास दर 7.8 होने की घोषणा की।अपनी ओर से उन्होंने खुशी की लहर पूरे भारत में दौड़ा दी, मगर वह लौटकर उन्हें ही डुबाने लगी। खुद उन्होंने इसका श्रेय न लेते हुए जनता को इसकी बधाई दी मगर जनता इसे लेने को तैयार नहीं। उसने इन्हें ही लौटा दिया। कहा कि अपनी बधाई अपने पास रखो। हो सकता है यह किसी दिन आपके काम आ जाए क्योंकि जन्नत की हकीकत तो सब जानते हैं- आप भी और हम भी!
और तो और इनके काल में वित्त सचिव रहे सुभाष चन्द्र गर्ग ने इनके इस दावे को मुस्कुराते हुए इतना पंक्चर कर दिया कि फिर इनके अपनों से भी इसमें हवा नहीं भरी गई। गर्ग जी ने कहा कि महाराज सच तो यह है कि यह दर मात्र 2.6 है और मुद्रास्फीति को देखते हुए तो यह शून्य प्रतिशत है। मोदी जी आप आंकड़ों का खेल न खेलें। आप इधर के आंकड़े उधर एडजस्ट न करें कृपया। इसके बाद मोदी जी की विकास दर की जय-जय की बजाय फू-फू होने लगी। लोग कहने लगे कि मोदी जी, अडानी-अंबानी की विकास दर को देश की विकास दर न मानें। उनकी विकास दर तो इससे भी और ऊंची है। तब से महाराज जी और उनकी मित्रमंडली की बोलती बंद सी है। बड़ी हुई विकास धूल खा रही है!
इसके साथ ही मोदी जी ने एक बार फिर से यह कहा कि अभी आप एक साल तक विदेश यात्रा न करें और सोना भी न खरीदें तो लोगों ने पूछा कि माननीय जब विकास दर इतनी कठिनाइयों के बीच भी इतनी ऊंची-ऊंची छलांगें मार रही है तो इस अपील की आवश्यकता क्यों? तब से उनकी सिट्टी और पिट्टी दोनों गुम है! न सिट्टी मिल रही है, न पिट्टी!
उधर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद हल्द्वानी के रामलीला मैदान को यज्ञ- मंत्रादि से 'पवित्र' किया गया क्योंकि खड़गे जी दलित जो ठहरे और उत्तराखंड है देवभूमि! उसे एक दलित और वह भी कांग्रेसी अपवित्र करे, यह संघ परिवार सहन नहीं कर सकता! कांग्रेस ने इस पवित्रीकरण की शिकायत की तो एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई मगर एक हिंदूवादी की ओर से राहुल गांधी के विरुद्ध हो गई क्योंकि उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में इस 'पवित्रीकरण' का विरोध किया था। गुरुवार को सुना गया कि उत्तराखंड की पुलिस दिल्ली आ रही है- राहुल गांधी को गिरफ्तार करने मगर अंत में यह मामला भी टांय-टांय फिस्स हो गया। पुलिस वहीं की वहीं फ्रिज हो गई!
मोदी के मंत्री जे पी नड्डा ने कॉक्रोच जनता पार्टी के आंदोलन के दौरान उनके नेताओं को आश्वासन दिया था कि उन सभी आंदोलनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस की जाएगी, जिन पर आपराधिक मामले नहीं हैं। पुरानी अकड़ चूंकि अभी बाकी है, गई नहीं है तो चालीस दिन बीत जाने पर भी सरकार ने कुछ नहीं किया। सोचा कि इन्हें जो करना हो, करके देख लें।हम तो पहले भी अपने वायदों से मुकरते आए हैं, अब भी मुकरेंगे। तब कॉक्रोच जनता पार्टी की ओर से पांच सितंबर को फिर से आंदोलन की चेतावनी दी गई, तो इनकी नाड़ी खिसक गई।एकदम से रास्ते पर आ गए। सारी अकड़ धूल में मिल गई। सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट गई एफआईआर वापस करवाने। इस तरह यह मामला भी टांय-टांय फिस्स हुआ!
रैपिड एक्शन फोर्स की पैलेट गन से बुरी तरह घायल साहिल लोचव की एफआईआर एक महीने तक दर्ज नहीं की गई। कोई सुनने को तैयार नहीं था। मंत्रियों का तो कहना था कि पैलेट गन चलने की बात ही झूठी है। राहुल गांधी इकतीसवें दिन एफआईआर करवाने पार्लियामेंट थाने पहुंचे और धरना देकर बैठ गए कि जब तक पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं होगी, हम यहीं रहेंगे। तो फिर से इनकी नाड़ी खिसकी। इन्हें अंदाज नहीं था कि राहुल गांधी इस मामले में इस तरह कूद पड़ेंगे। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने खूब सिर खपाया कि राहुल गांधी से हार मानें या न मानें। सात घंटे बाद एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। यहां भी टांय-टांय फिस्स हो गई।
भारत सरकार के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आशीष जोशी को दिल्ली पुलिस ने रास्ते से उठा लिया क्योंकि उन्होंने गृहमंत्री और गृह सचिव के बीच मतभेद की बात अपनी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कही थी, जो सरकार की नजर में एक टॉप सीक्रेट थी। उन्हें पकड़कर दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा में ले जाया गया। परिजनों को कुछ नहीं बताया गया। उनसे नौ घंटे तक पूछताछ की गई। निकला कुछ नहीं। मजबूरन उन्हें छोड़ना पड़ा। उन्होंने अगले दिन फैज अहमद फैज की नज्म़ 'हम देखेंगे' पोस्ट करके अपने निडर होने का एहसास फिर से दे दिया। इस मामले में भी टांय-टांय फिस्स हो गई!
इधर पंद्रह साल की जिस आंदोलनकारी लड़की रुचिका के माता-पिता पर दबाव डालकर और बलात्कार और हत्या की धमकियां दिलाकर उससे माफी मंगवाई थी, उसने शेरनी की तरह दहाड़ना शुरू कर दिया है। उसने साफ कहा है कि मोदी जी आप कायर हो। अब मैं पीछे हटनेवाली नहीं हूं। मेरे पास अब खोने के लिये कुछ नहीं बचा है! उस बच्ची को डराने का दांव भी अंततः खाली गया। यहां भी टांय-टांय फिस्स हो गई।
इधर एक संघी गुंडे स्वतंत्र भारद्वाज ने जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल लड़की नीशू आजाद के पिता संजय कुमार को मार डालने के इरादे से उनका सिर फोड़ा। इसका टीवी पर गौरव गान भी किया। उन्हें सिर में सात टांके आए, इस पर उस गुंडे ने खुशी जाहिर की। उसने नीशू को बलात्कार और मारने की धमकी भी दी थी। उसने नरेन्द्र मोदी से लेकर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा को अपना बड़ा भाई बताया। यह भी कहा कि राहुल गांधी तो क्या चीज है, पूरा विपक्ष भी यहां तक कि ट्रंप और नेतन्याहू भी आ जाएं तो हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, हमारा इतना जलवा है!
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यूथ कांग्रेस और कॉक्रोच जनता पार्टी के संसद मार्ग पुलिस थाने पर प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने 72 घंटे में कार्रवाई करने का भरोसा दिया, मगर नेपाल भागने के मंसूबों को विफल करते हुए कुछ ही घंटों के अंदर उस भगोड़े को बुलंदशहर में दबोच लिया। गुंडागर्दी से आंदोलनकारियों को डराने का यह दांव भी खाली गया। टांय-टांय फिस्स हो गया।
इधर इनकी इतनी बार इतनी तरह से और इतनी तेजी से टांय-टांय फिस्स हुई है कि जिधर भी देखो, इनकी टांय-टांय फिस्स ही दिखाई और सुनाई देती है। अब लोगों ने इनसे और इनके गुंडों से डरना बंद कर दिया है। जब लोगों ने देख लिया कि इनके पास देने के लिए धमकियां और पकड़ाने के लिए 2047 में भारत को विकसित बनाने के झुनझुने के अलावा कुछ नहीं है तो कोई क्यों इनसे डरे!
किसी दिन एसआईआर के जरिए चुनाव जीतने का इनका ताश का महल भी इसी तरह ढह जाएगा, हवा हो जाएगा तो फिर बचेगा क्या? अंबानी और अडानी? इस टाइप के प्राणी किसी के नहीं होते। जिधर बम, उधर हम इनकी बुनियादी आइडियोलॉजी है! इस आइडियोलॉजी पर ये फिर से सफलतापूर्वक चलने लगेंगे। दिशा ही तो बदलना है। इनकी जगह उनकी ही तो जय-जयकार करना है! इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ये हवा के साथ बहने वाले लोग हैं। ये सबसे जल्दी बदलते हैं। जिसे सिर पर बैठा रखा है, उसे नीचे फेंकने में ये जरा देरी नहीं करते। उसे कितनी ही चोट लग जाए, उसकी ओर देखते तक नहीं। आईसीयू में वह पड़ा हो तो उसे देखने भी नहीं जाते। उसका आदमी फोन करे तो उठाते नहीं! इधर आपने देखा होगा कि धंधेबाज रामदेव बारह साल बाद कैसी 'बहकी-बहकी' बातें करने लगा है!
मतलब टांय-टांय फिस्स चालू आहे!
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