कोरोना संकट के बीच चुनाव आयोग ने सशर्त महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव को दी मंजूरी, 21 मई को होगा मतदान

उद्धव ठाकरे को एमएलसी नामित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कैबिनेट से दो बार प्रस्ताव पास कर भेजा था। इस पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी लंबे समय तक चुप थे, जिसके बाद उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद अब महाराष्ट्र में सियासी संकट खत्म होता दिख रहा है।

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नवजीवन डेस्क

चुनाव आयोगआयोग ने 21 मई को ही महाराष्ट्र विधान परिषद का चुनाव करा लेने का फैसला किया है। उद्धव को भी मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए 27 मई से पहले महाराष्ट्र विधानसभा के दोनों सदनों में से एक का सदस्य बन जाना अनिवार्य था। शुक्रवार को हुई चुनाव आयोग की एक बैठक में इसका फैसला लिया गया है। इससे पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि राज्य में विधान परिषद की खाली सीटों पर जल्द से जल्द चुनाव कर राज्य की राजनीतिक अनिश्चितता को दूर करने की कोशिश करे।

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चुनाव आयोग के फैसले के बाद महाराष्ट्र विधान परिषद का चुनाव आज से 21 दिन बाद यानि 21 मई को हो जाना है। बता दें कि राज्य में विधान परिषद की 9 सीटें पिछले 24 अप्रैल को ही खाली हो गई थीं। इससे पहले महाराष्ट्र के गवर्नर बीएस कोश्यारी ने चुनाव आयोग से निवेदन किया था कि राज्य में राजनीतिक अनिश्चतता खत्म करने के लिए विधान परिषद की 9 सीटों पर चुनाव की घोषणा करे। बता दें कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा इस वक्त लॉकडाउन की वजह से अमेरिका में फंसे हुए हैं और वे चुनाव आयोग की बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।

गौरतलब है कि पिछले साल 28 नवंबर को उद्धव ठाकरे ने जब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब वह राज्य विधानसभा के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। संविधान के तहत उद्धव को शपथ लेने के 6 महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य निर्वाचित होना अनिवार्य है। उनकी ये मियाद 27 मई को पूरी हो रही है। ठाकरे की योजना थी कि 24 अप्रैल को जब 9 विधान परिषद सीट खाली होंगी तो वे उसके जरिए सदन के सदस्य चुन लिए जाएंगे। लेकिन, कोरोना वायरस के प्रकोप के चलते चुनाव आयोग ने विधान परिषद चुनाव को स्थगित कर दिया था। उद्धव ठाकरे को एमएलसी नामित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कैबिनेट से दो बार प्रस्ताव पास कर भेजा था। इस पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी लंबे समय तक चुप थे, जिसके बाद उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन कर मदद की गुहार लगाई थी, जिसके बाद अब महाराष्ट्र में सियासी संकट खत्म होता दिख रहा है।

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