‘महायुति’ में दरार, विधान परिषद चुनाव में हार पर बीजेपी ने सहयोगी शिवसेना को ठहराया जिम्मेदार
बीजेपी के नेता ने कहा कि शिवसेना ने अपने सहयोगियों को मुश्किल में डाल दिया और गठबंधन के तीन सीट जीतने का मौका गंवा दिया। उन्होंने कहा कि शिवसेना का यह रुख ‘महायुति’ के हित में नहीं था।

विधान परिषद चुनाव के नतीजे आते ही सत्तारूढ़ 'महायुति' में दरारें सामने आईं
बीजेपी ने खराब प्रदर्शन के लिए सहयोगी दल शिवसेना को ही जिम्मेदार ठहराया
महा विकास आघाडी ने तीन सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी नीत ‘महायुति’ को दो सीटे मिली
महाराष्ट्र में विधान परिषद की पांच सीट पर हुए चुनाव के नतीजे आते ही गुरूवार को सत्तारूढ़ 'महायुति' में दरारें सामने आ गईं। बीजेपी ने विधान परिषद चुनावों में गठबंधन के खराब प्रदर्शन के लिए अपने सहयोगी दल शिवसेना को ही जिम्मेदार ठहराया और उस पर सहयोग नहीं करने का खुला आरोप लगाया है।
एमवीए ने तीन सीट जीतीं, ‘महायुति’ को केवल दो सीट
महाराष्ट्र विधान परिषद के पांच स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इनमें से विपक्षी महा विकास आघाडी (एमवीए) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी नीत ‘महायुति’ ने दो सीटें हासिल कीं। ये चुनाव पुणे स्नातक, नागपुर स्नातक, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) स्नातक, पुणे शिक्षक और अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए हुए थे।
बीजेपी ने सहयोगी शिवसेना पर लगाए आरोप
नतीजों में महायुति को दो सीट और महाविकास अघाड़ी को तीन सीट मिलने पर प्रदेश बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि शिवसेना ने पुणे और नागपुर निर्वाचन क्षेत्रों में अपने गठबंधन के दायित्वों को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि पुणे में (शिक्षक सीट) निर्दलीय उम्मीदवार सचिन सानप को आखिरी मौके पर समर्थन देने से ‘महायुति’ की एकता को नुकसान पहुंचा।
बीजेपी नेता नवनाथ बन ने शिवसेना विधायक अब्दुल सत्तार पर आरोप लगाया कि उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के खिलाफ प्रचार किया, जिससे गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ा। सत्तारूढ़ ‘महायुति’ गठबंधन में भाजपा, शिवसेना और राकांपा शामिल हैं।
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शिवसेना का रुख ‘महायुति’ के हित में नहीं था
नवनाथ बन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सानप को शिवसेना का समर्थन मिलने के बावजूद बीजेपी को इसका फायदा वोटों के रूप में नहीं मिला। उन्होंने दावा किया कि अगर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बीजेपी और एनसीपी का समर्थन किया होता, तो ‘महायुति’ सभी पांच सीट जीत सकती थी।
बीजेपी नेता ने कहा, ‘‘पुणे में एक सीट पर जोर देकर शिवसेना ने अपने सहयोगियों को मुश्किल में डाल दिया और गठबंधन के तीन सीट जीतने का मौका गंवा दिया।’’ उन्होंने कहा कि शिवसेना का यह रुख ‘महायुति’ के हित में नहीं था। एक सीट के लिए सहयोगी दलों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति महायुति के हित में नहीं है।
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महायुति केवल दो सीट पर ही क्यों सिमट गया
वहीं, बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने विधान परिषद चुनाव के नतीजों की समीक्षा की मांग करते हुए सवाल उठाया कि सहयोगी दलों के मिलकर चुनाव लड़ने पर सभी पांच सीट जीतने की संभावना होने के बावजूद सत्तारूढ़ गठबंधन केवल दो सीट ही क्यों जीत सका।
उपाध्ये ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में सवाल किया, ‘‘क्या पांच सीट के नतीजों के बाद महायुति के तौर पर हम आत्ममंथन करेंगे? क्या हम इस बात पर विचार करेंगे कि जब मिलकर चुनाव लड़ने पर सभी पांच सीट जीतने की प्रबल संभावना थी, तो हम केवल दो सीट पर ही क्यों सिमट गए?’’
कांग्रेस के अभिजीत ने नागपुर में बीजेपी को दिया झटका
एनसीपी (शरदचंद्र पवार) उम्मीदवार हर्षदा देशमुख-जाधव ने पुणे स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस के अभिजीत वंजारी नागपुर स्नातक सीट पर विजयी रहे। छत्रपति संभाजीनगर (मराठवाड़ा) स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भी एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। वहीं बीजेपी के उम्मीदवार कौस्तुभ गावड़े ने पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की, जबकि शिवसेना उम्मीदवार किरण सरनाइक को अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सफलता मिली।
