
मोदी सरकार के नेतृत्व में देश के आर्थिक विकास की राह लगातार डवांडोल हो रही है। वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर घटकर 5.7 फीसदी तक आ गई है। इसी के साथ जीडीपी की दर पिछले तीन साल में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। 2016 के वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में में जीडीपी की दर 6.1 फीसदी थी। आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान उठाना पड़ा है और उसी की वजह से देश की विकास दर का यह हाल हुआ है।
Published: 31 Aug 2017, 9:50 PM IST
ऐसा अनुमान था कि था कि अप्रैल से जून के बीच की तिमाही में भारत की विकास दर 6.6 फीसदी रहेगी, लेकिन पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 0.4 फीसदी की कमी आ गई है। यह भी कहा जा रहा है कि जीएसटी को लेकर कई तरह की शंकाओं की वजह से ऐसा हुआ है। सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पुराने तरीके से आकलन करने पर जीडीपी की दर मात्र 3.5 फीसदी ही रहेगी। कुछ महीनों पहले सरकार ने जीडीपी के आकलन का तरीका बदल दिया था।
Published: 31 Aug 2017, 9:50 PM IST
इस तिमाही में उत्पादन क्षेत्र की विकास दर 1.2 फीसदी रह गई थी, जो पिछले साल अप्रैल-जून तिमाही में 10.7 फीसदी थी। उत्पादन में गिरावट के चलते औद्योगिक क्षेत्र की विकास दर 7.4 फीसदी से गिरकर 1.6 फीसदी तक पहुंच गई है। जबकि निर्माण क्षेत्र की विकास दर 2 फीसदी पर रही है, जो पिछले साल इसी तिमाही में 3.1 फीसद के स्तर पर थी। इसके अलावा कृषि क्षेत्र की विकास दर में गिरावट आई है।
जीडीपी के आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब नोटबंदी को लेकर आरबीआई की रिपार्ट पर सरकार को जबरदस्त आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अर्थव्यवस्था के हर मोर्चे पर सरकार की विफलता सामने आ रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जो सरकार अपनी गलतियों को छुपाने के लिए हमेशा किसी बहाने की ताक में रहती है, वह जीडीपी की इस गिरती दर को लेकर क्या जवाब देती है।
Published: 31 Aug 2017, 9:50 PM IST
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Published: 31 Aug 2017, 9:50 PM IST