अर्थतंत्र

मंदी के बीच मोदी सरकार को एक और झटका, डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में भारी गिरावट, 17.3% की जगह सिर्फ 5% का इजाफा

सरकार ने बजट अनुमान में 13.35 लाख करोड़ रुपये अर्जित करने का अनुमानित लक्ष्य रखा है। अनुमानित रकम को हासिल करने के लिए बाकी बचे समय में सरकार को मौजूदा राशि से दुगना राशि राजस्व के रूप में अर्जित करनी होगी।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

केंद्र की मोदी सरकार भले ही आर्थिक मंदी की बात से इनकार कर रही हो, लेकिन मंदी का असर सरकार के सामने अलग-अलग रूप में समाने आ रहा है। अब सरकार के राजस्व पर मंदी का असर देखने को मिला है। 2019-2020 के पहले साढ़े पांच महीने में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह (नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन) में भारी कमी देखने को मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर महीने के बीच नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सिर्फ 4.4 लाख करोड़ करोड़ रहा है। यह बढ़ोतरी सिर्फ 5 प्रतिशत रही है।

डायरेक्ट टैक्स में कमी आने के साथ ही सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई है। सरकार ने बजट अनुमान में 13.35 लाख करोड़ रुपये अर्जित करने का अनुमानित लक्ष्य रखा है। अनुमानित रकम को हासिल करने के लिए बाकी बचे समय में सरकार को मौजूदा राशि से दुगना राशि राजस्व के रूप में अर्जित करनी होगी। आर्थिक मंदी के दौर में यह बेहद मुश्किल काम लगता है।

खबरों के मुताबिक, आर्थिक मंदी की वजह से एडवांस टैक्स संग्रह में बढ़ोतरी एक अंक (6 प्रतिशत) में ही सिमट रही है। पिछले साल इसी अवधि में यह बढ़तरी 18 प्रतिशत थी। ऐसे में इस आकंड़े से साफ होता है कि मंदी का असर डायरेक्ट टैक्स पर पड़ा है। मोदी सकरकार भले ही यह दिखा रही हो कि सब कुछ ठीक चल रही है, लेकिन उसके सामने कई मुश्किलें आ खड़ी हुई हैं। आर्थिक मंदी और डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में कमी के बीच सरकार का राजकोषीय लोखा-जोखा भी गड़बड़ा गया है। ऐसे में सरकार के लिए जीडीपी का 3.3 फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करना बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

देश का ऑटो सेक्टर बुरे दौर से गुजर रहा है। आलम यह है कि बड़ी कंपनियां प्रोडक्शन बंद करने को मजबूर हैं। उद्योगे से जुड़े लोग मंदी के लिए जीएसीट को एक बड़ी वजह बता रहे हैं, और जीएसटी दर में कटौती की मांग कर रहे हैं। जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले डायरेक्ट टैक्स संग्रह की कमी के बाद सरकार के लिए काउंसिल की बैठक में इंडस्ट्री के दबाव के बावजदू जीएसटी की दरों में कटौती करना लगभग नामुमकिन दिखने लगा है।

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Published: 19 Sep 2019, 12:30 PM IST