
सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को बड़ी गिरावट देखी गई, जिससे सोने का दाम 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत 2.28 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे पहुंच गई।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम 4,245 रुपए कम होकर 1,46,608 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,50,853 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,181 रुपए प्रति 10 ग्राम से कम होकर 1,34,293 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है। 18 कैरेट सोने का दाम 1,13,140 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,09,956 रुपए प्रति 10 ग्राम था। सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई।
चांदी का दाम 12,023 रुपए कम होकर 2,27,813 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,39,836 रुपए प्रति किलो था। हाजिर के साथ-साथ वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।
खबर लिखे जाने तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 05 जून 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 3.55 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,250 रुपए और चांदी का 05 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 6.69 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,27,200 रुपए पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। खबर लिखे जाने तक सोना 3.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,643 डॉलर प्रति औंस और चांदी 6.83 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 70.862 डॉलर प्रति औंस पर थी।
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भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहा। बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, लेकिन दिन के अंत में तेजी के साथ बंद हुआ। कारोबारी सत्र में बाजार में मजबूती रिकवरी देखी गई। सेंसेक्स में इंट्रा-डे लो 71,545 अंक से 1,774 अंक की बढ़त देखी गई।
दिन के अंत में सेंसेक्स 185.23 अंक या 0.25 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,319.55 की बढ़त के साथ बंद हुआ।
निफ्टी में इंट्रा-डे लो 22,182 से 531 अंक की रिकवरी देखी गई। यह 33.70 अंक या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,713.10 पर बंद हुआ।
बाजार में तेजी का नेतृत्व आईटी शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी 2.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी रियल्टी 1.07 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.54 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 0.39 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.39 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.21 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.93 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा 0.92 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.86 प्रतिशत, निफ्टी ऑयलएंडगैस 0.79 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.62 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 0.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, टाइटन, एक्सिस बैंक, बीईएल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, इंडिगो, एलएंडटी और एसबीआई गेनर्स थे। एशियन पेंट्स, इटरनल, सन फार्मा, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फिनसर्व और टाटा स्टील लूजर्स थे।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 142.10 अंक या 0.26 प्रतिशत की कमजोरी के सथ 53,677.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 59.30 अंक या 0.38 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,650.50 पर था।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है। गुरुवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ती तेल की कीमतों के कारण यह फैसला लिया जा सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, अब ब्याज दरों में कटौती का दौर समाप्त हो चुका है और आरबीआई लंबे समय तक दरों को स्थिर रख सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल न्यूट्रल रुख अपनाएगा और बदलते हालात पर नजर रखेगा। साथ ही, तरलता और रुपए को सहारा देने के लिए कुछ खास कदम भी उठाए जा सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर महंगाई 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार करती है, तो साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी की जा सकती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, "युद्ध का आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर असर अगले 3-4 महीनों में साफ होगा। इसके बाद आरबीआई अपनी ब्याज दरों की दिशा पर फैसला लेगा।"
पिछली नीति बैठक के बाद से अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।
बाजारों में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। इस युद्ध के कारण विदेशी निवेशकों (एफपीआई) का पैसा भारत से बाहर जा रहा है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी हैं और भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 94.83 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस युद्ध का असर वैश्विक आर्थिक वृद्धि और महंगाई दोनों पर पड़ेगा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा, इसलिए आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी और महंगाई के अपने अनुमान में बदलाव कर सकता है।
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डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए में गुरुवार को 13 वर्षों में सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली और इसके चलते अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 93.10 के स्तर पर बंद हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपए में तेजी की वजह आरबीआई द्वारा भारतीय मुद्रा में सट्टेबाजी को कम करने के लिए कदम उठाना है।
हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए में तेज गिरावट को रोकने के लिए घरेलू और विदेशी मार्केट्स में नियमों को सख्त किया है।
एक विश्लेषक ने कहा,“अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के बाद रिस्क सेंटीमेंट में सुधार के कारण रुपए में तेजी आई। उनके भाषण ने तनाव बढ़ाने के बजाय बातचीत का संकेत दिया गया, जिससे बाजार में तेजी आई। हालांकि, अनिश्चितता का स्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिससे मुद्रा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।”
तीन दिन की छुट्टी के बाद कारोबार फिर से शुरू होने पर रुपया दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत तक बढ़कर 93.25 पर पहुंच गया, जो सितंबर 2013 के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपए की सबसे मजबूत वृद्धि है।
केंद्रीय बैंक ने हाल ही में बैंकों को निवासी और अनिवासी दोनों ग्राहकों को रुपए के नॉन-डिलीवरी वाले फॉरवर्ड जारी करने से रोक दिया है, और कंपनियों को रद्द किए गए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को पुनः बुक करने से भी प्रतिबंधित कर दिया है।
इससे पहले उठाए गए कदमों में बैंकों की रुपए में नेट ओपन पॉजिशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित करना और संबंधित पक्षों के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर रोक लगाना शामिल था।
इन कदमों का उद्देश्य मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी की गतिविधियों को कम करना और रुपए को स्थिर करना है।
विश्लेषकों ने कहा कि भारत का मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार, जो 700 अरब डॉलर से अधिक है, अस्थिरता से सुरक्षा प्रदान करता है और केंद्रीय बैंक को जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की गुंजाइश देता है।
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