
सर्राफा बाजार में आज एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। सोने-चांदी की कीमतों में चमक फिर बढ़ी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर आज शुरुआती कारोबार में ही सोना-चांदी हरे निशान में ट्रेड कर रही हैं। वैश्विक संकेतों और घरेलू मांग के बीच आज सोना और चांदी दोनों ही बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। 2 अप्रैल 2026 की एक्सपायरी वाला सोना ₹1,139.00 (0.73%) की भारी बढ़त के साथ ₹1,56,900.00 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। चांदी की कीमतों में भी आज अच्छी तेजी है। 5 मार्च 2026 की एक्सपायरी वाली चांदी ₹4,029.00 (1.65%) की रिकॉर्ड उछाल के साथ ₹2,48,297.00 प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है.
आज एक बार फिर सोने-चांदी की कीमतों में तेज हलचल देखने को मिल रही है. पिछले कुछ दिनों से लगातार सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है। जानकारों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद व्यापक बिकवाली होने से बृहस्पतिवार को घरेलू शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,236 अंक टूट गया जबकि निफ्टी 365 अंक लुढ़क गया।
बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स तीन सत्रों से जारी तेजी पर विराम लगाते हुए 1,236.11 अंक यानी 1.48 प्रतिशत टूटकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 365 अंक यानी 1.41 प्रतिशत लुढ़ककर 25,454.35 अंक पर आ गया।
सेंसेक्स की कंपनियों में इंटरग्लोब एविएशन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, अदाणी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, आईटीसी लिमिटेड, पावर ग्रिड के शेयरों में प्रमुख रूप से गिरावट रही।
जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक निवेशक धारणा को प्रभावित किया, जिससे बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।’’
नायर ने कहा कि कच्चे तेल के साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच जाने से मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ीं और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते बाजार में अस्थिरता बढ़ी।
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अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी ने गुरुवार को घोषणा की कि जियो और रिलायंस इंडस्ट्रीज अगले सात वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में संयुक्त रूप से 10 लाख करोड़ रुपए तक का निवेश करेंगे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ने राष्ट्रीय राजधानी में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में अपने संबोधन में कहा,"यह केवल मूल्यांकन बढ़ाने के लिए निवेश नहीं है, बल्कि यह धैर्यपूर्ण, अनुशासित, राष्ट्र निर्माण के लिए लगाई लाने वाली पूंजी है, जिसे आने वाले दशकों तक टिकाऊ आर्थिक मूल्य और रणनीतिक मजबूती हासिल के लिए डिजाइन किया गया है।"
उन्होंने कहा कि आज एआई में सबसे बड़ी बाधा प्रतिभा या कल्पना नहीं है। बल्कि कंप्यूटिंग की कमी और उच्च लागत है। इसलिए, जियो इंटेलिजेंस तीन साहसिक पहलों के माध्यम से भारत का आत्मनिर्भर कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा।
पहली पहल गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर होगी। कंपनी ने जामनगर में मल्टी-गीगावाट क्षमता वाले, एआई-अनुकूल डेटा सेंटरों का निर्माण शुरू कर दिया है।
अंबानी ने कहा कि 2026 की दूसरी छमाही में 120 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले डेटा सेंटर चालू हो जाएंगे, जिससे प्रशिक्षण और बड़े पैमाने पर अनुमान लगाने के लिए गीगावाट-स्तरीय कंप्यूटिंग का स्पष्ट मार्ग प्रशस्त होगा।
दूसरी पहल, कंपनी के पास 10 गीगावाट तक की अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी क्षमता है, जो कच्छ और आंध्र प्रदेश में सौर ऊर्जा पर आधारित है।
तीसरी पहल इसकी राष्ट्रव्यापी एज कंप्यूटिंग है। जियो के नेटवर्क के साथ गहराई से एकीकृत एज कंप्यूटिंग लेयर, भारतीयों के रहने, सीखने और काम करने के स्थानों के करीब, तेज, कम विलंबता वाली और किफायती सूचना प्रदान करेगी।
उन्होंने आगे कहा कि जियो इंटेलिजेंस भारत की डीप-टेक और उन्नत विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनने के लिए एआई पर ध्यान केंद्रित करेगा, और न केवल बड़े उद्यमों बल्कि कृषि, लघु व्यवसायों और अनौपचारिक क्षेत्र तक भी पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि जियो इंटेलिजेंस सिर्फ एक खोज या प्रश्न पूछने का उपकरण नहीं होगा; यह मुख्य रूप से उत्पादकता और दक्षता बढ़ाने का एक संसाधन होगा।
दूसरा लक्ष्य सभी भारतीय भाषाओं में विश्व-अग्रणी बहुभाषी एआई क्षमता हासिल करना होगा। उन्होंने कहा, "जब किसान और कारीगर एआई से अपनी भाषा में बात करेंगे, और छात्र अपनी मातृभाषा में सीखेंगे - यह सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि समावेशिता है।"
उन्होंने आगे कहा कि रिलायंस समूह यह साबित करेगा कि एआई से नौकरियां नहीं छिनतीं, बल्कि इससे उच्च कौशल वाले नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
अंबानी ने कहा कि एआई की कहानी अब "किसके पास सबसे अच्छा मॉडल है" से बदलकर "कौन उपयोग की गति और व्यापकता के लिए सबसे मजबूत इकोसिस्टम बना सकता है" पर केंद्रित हो गई है।
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