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अर्थतंत्र की खबरें: ग्लोबल टेंशन से कांप उठा शेयर बाजार! चौथे दिन गिरावट, लेकिन आम जनता के लिए आई बड़ी खुशखबरी

भारतीय शेयर बाजार कमोबेश स्थिर रुझान के साथ बंद हुए। अमेरिका-ईरान गतिरोध बने रहने और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

ऊंची तेल कीमतों और अमेरिका-ईरान गतिरोध के लंबे समय तक बने रहने के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित होने से घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को कमजोरी के साथ बंद हुए। सेंसेक्स में 71 अंक और निफ्टी में 30 अंक की गिरावट दर्ज की गई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 70.71 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय यह 395.59 अंक यानी 0.50 प्रतिशत गिरकर 77,684.37 अंक तक आ गया था।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी भी 29.85 अंक यानी 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,366 अंक पर बंद हुआ। यह निफ्टी में गिरावट का लगातार चौथा सत्र रहा।

सेंसेक्स के समूह में शामिल कंपनियों में से एशियन पेंट्स, इंडिगो, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, भारतीय स्टेट बैंक और एचसीएल टेक के शेयर गिरावट में रहे।

दूसरी तरफ, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक और टाइटन के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत बढ़कर 87.15 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा, "भारतीय शेयर बाजार कमोबेश स्थिर रुझान के साथ बंद हुए। अमेरिका-ईरान गतिरोध बने रहने और होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। अमेरिकी शेयर बाजार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और अमेरिकी महंगाई के नरम आंकड़ों के बावजूद घरेलू बाजारों ने सतर्कता दिखाई।"

व्यापक बाजार में छोटी कंपनियों का बीएसई स्मालकैप सेलेक्ट सूचकांक 0.65 प्रतिशत की गिरावट पर रहा जबकि मझोली कंपनियों के मिडकैप सेलेक्ट सूचकांक में 0.13 प्रतिशत की कमजोरी रही।

क्षेत्रवार सूचकांकों में आवासीय वित्त खंड 1.40 प्रतिशत के नुकसान में रहा जबकि मिडस्माल निजी बैंक सूचकांक 0.58 प्रतिशत, तेल एवं गैस खंड 0.45 प्रतिशत और ऊर्जा खंड 0.44 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।

वहीं, अस्पताल खंड ने 1.49 प्रतिशत की तेजी दिखाई और दूरसंचार खंड में 0.86 प्रतिशत, बीमा खंड में 0.21 प्रतिशत और टिकाऊ उपभोक्ता खंड में 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

शोध विश्लेषक फर्म एचएसटी वेल्थ के संस्थापक एवं सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन ने कहा, "पश्चिम एशिया में नए सिरे से उपजे तनाव से कच्चा तेल चढ़ गया और वॉल स्ट्रीट के रिकॉर्ड स्तर पर बंद होने से बने माहौल पर सतर्कता हावी हो गई। निफ्टी के लिए अब 24,325 अंक का स्तर बचाए रखना अहम है।"

रुपया तीन पैसे मजबूत होकर 95.42 प्रति डॉलर पर रहा

अमेरिकी डॉलर के कमजोर रुख से घरेलू मुद्रा को मिले समर्थन के बीच रुपया शुक्रवार को तीन पैसे मजबूत होकर 95.42 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी पूंजी की निकासी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण रुपये पर दबाव कायम है। रुपया 95.39 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.38 से 95.44 प्रति डॉलर के सीमित दायरे में रहा। अंत में 95.42 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर बंद हुआ जो पिछले बंद भाव से तीन पैसे की बढ़त दर्शाता है।रुपया बृहस्पतिवार को 12 पैसे टूटकर 95.45 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एलकेपी सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक (जिंस एवं मुद्रा) जतिन त्रिवेदी ने कहा कि रुपये में इस सप्ताह कमजोरी का रुख रहा लेकिन कुल मिलाकर इसमें सीमित दायरे में ही कारोबार हुआ।

त्रिवेदी ने कहा, ‘‘जुलाई में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की तेजी आई थी और यह अब भी ऊंचे स्तर पर है। इससे रुपये पर आयात लागत का दबाव बना हुआ है। वहीं, डॉलर सूचकांक 100 के स्तर से नीचे करीब 99.50 पर रहा, जिससे रुपये की गिरावट सीमित रही। निकट अवधि में रुपये के 95.10 से 95.80 के दायरे में रहने का अनुमान है। कच्चे तेल और डॉलर की दिशा रुपये के लिए प्रमुख कारक रहेगी।’’

थोक महंगाई नौ महीने बाद पहली बार घटी, जुलाई में 9.78 प्रतिशत पर

ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी के बीच थोक मुद्रास्फीति नौ महीने में मासिक आधार पर पहली बार घटकर जुलाई में 9.78 प्रतिशत रही। शुक्रवार को आधिकारिक आंकड़ों में यह जानकारी दी गई। थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित थोक मुद्रास्फीति जून के महीने में 9.87 प्रतिशत रही थी।

अक्टूबर, 2025 के बाद पहली बार थोक महंगाई में मासिक आधार पर गिरावट दर्ज की गई है। जुलाई में गिरावट मुख्य रूप से ईंधन एवं बिजली क्षेत्र की कीमतों में कमी के कारण आई, जबकि प्राथमिक वस्तुओं और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई बढ़ी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने कहा कि खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पादों सहित), खाद्य वस्तुएं, मूल धातुओं का विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुएं, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण तथा रसायन एवं रासायनिक उत्पाद जुलाई की थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारक रहे।

ईंधन एवं बिजली क्षेत्र की महंगाई जुलाई में घटकर 20.05 प्रतिशत रह गई, जो जून में 27.41 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई भी मामूली घटकर 5.44 प्रतिशत रही, जो जून में 5.49 प्रतिशत थी।

हालांकि, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई जुलाई में बढ़कर 8.29 प्रतिशत हो गई, जो जून में 7.48 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के मुताबिक, उत्पादन उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) में जुलाई में सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत की महंगाई रही, जो जून के समान स्तर पर है। सरकार ने कहा है कि पीपीआई करीब पांच साल में डब्ल्यूपीआई की जगह ले लेगा।

उत्पादन पीपीआई में विनिर्माण और खनन क्षेत्र की महंगाई कम हुई, लेकिन कृषि और बिजली क्षेत्र में महंगाई बढ़ने से इसका असर कम हो गया।

सोना 800 रुपये गिरकर 1,56,200 लाख प्रति 10 ग्राम पर, चांदी स्थिर

राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोना शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट पर रहा। मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सोना 800 रुपये टूटकर 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। बृहस्पतिवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,57,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर थी।

स्थानीय सर्राफा कारोबारियों ने कहा कि सोने की कीमत में गिरावट के बीच चांदी का भाव 2,40,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर समेत) पर स्थिर रहा।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘कमज़ोर वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को सोने में गिरावट आई। उम्मीद से कम अमेरिकी उत्पादक-मूल्य आंकड़ों के बावजूद हाजिर सोना की कीमत में कमी देखी गई।’’

उन्होंने कहा कि सोने में यह गिरावट हाल की तेजी के बाद ऊंचे स्तर पर मुनाफावसूली होने से आई है। इसके अलावा निवेशक ऊंचे स्तरों पर नये सौदे लेने को लेकर सतर्क रहे।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर पर

देश का विदेशी मुद्रा भंडार सात अगस्त को समाप्त सप्ताह में 14.14 अरब डॉलर बढ़कर 707 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इसके एक सप्ताह पहले विदेशी मुद्रा भंडार 10.512 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 692.87 अरब डॉलर रहा था।

इस साल 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.49 अरब डॉलर के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि पश्चिम एशिया में टकराव शुरू होने के बाद कई हफ्तों तक इसमें गिरावट दर्ज की गई। संकट के दौरान रुपये पर दबाव बनने से रिजर्व बैंक को डॉलर बेचकर विदेशी मुद्रा बाजार में दखल देना पड़ा।

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वालीं विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 9.95 अरब डॉलर बढ़कर 574.62 अरब डॉलर हो गईं।

डॉलर के संदर्भ में इन परिसंपत्तियों में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है।

पिछले महीने सरकार और आरबीआई ने देश में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए एफसीएनआर (बी) समेत कई उपायों की घोषणा की थी। इन प्रयासों से अब तक करीब 40 अरब डॉलर प्राप्त हो चुके हैं।

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