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अर्थतंत्र की खबरें: पश्चिम एशिया का तनाव, भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार और रुपया ₹95 के पार!

बिकवाली दबाव के साथ घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक तनाव बने रहने और बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया। इससे जोखिम लेने की धारणा प्रभावित हुई।

पश्चिम एशिया का तनाव, भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार
पश्चिम एशिया का तनाव, भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार फोटोः सोशल मीडिया

शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से मानक सूचकांक... बीएसई सेंसेक्स 813 अंक लुढ़क कर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया। वहीं एनएसई निफ्टी 23,450 अंक के नीचे फिसल गया।

कारोबारियों के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी, दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी), वित्तीय सेवाएं और तेल एवं गैस कंपनियों के शेयरों में बिकवाली और विदेशी निवेशकों की नए सिरे से पूंजी निकासी से भी निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।

तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत लुढ़क कर करीब तीन महीने के निचले स्तर 74,764.23 अंक पर बंद हुआ।

वहीं, 50 शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,431.50 अंक पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर सबसे अधिक 4.55 प्रतिशत टूटा। इन्फोसिस (4.43 प्रतिशत), टेक महिंद्रा (3.87 प्रतिशत) और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (2.26 प्रतिशत) में भी गिरावट आई। इसके अलावा, नुकसान में रहने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल हैं।

दूसरी ओर, लाभ में रहने वाले शेयरों में अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, ट्रेंट और एनटीपीसी शामिल हैं। अदाणी पोर्ट्स में सबसे ज्यादा 3.67 प्रतिशत की तेजी आई।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत में भी तेजी रही। ब्रेंट क्रूड 2.67 प्रतिशत बढ़कर 100.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पोनमुडी आर ने कहा, ‘‘बिकवाली दबाव के साथ घरेलू शेयर बाजार में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, वैश्विक तनाव बने रहने और बाजार में बढ़ती अस्थिरता ने निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया। इससे जोखिम लेने की धारणा प्रभावित हुई।’’

उन्होंने कहा कि भारत अस्थिरता सूचकांक (वीआईएक्स) में छह प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। यह बाजार में बढ़ती सावधानी और निकट अवधि को लेकर सतर्क रुख को दर्शाती है।

कच्चे तेल में उछाल से पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल पर पांच, डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर नुकसान

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले 23 जुलाई को इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी।

अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल करीब दो प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा एक-दूसरे के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद आई है।

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है।

विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

इसके अलावा, अगर खुदरा स्तर पर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बदलाव नहीं किया जाता है, तो पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को इनकी बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ता है।

इक्रा लिमिटेड के कॉरपोरेट रेटिंग्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं सह-समूह प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण बुधवार को ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और भारतीय कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 109 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

फिलहाल पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तीन महीने से अधिक समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आखिरी बार 25 मई को कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ था।

कच्चे तेल के दाम में उछाल के बीच रुपया 34 पैसे टूटकर 95.08 प्रति डॉलर पर

रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 34 पैसे टूटकर 95.08 (अस्थायी) के स्तर पर रहा। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से महंगाई और विदेशी मुद्रा के अधिक बाहर जाने की आशंका से रुपये पर दबाव रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कमजोर शेयर बाजार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली से भी रुपये पर दबाव बढ़ा।

पश्चिम एशिया में तेल संयंत्रों और टैंकर पर हुए हमलों के बाद ब्रेंट कच्चे तेल का वायदा भाव करीब छह सप्ताह में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के दौरान पहले से प्रभावित आपूर्ति व्यवस्था पर और दबाव बढ़ने की आशंका से तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 2.94 प्रतिशत बढ़कर 100.73 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 94.80 पर खुला, जो दिन का उच्चतम स्तर भी था। बाद में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपया कमजोर होकर 95.22 के निचले स्तर तक आया। अंत में रुपया 95.08 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा, जो पिछले बंद भाव 94.74 से 34 पैसे की गिरावट है।

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत बढ़कर 98.84 पर पहुंच गया।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण आज रुपये में गिरावट आई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के स्तर को पार कर गया। एफआईआई की बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव डाला। हालांकि, कमजोर डॉलर के कारण रुपये ने शुरुआती नुकसान की कुछ भरपाई की।’’

कोफोर्ज के अंतरिक ऑडिट में सामने आई चिंताओं के बाद चेयरमैन ने दिया इस्तीफ, करीब 9 प्रतिशत गिरा स्टॉक

मिडकैप आईटी कंपनी कोफोर्ज के अंतरिक ऑर्डट में कंपनी के बोर्ड मूल्यांकन प्रोसेस को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा दे दिया है।

भट्ट के इस्तीफे की खबर के बाद बुधवार को कोफोर्ज के शेयर में बड़ी गिरावट देखी गई। अब तक के कारोबार में शेयर vs 1780.70 रुपए का इंट्रडे लो बनाया है, जो कि उसकी पिछली क्लोजिंग 1,950 रुपए के करीब 8.71 प्रतिशत कम है।

फिलहाल सुबह 10:45 पर शेयर 4.50 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,862 रुपए पर था।

रेगुलेटरी फाइलिंग में कोफोर्ज ने बताया कि उसके इंटरनल ऑडिटर ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही के इंटरनल ऑडिट प्लान के तहत, बोर्ड इवैल्यूएशन प्रोसेस और उससे बनी बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट (बीईआर) की समीक्षा की। यह प्रोसेस भट्ट की देखरेख में किया गया था।

ऑडिट में बोर्ड के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी के प्रोसेस और उसके डिस्क्लोजर में कमियां पाई गईं, जिसमें चेयरमैन के प्रदर्शन के मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी भी शामिल थी।

फाइलिंग के अनुसार, जब बीईआर रिपोर्ट बोर्ड के सामने पेश की गई थी, तो उसमें मौजूद या उससे जुड़ी कुछ अहम जानकारी बोर्ड को पूरी तरह से नहीं बताई गई थी। इंटरनल ऑडिटर की रिपोर्ट के बाद, बोर्ड ने भट्ट से इस बारे में सफाई मांगी।

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