
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में बृहस्पतिवार को सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त देखी गई। रुपये की कीमत में गिरावट और मजबूत वैश्विक रुख की वजह से सोना 3,800 रुपये महंगा होकर सात सप्ताह के सबसे ऊंचे स्तर 1.53 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना बुधवार के 1,50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद स्तर से 3,800 रुपये बढ़कर 1,53,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गया।इससे पहले सोना 18 जून को 1,53,440 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के आसपास बंद हुआ था।
चांदी की कीमत भी पिछले सत्र के 2,32,700 रुपये प्रति किलोग्राम से 2,100 रुपये बढ़कर 2,34,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) हो गई।
कारोबारियों ने कहा कि रुपये में कमजोरी के कारण घरेलू बाज़ार में आयातित सर्राफा महंगा हो गया, जबकि कमजोर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी के बीच विदेशी बाज़ार में सोने की कीमतों में बढ़त ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया।
बृहस्पतिवार को डॉलर इंडेक्स में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में थोड़ी बढ़ोतरी के कारण रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 95.24 (अस्थायी) पर रहा।
लेमन मार्केट्स डेस्क के शोध प्रमुख, गौरव गर्ग ने कहा कि कमज़ोर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष में कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों से कीमती धातु की मांग बढ़ी है, जिससे सोने की कीमतों में लगातार तीसरे सत्र में बढ़त हुई और यह सात सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी बाज़ारों में, हाजिर सोने की कीमत बढ़कर 4,264.24 डॉलर प्रति औंस हो गई, जबकि चांदी की कीमत 61.80 डॉलर प्रति औंस पर रही।
वैश्विक बाजारों के मिले-जुले संकेतों के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार लगातार दूसरे सत्र में बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस बीच सेंसेक्स में 374 अंकों की बढ़त दर्ज की गई, तो वहीं निफ्टी 24,600 से ऊपर बंद हुआ। इससे पहले मंगलवार की गिरावट से पहले भी घरेलू बाजार ने लगातार चार सत्रों में तेजी दर्ज की थी।
बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंक यानी 0.48 प्रतिशत बढ़कर 78,954.76 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी50 11.35 अंक या 0.05 प्रतिशत बढ़कर 24,636.00 पर बंद हुआ।
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.48 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.8 प्रतिशत की तेजी आई। इसके साथ ही निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.17 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
वहीं, इसके विपरीत निफ्टी मीडिया सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.28 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी रियल्टी में भी 1.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो और निफ्टी मेटल में भी क्रमशः 1.01 प्रतिशत और 0.99 की गिरावट देखने को मिली, जबकि निफ्टी आईटी में 0.95 प्रतिशत की गिरावट आई।
निफ्टी50 इंडेक्स में एसबीआई, बीईएल, इटरनल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखी गई, जबकि इसके विपरीत पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग गतिविधियों को सामान्य करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के लिए तेज हुई कूटनीतिक कोशिशों से बाजारों को सहारा मिला।
आरबीआई के स्थिर पॉलिसी रुख और विकास के सकारात्मक नजरिए से बाजार का उत्साह और बढ़ा, जिससे हैवीवेट, बैंकिंग और एनर्जी शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखी गई।
एक्सपर्ट ने कहा कि निवेशक आने वाली तिमाहियों में बेहतर कमाई की उम्मीद भी कर रहे हैं, क्योंकि क्रूड की कीमतों में नरमी से महंगाई का दबाव कम हो सकता है और मार्जिन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
डॉलर सूचकांक में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी के बीच रुपया बृहस्पतिवार को 16 पैसे कमजोर होकर 95.24 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि अमेरिकी डॉलर सूचकांक में मामूली सुधार और विदेशी कोषों की निकासी से रुपये पर दबाव रहा। हालांकि, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत नरम कीमतों ने रुपये को कुछ हद तक समर्थन दिया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.13 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान यह 95.12 से 95.24 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। अंत में यह 95.24 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर आ गया जो पिछले बंद भाव की तुलना में 16 पैसे की गिरावट है।
रुपया बुधवार को 20 पैसे मजबूत होकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ‘‘अमेरिकी डॉलर सूचकांक में मामूली बढ़त और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में मामूली वृद्धि के कारण आज भारतीय रुपया कमजोर हुआ।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की उम्मीदों ने रुपये को कुछ हद तक समर्थन दिया।’’ चौधरी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये का हाजिर भाव 94.80 से 95.50 के दायरे में रहने के आसार हैं।
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत घटकर 99.78 पर रहा।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.09 प्रतिशत बढ़कर 79.52 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि भारत के लिए ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने से आयात बिल, मुद्रास्फीति और चालू खाते पर दबाव जुलाई में देखे गए 100 डॉलर से अधिक के स्तर की तुलना में काफी कम रहता है।
भारत में खुदरा महंगाई दर जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। हालांकि, खाद्य वस्तुओं की अधिक कीमतों के कारण इसके ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, जरूरी चीजों (जैसे प्याज, खाने का तेल, चावल और दाल) की कीमतों में महंगाई का असर व्यापक बना हुआ है, हालांकि मुख्य सब्जियों की बेहतर आवक और सामान्य मानसून से कुछ राहत मिली है।
मुख्य महंगाई (जिसमें खाने-पीने की चीजें और ईंधन शामिल नहीं हैं) के 4–4.1 प्रतिशत के आसपास सीमित रहने की उम्मीद है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी से मदद मिलेगी। हालांकि, आगे चलकर इनपुट लागत बढ़ने से महंगाई बढ़ सकती है।
बैंक ने बताया कि उसका 'एसेंशियल कमोडिटीज इंडेक्स' (बीओबी ईसीआई) जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत बढ़ा, जो इस पूरी सीरीज में सबसे तेज बढ़ोतरी थी। अगस्त 2026 में (शुरुआती 5 दिनों में) यह बढ़ोतरी और भी अधिक, यानी 5.4 प्रतिशत रही।
बैंक ने बताया कि सब्जियों में टीओपी (टमाटर, प्याज और आलू) की आवक के आंकड़े राहत देने वाले रहे हैं, भले ही प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 3.7 प्रतिशत की और गिरावट आई है, जिससे पर्सनल केयर और मुख्य महंगाई के असर से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमती धातुओं को छोड़कर मुख्य महंगाई भी फिलहाल कम रहने की संभावना है। साथ ही, रिपोर्ट मानसून की प्रगति को अनुकूल बताया गया है, जिसमें 63 प्रतिशत राज्यों में सामान्य बारिश हुई है।
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