
भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ।
इस दौरान, घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में भारी बिकवाली देखी गई, और बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, तो वहीं निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर आ गया।
दिन के कारोबार में सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 73,734.83 पर खुला, और एक समय यह 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत गिरकर 72,716.23 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
वहीं, निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत गिरकर 23,064.90 पर खुला और एक समय यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत गिरकर 22,762.20 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर दिया।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 1.63 प्रतिशत और 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा; वहीं निफ्टी आईटी ने सबसे कम गिरावट के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।
निफ्टी50 इंडेक्स में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर बाकी सभी शेयरों में गिरावट देखने को मिली। इनमें सबसे ज्यादा गिरावट टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में रही।
इस बीच, बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) शुक्रवार के करीब 482 करोड़ रुपए से घटकर 474 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिसमें 8 लाख करोड़ रुपए की गिरावट आई।
सोमवार को बाजार गिरने के कारणों की बात करें तो, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और लड़ाई समाप्त करने के ईरानी प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि ईरान ने जोर देकर कहा कि केवल कूटनीति ही संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के साथ उसके संघर्ष का समाधान कर सकती है। आज वैश्विक शेयर बाजार, तेल बाजार और बॉन्ड बाजार में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला।
अधिकांश एशियाई बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जिनमें दक्षिण कोरिया का सूचकांक 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई सूचकांक 0.10 प्रतिशत गिर गया। चीनी बाजार भी 1 प्रतिशत से अधिक नीचे रहे।
अमेरिका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद के चलते सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों को ट्रैक करने वाले गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में 3.6 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली।
चांदी में सोने के मुकाबले अधिक गिरावट के कारण सिल्वर ईटीएफ में ज्यादा गिरावट देखी जा रही थी।
एसबीआई सिल्वर ईटीएफ करीब 3.6 प्रतिशत गिरकर 216.23, निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ 3.57 प्रतिशत घटकर 210.99, टाटा सिल्वर ईटीएफ 3.51 प्रतिशत घटकर 21.43 और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ 3.44 प्रतिशत घटकर 220.49 पर पहुंच गया है।
दूसरी तरफ आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ 2.64 प्रतिशत घटकर 125.63, एसबीआई गोल्ड ईटीएफ 2.55 प्रतिशत घटकर 125.16, निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ 2.45 प्रतिशत घटकर 121.38 और टाटा गोल्ड ईटीएफ 2.26 प्रतिशत घटकर 14.29 पर आ गया है।
दोपहर 1:30 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,47,121 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 3.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,26,853 रुपए प्रति किलो पर था।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोना 3.13 प्रतिशत गिरकर 4,185 डॉलर प्रति औंस और चांदी 5.19 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 61.42 डॉलर प्रति औंस पर थी।
राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतें 2,600 रुपये टूटकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर के बीच वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली के कारण सोने में यह गिरावट आई।
इससे पिछले सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुई थी।
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, चांदी की कीमत भी 5,000 रुपये टूटकर 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई, जबकि शुक्रवार को यह 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी।
ब्रोकरेज मंच लेमन के शोध प्रमुख, गौरव गर्ग ने कहा कि सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखी गई क्योंकि मजबूत डॉलर ने इन कीमती धातुओं पर दबाव बनाए रखा।
गर्ग ने कहा कि ब्रेंट क्रूड चार प्रतिशत बढ़कर 108.53 डॉलर प्रति बैरल हो गया, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता के कारण आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गईं।
जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार भारतीय रिफाइनरी कंपनियों द्वारा अपनी खरीद में विविधता लाने के कारण सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 17.5 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो अप्रैल के बाद का सबसे निचला स्तर है। इस दौरान देश का कुल कच्चा तेल आयात तेजी से बढ़ा है।
वैश्विक जिंस आंकड़ा और विश्लेषण फर्म केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत का कुल कच्चा तेल आयात औसतन करीब 53 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) रहा। यह अगस्त की तुलना में लगभग छह लाख बैरल प्रतिदिन और एक साल पहले की समान अवधि से सात लाख बैरल प्रतिदिन अधिक है।
भारत ने सितंबर में औसतन 17.4 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया। यह आयात अप्रैल के 15.8 लाख बैरल प्रतिदिन के बाद सबसे कम है। इसकी तुलना में भारत ने अगस्त में रूस से 20.2 लाख बैरल प्रतिदिन और जुलाई में 26.5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात किया था।
रूस से घटे आयात की भरपाई इराक और सऊदी अरब ने की। इराक ने इस महीने लगभग 5.75 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की आपूर्ति की, जो अगस्त में 1.63 लाख बैरल प्रतिदिन थी। इसी तरह सऊदी अरब से आपूर्ति भी अगस्त के 3.47 लाख बैरल प्रतिदिन से बढ़कर सितंबर में 5.66 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से आपूर्ति अगस्त के 5.46 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर 4.80 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।
वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की धारणा के बीच रुपया सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 28 पैसे टूटकर 96.03 (अस्थायी) पर रहा।
अमेरिका द्वारा ईरान के समझौते के प्रस्ताव को खारिज किए जाने से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की उम्मीदें कम हुई हैं।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच गतिरोध जारी रहने से वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की धारणा बनी हुई है। जोखिम वाली परिसंपत्तियों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रुपये पर दबाव बना रह सकता है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.89 पर कमजोर खुला। कारोबार के दौरान यह और टूटकर 96.03 (अस्थायी) पर रहा। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 28 पैसे की गिरावट है।
रुपया शुक्रवार को 24 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 95.75 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
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