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अर्थतंत्र की खबरें: पिछले दिन की जबरदस्त तेजी के बाद फिर गिरा बाजार, लेकिन डॉलर के मुकाबले चमका रुपया

अमेरिका और ईरान ने हमले रोक दिए हैं, और खबरों के मुताबिक उनके बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए कुछ राजनयिक प्रयास चल रहे हैं। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें और गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल हो गईं।

फोटो: IANS
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वैश्विक बाजार के मिले-जुले संकेतों के बीच हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। घरेलू बाजार में यह गिरावट पिछले दिन की शानदार तेजी के बाद आई।

इस दौरान, सेंसेक्स 69.86 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 10.60 अंक यानी 0.04 प्रतिशत गिरकर 23,985.35 पर बंद हुआ।

मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में मिला-जुला रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.08 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22 प्रतिशत की गिरावट आई।

वहीं, विभिन्न क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जिसमें निफ्टी आईटी 3.2 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा, इसके बाद निफ्टी रियल्टी (2 प्रतिशत) और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.08 प्रतिशत) का स्थान रहा। निफ्टी ऑटो भी 0.69 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी फार्मा में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

गिरावट की बात करें तो, निफ्टी एनर्जी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 1.7 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी एफएमसीजी (-1.4 प्रतिशत) और निफ्टी पीएसयू बैंक (-0.9 प्रतिशत) का नंबर रहा। निफ्टी मेटल में 0.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि निफ्टी बैंक में 0.58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंफ्रा (-0.5 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-0.4 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (-0.34 प्रतिशत) में भी गिरावट देखी गई।

निफ्टी 50 में टीसीएस 4.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष लाभ कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी, इसके बाद इटरनल (3.94 प्रतिशत), टेक महिंद्रा (3.49 प्रतिशत), नेस्ले इंडिया (3.19 प्रतिशत), सिप्ला (2.67 प्रतिशत), टाइटन (2.49 प्रतिशत) और इंफोसिस (2.39 प्रतिशत) का स्थान रहा। वहीं, पहली तिमाही के नतीजों के बाद हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जिसके शेयरों में 7.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल) (-4.46 प्रतिशत), कोल इंडिया (-3.98 प्रतिशत), टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (-2.19 प्रतिशत) और एनटीपीसी (-2.19 प्रतिशत) का स्थान रहा।

पिछले सत्र में जोरदार बढ़त के बाद मुनाफावसूली के कारण शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर अनिश्चितताएं बाजार के सेंटिमेंट पर दबाव डाल रही हैं।

अमेरिका और ईरान ने हमले रोक दिए हैं, और खबरों के मुताबिक उनके बीच संघर्ष को खत्म करने के लिए कुछ राजनयिक प्रयास चल रहे हैं। इस बीच, कच्चे तेल की कीमतें और गिरकर 85 डॉलर प्रति बैरल हो गईं।

सोना और चांदी गिरावट के साथ खुले, 1.80 प्रतिशत तक कम हुआ दाम

सोने एवं चांदी की शुरुआत मंगलवार को गिरावट के साथ हुई और दोनों कीमती धातुओं का दाम 1.80 प्रतिशत तक लुढ़क गया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोंजिग 1,43,063 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,42,353 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

सुबह 10 बजे यह 1,129 रुपए या 0.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,41,934 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था। अब तक के कारोबार में सोने ने 1,41,808 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,42,353 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर हुआ है।

चांदी में भी कमजोरी देखी जा रही है। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,21,173 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,20,555 रुपए प्रति किलो पर खुला।

फिलहाल यह 3,940 रुपए या 1.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,17,233 रुपए प्रति किलो पर था।

अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,16,592 रुपए प्रति किलो और 2,20,555 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी में गिरावट देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,045 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57.53 डॉलर प्रति औंस थी।

जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में फेड की बैठक मंगलवार को शुरू होगी और इसके फैसले का ऐलान बुधवार को किया जाएगा। इससे पहले निवेश सतर्क बने हुए हैं। वहीं, अमेरिका-ईरान के बीच हमले रुकने से वैश्विक अस्थिरता में कमी आई है, जिससे दोनों कीमती धातुओं में गिरावट को सहारा मिला है।

रुपया 11 पैसे की बढ़त के साथ 95.88 प्रति डॉलर पर

पश्चिम एशिया में संकट कम होने के संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के कारण अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में मंगलवार को रुपया लगातार तीसरे सत्र में मजबूती दर्शाता बंद हुआ। यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे बढ़कर 95.88 (अस्थायी) पर रहा।

विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली के दबाव के बीच विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले डॉलर इंडेक्स के ऊंचे स्तर पर रहने के कारण स्थानीय मुद्रा की बढ़त सीमित रही।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में, रुपया 95.75 पर खुला और इसने 95.63 के दिन के उच्चतम स्तर को छुआ। इसके बाद यह पिछले बंद स्तर से 11 पैसे ऊपर 95.88 (अस्थायी) पर बंद हुआ।

सोमवार को रुपया 54 पैसे की जोरदार बढ़त के साथ 95.99 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जबकि शुक्रवार के सत्र में इसमें 20 पैसे की बढ़त हुई थी। मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हमले रुकने से रुपया मजबूत हुआ।

चौधरी ने कहा, "कारोबारी अमेरिका के उपभोक्ता विश्वास आंकड़े से संकेत ले सकते हैं। डॉलर-रुपये की हाजिर कीमत के 95.35 से 96.05 के दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है।"

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के सामने डॉलर की मजबूती को मापने वाला, डॉलर इंडेक्स 0.08 प्रतिशत बढ़कर 101.46 पर कारोबार कर रहा था।

वैश्विक कच्चा तेल मानक, ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 2.63 प्रतिशत टूटकर 86.04 डॉलर प्रति बैरल पर था।

विश्लेषकों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि अमेरिका और ईरान लगातार तीसरे दिन एक-दूसरे के ठिकानों पर हमला करने से बचे और मध्यस्थों ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस लाने में प्रगति की।

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