
सोना और चांदी की कीमतों में जारी गिरावट ने बाजार की दिशा बदल दी है। कुछ हफ्ते पहले तक सोने-चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर छू रही थीं, अब वहीं से तेज फिसलन देखने को मिल रही है। सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को भी कीमतों में दबाव बना रहा। खासकर चांदी में गिरावट ज्यादा तेज रही।
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चांदी की कीमतों में आई तेजी अब उलटती नजर आ रही है। 29 जनवरी को चांदी ने पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार किया था और 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गई थी।
अब हालात यह हैं कि उस उच्च स्तर से चांदी 1,80,157 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी सोमवार को 2,39,891 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। लेकिन मंगलवार को बाजार खुलते ही यह गिरकर 2,35,206 रुपये प्रति किलो पर आ गई। यानी एक झटके में 4,685 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई।
तेजी के दौर में जिस रफ्तार से चांदी ऊपर गई थी, अब उसी तेजी से नीचे आती दिख रही है।
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चांदी के साथ-साथ सोने में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है। हालांकि सोने में बीच-बीच में हल्का उछाल देखने को मिला, लेकिन समग्र ट्रेंड नीचे की ओर है।
मंगलवार को 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना वायदा भाव अपने पिछले बंद भाव 1,54,760 रुपये प्रति 10 ग्राम से गिरकर 1,53,550 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यानी एक दिन में 1,210 रुपये की कमी दर्ज की गई।
सोने ने भी 29 जनवरी को अपना लाइफ टाइम हाई बनाया था। उस दिन 24 कैरेट सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। अब यह अपने उच्च स्तर से 38,336 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।
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चांदी का रिकॉर्ड स्तर: 4,20,048 रुपये प्रति किलो
मौजूदा गिरावट: 1,80,157 रुपये प्रति किलो
सोने का रिकॉर्ड स्तर: 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम
मौजूदा गिरावट: 38,336 रुपये प्रति 10 ग्राम
ये आंकड़े बताते हैं कि जनवरी के अंत में बना उच्च स्तर फिलहाल टिक नहीं पाया और बाजार में तेज करेक्शन आया है।
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कीमतों में आई इस गिरावट को बाजार विशेषज्ञ सामान्य करेक्शन के रूप में भी देखते हैं, क्योंकि रिकॉर्ड तेजी के बाद मुनाफावसूली स्वाभाविक मानी जाती है। हालांकि फिलहाल रुझान यह दिखा रहा है कि दोनों धातुओं में अस्थिरता बनी हुई है।
निवेशकों के लिए यह दौर सतर्कता का है। कीमतें हाई से काफी नीचे आ चुकी हैं, लेकिन बाजार की दिशा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है।
आने वाले दिनों में बाजार की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि मौजूदा उतार-चढ़ाव निवेश के फैसलों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
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