
दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जारी, आज दोनों धातुएं फिर सस्ती हुईं।
MCX पर सोना 800 रुपये से ज्यादा गिरकर 1,41,753 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,730 रुपये टूटकर 1,85,723 रुपये प्रति किलो पर पहुंची।
अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों और मजबूत बॉन्ड यील्ड के दबाव में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतें गिरीं।
चांदी अपने 4,20,048 रुपये के रिकॉर्ड स्तर से आधे से भी कम कीमत पर आ गई है।
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव फिर लुढ़क गए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 800 रुपये से ज्यादा टूटकर 1,41,753 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं, चांदी की कीमत में 3,730 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,85,723 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है। अमेरिका में महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहने और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।
MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,42,596 रुपये से 800 रुपये से अधिक गिरकर 1,41,753 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया। इसमें करीब 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, चांदी का पिछला बंद भाव 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम था। शुक्रवार को यह 3,730 रुपये यानी 1.96 प्रतिशत टूटकर 1,85,723 रुपये पर आ गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली। यहां सोना करीब 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़ों को अहम वजह माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी कोर PCE महंगाई सितंबर में 0.3 प्रतिशत बढ़ी, जबकि इसकी सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की 3.4 प्रतिशत वृद्धि ने भी संकेत दिया है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है।
बाजार में दिसंबर में फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की संभावना 80 प्रतिशत से अधिक मानी जा रही है। ऊंची ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड के कारण सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ता है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती टाल सकते हैं।
चांदी की कीमतों में आई गिरावट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने रिकॉर्ड स्तर से आधे से भी नीचे आ चुकी है। इस साल जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद से इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली और शुक्रवार को इसका भाव 1,85,723 रुपये पर पहुंच गया।
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर अहम सपोर्ट जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो कीमत 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक फिसल सकती है। वहीं, चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अगला प्रमुख सपोर्ट माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा कीमतें लंबी अवधि के निवेशकों और त्योहारी खरीदारी करने वालों के लिए आकर्षक हो सकती हैं। हालांकि, बाजार की अगली दिशा फेडरल रिजर्व की 8-9 दिसंबर को होने वाली बैठक, अमेरिकी महंगाई और रोजगार के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। अगर आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी में रिकवरी संभव है। इसके उलट महंगाई के आंकड़े मजबूत रहने पर कीमतों में गिरावट और बढ़ सकती है। चांदी में सोने के मुकाबले ज्यादा गिरावट आने की आशंका भी जताई गई है।