
MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में 1 फीसदी से ज्यादा तक की गिरावट आई।
सोना गिरकर 1.48 लाख रुपये और चांदी 2.25 लाख रुपये के करीब पहुंची।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और US-Iran तनाव से बुलियन पर दबाव बढ़ा।
सोने-चांदी के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर भी सामने आए हैं।
ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच आज सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में 1 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज हुई। वैश्विक बाजार में भी हाल की तेज गिरावट के बाद सोना दबाव में बना हुआ है।
MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना वायदा 487 रुपये यानी 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,48,410 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबार के दौरान सोना 747 रुपये यानी 0.50 प्रतिशत टूटकर 1,48,150 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंचा। इसका दिन का उच्चतम स्तर 1,49,034 रुपये रहा।
चांदी में दबाव अपेक्षाकृत ज्यादा रहा। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी वायदा कारोबार के दौरान 2,942 रुपये यानी 1.29 प्रतिशत गिरकर 2,24,500 रुपये प्रति किलोग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गई। बाद में इसमें कुछ सुधार आया और यह 2,104 रुपये यानी 0.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,25,338 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कीमती धातुओं में कमजोरी की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ता तनाव है। इस तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। वहीं अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों को अपेक्षाकृत कम आकर्षक बनाया है। ताजा वैश्विक बाजार रिपोर्टों में भी ऊंची यील्ड और आगे ब्याज दर बढ़ने की आशंकाओं को सोने पर दबाव की प्रमुख वजह बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्पॉट गोल्ड दबाव में रहा। पिछले कारोबारी सत्र में इसमें करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई थी और यह सात सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरानी अधिकारियों ने नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले वॉशिंगटन के साथ किसी समझौते की संभावना को लेकर निराशा जताई है।
स्थिति उस समय और जटिल हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर फिर से खोलने के संबंध में ईरान के ताजा प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इससे ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशकों का रुझान यील्ड आधारित निवेशों की ओर बढ़ा है।
कमोडिटी विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1,50,000 से 1,50,700 रुपये का स्तर पहला प्रतिरोध क्षेत्र है। इसके ऊपर 1,52,000 से 1,52,600 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं नीचे की तरफ 1,48,000 से 1,47,300 रुपये का दायरा प्रमुख सपोर्ट है। 1,48,000 रुपये के नीचे मजबूती से फिसलने पर सोने में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
चांदी के लिए 2,27,000 से 2,28,000 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर निकटतम प्रतिरोध माना जा रहा है। इसके ऊपर 2,32,000 से 2,33,000 रुपये का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण प्रतिरोध है। वहीं नीचे की तरफ 2,24,000 से 2,23,000 रुपये और उसके बाद 2,20,000 से 2,19,000 रुपये के स्तर अहम सपोर्ट माने जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने और चांदी दोनों का रुख सतर्क से नकारात्मक बना हुआ है। सोने में मजबूती के संकेत के लिए 1.50 लाख रुपये के ऊपर टिकना जरूरी होगा, जबकि चांदी के लिए 2.28 लाख रुपये का स्तर पार करना अहम होगा। दूसरी ओर, सपोर्ट स्तर टूटने पर दोनों धातुओं में आगे और दबाव देखने को मिल सकता है।