
MCX पर चांदी 6,799 रुपये गिरकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
दिसंबर डिलीवरी वाला सोना कारोबार के दौरान 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम तक फिसला।
महंगे कच्चे तेल, ऊंची ब्याज दरों की आशंका और वैश्विक बाजारों में बिकवाली से कीमतों पर दबाव बना।
इस साल के रिकॉर्ड स्तर से सोना और चांदी दोनों काफी नीचे आ चुके हैं।
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट शुक्रवार को भी जारी रही। घरेलू वायदा बाजार में चांदी का भाव कारोबार के दौरान 6,799 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूटकर 1,92,800 रुपये पर आ गया। इसके साथ ही चांदी एक बार फिर 2 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसल गई। सोने पर भी दबाव बना रहा और दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,41,806 रुपये प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गया।
कीमती धातुओं में इस कमजोरी के पीछे वैश्विक बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरों में लंबे समय तक कटौती न होने की आशंका प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। हालांकि, दिन के कारोबार में सोने और चांदी दोनों में निचले स्तरों से कुछ सुधार भी देखने को मिला।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले कारोबारी सत्र के 1,43,309 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव के मुकाबले 1,251 रुपये यानी 0.87 प्रतिशत गिरकर 1,42,058 रुपये पर खुला। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 1,503 रुपये यानी 1.04 प्रतिशत टूटकर 1,41,806 रुपये तक पहुंच गई। बाद में कुछ सुधार के बावजूद सोना खबर लिखे जाने तक 629 रुपये यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
चांदी में गिरावट कहीं ज्यादा रही। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले बंद भाव 1,99,599 रुपये प्रति किलोग्राम से 3,012 रुपये यानी 1.50 प्रतिशत नीचे 1,96,587 रुपये पर खुली। कारोबार के दौरान यह 6,799 रुपये यानी 3.40 प्रतिशत टूटकर 1,92,800 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। बाद में इसमें भी कुछ सुधार हुआ और यह 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपये पर कारोबार करती नजर आई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। कॉमेक्स पर सोना करीब 0.65 प्रतिशत गिरकर 4,034 डॉलर प्रति औंस और चांदी लगभग 1.30 प्रतिशत टूटकर 54.29 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं। अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकते हैं। ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ने से सोने जैसी ऐसी संपत्तियों पर दबाव आता है, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता।
निवेशकों की नजर अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और केंद्रीय बैंकों के अगले फैसलों पर है। डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आने पर सोने-चांदी को कुछ सहारा मिल सकता है। इसके अलावा चीन की अर्थव्यवस्था, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की कीमतें भी आगे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
इस साल की शुरुआत में MCX पर सोने ने 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। वहीं, चांदी की कीमत 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। मौजूदा भाव से तुलना करें तो दोनों कीमती धातुएं अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं। खास तौर पर चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है और इसकी कीमत रिकॉर्ड स्तर के मुकाबले लगभग आधी रह गई है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई, ब्याज दरों की संभावनाओं, चीन की अर्थव्यवस्था और वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।
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