
टमाटर की बढ़ती कीमत से सिर्फ आम जनता ही परेशान नहीं है, बल्कि फास्ट फूड चेन चलाने वाली कंपनियों के बजट पर भी असर पड़ा है। मैकडोनाल्ड्स के बाद अब सबवे ने अपने आउटलेट्स से टमाटर को हटा दिया है। कहा जा रहा है कि सबवे इंडिया ने सलाद और सैंडविच में टमाटर सर्व करना बंद कर दिया है। इसके लिए फूड चेन कंपनी ने टमाटर की बढ़ती कीमतों और गिरती क्वालिटी को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे भी पिछले एक महीने के दौरान टमाटर की कीमतों में करीब 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली- एनसीआर में टमाटर 150 से 200 रुपये किलो मिल रहा है।
सबवे इंडिया ने दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थित अपने एक आउटलेट से टमाटर को हटा दिया है। उसने अपने ग्राहकों से कहा है कि अच्छी क्वालिटी के टमाटर की कमी हो गई है। इसके चलते आउटलेट में प्रयाप्त मात्रा में टमाटर की सप्लाई नहीं हो पा रही है। ऐसे में आपको कुछ समय के लिए बिना टमाटर के ही सलाद और सैंडविच खाने पड़ेंगे। हालांकि, जल्द ही फिर से टमाटर को मेन्यू में शामिल कर लिया जाएगा। टमाटर की किल्लत को दूर करने के लिए कंपनी लगातार कोशिश कर रही है। लेकिन सबवे ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह भारत में अपने कितने आउटलेट्स से टमाटर को हटाया है। वहीं, सबवे स्टोर के एक कर्मचारी ने कहा कि टमाटर बहुत महंगा हो गया है। वहीं, बीते दिनों मैकडॉनल्ड्स ने इंडिया में अपने बर्गर और रैप्स से टमाटर हटाने का फैसला लिया था
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देश के फेमस प्राइवेट बैंकों में शुमार आईसीआईसीआई बैंक ने जून तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं। इस तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक को बंपर मुनाफा हुआ है। आईसीआईसीआई बैंक ने तिमाही रिपोर्ट में कहा है कि उसके मुनाफे में 39.7% का ग्रोथ हुआ है। खास बात यह है कि आईसीआईसीआई बैंक को पिछले साल जून तिमाही में 6,905 करोड़ को मुनाफा कमाया था, जो इस तिमाही में बढ़कर 9,648 करोड़ रुपये का हो गया। हालांकि, ईटी नाउ के पोल में 9,300 करोड़ रुपये के मुनाफा का अनुमान लगाया गया था। लेकिन बैंक ने सभी अनुमानों को ध्वस्त कर दिया।
बैंक की ब्याज से होनो वाली इनकम (एनआईआई) में बंपर ग्रोथ हुआ है। सालाना आधार पर एनआईआई इनकम में भी 38% की वृद्धि हुई है। अब एनआईआई से होने वाली आमदनी 13,210 करोड़ रुपये से बढ़कर 18,227 करोड़ रुपये पहुंच गई है। वहीं, अन्य माध्यम से होने वाली इनकम में भी 16% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जोकि 5,435 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी है। साथ ही बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन 4.01% से बढ़कर 4.78% पर पहुंच गया है। बैंक की एसेट क्वालिटी में भी तिमाही आधार पर सुधार दर्ज किया गया है। बैंक के ग्रॉस NPA में 5 बेसिस प्वाइंट का इंप्रूवमेंट हुआ है। इस तिमाही में ग्रॉस NPA 2.81% से घटकर 2.76% पर पहुंच गया है। वहीं नेट NPA में कुछ भी चेंजेज नहीं आए हैं। यह अभी भी 0.48% पर स्थिर है। इसी तरह जून तिमाही में बैंक की प्रोविजनिंग, सालाना आधार पर 13% की बढ़ोतरी के साथ 1,292 करोड़ पर पहुंच गई है।
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भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का प्रवाह जुलाई में भी जारी है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी।के। विजयकुमार का कहना है कि उभरते बाजारों में इस साल अब तक भारत में एफपीआई प्रवाह सबसे ज्यादा रहा है। इस महीने 21 जुलाई तक एफपीआई ने देश में 43,804 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। इस आंकड़े में स्टॉक एक्सचेंज, प्राथमिक बाजार और थोक सौदों के माध्यम से निवेश शामिल है। एफपीआई वित्तीय, ऑटोमोबाइल, पूंजीगत सामान, रियल्टी और एफएमसीजी में पैसा लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में एफपीआई की लिवाली का शेयरों की कीमतों में बढ़ोतरी में बड़ा योगदान है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। हालाँकि, चिंता का विषय बढ़ता वैल्यूएशन है। बहुत ज्यादा वैल्यूएशन पर कुछ नकारात्मक ट्रिगर तेज गिरावट का कारण बन सकता है। विजय कुमार ने कहा कि ऐसा शुक्रवार को हुआ जब इंफोसिस और एचयूएल की नकारात्मक खबरों से सेंसेक्स 887 अंक गिर गया।
एसबीआई सिक्योरिटीज ने एक रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अप्रैल 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर से नीचे फिसल गया। जब डॉलर इंडेक्स गिरता है, तो भारतीय रुपया मजबूत होता है और डॉलर कमजोर होता है, जिससे एफआईआई और एफपीआई से फंड प्रवाह बढ़ता है। एसबीआई सिक्योरिटीज का कहना है कि भारी प्रवाह से बाजार को ऊंची छलांग लगाने में मदद मिलती है। पिछले सप्ताह, अस्थिरता सूचकांक भारत 10।68 पर समाप्त हुआ, जो दिसंबर 2019 के बाद सबसे कम था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्थिरता में यह गिरावट इशारा करती है कि बाजार में डर कम है और निवेशकों ने जोखिम लेने का मन बनाया हुआ है। इसलिए, समग्र बाजार संरचना बहुत आशाजनक दिखती है क्योंकि चार्ट पर उच्चतम और न्यूनतम स्तर दोनों ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं जिससे अस्थिरता में स्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो रही है। समय के साथ अस्थिरता की स्थिरता एक अच्छी बात है क्योंकि यह बाजार सहभागियों को अधिक सटीकता के साथ अधिकतम संभावित लाभ और हानि का अनुमान लगाने की अनुमति देती है।
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भारत की अग्रणी भुगतान और वित्तीय सेवा कंपनी पेटीएम ने एक और प्रभावशाली तिमाही वृद्धि दिखाई है। इसने साल-दर-साल 39 प्रतिशत की बंपर राजस्व वृद्धि दर्ज की है, जिससे वित्त वर्ष 24 की पहली तिमाही में इसका राजस्व 2,342 करोड़ रुपये हो गया है। यह जीएमवी में वृद्धि, मर्चेंट सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू और प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत ऋणों की वृद्धि से हासिल हुआ है।
ईएसओपी से पहले पेटीएम का ईबीआईटीडीए (अर्निंग्स बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन एंड अमॉर्टाइजेशन) सालाना आधार पर 359 करोड़ रुपये से बढ़कर 84 करोड़ रुपये हो गया, जबकि वित्त वर्ष 23 की चौथी तिमाही में यह 52 करोड़ रुपये (यूपीआई प्रोत्साहन को छोड़कर) था। वित्त वर्ष 24 में, पेटीएम ने अपने योगदान लाभ को सालाना आधार पर 80 प्रतिशत बढ़ाकर 1,304 करोड़ रुपये कर दिया। योगदान मार्जिन में वृद्धि और मुनाफा में लगातार सुधार से प्रेरित, ईएसओपी मार्जिन से पहले ईबीआईटीडीए भी 4 प्रतिशत तक सुधर गया।
पिछले एक साल में, कंपनी का मर्चेंट ग्राहक आधार जून 2023 तक दोगुना से अधिक 79 लाख हो गया और इसका मर्चेंट आधार 3.6 करोड़ तक बढ़ गया, जो कि पेटीएम साउंड बॉक्स और पेटीएम कार्ड मशीन जैसे इसके अग्रणी उपकरणों के लिए एक मजबूत वृद्धि है। शुद्ध भुगतान मार्जिन में वृद्धि और ऋण वितरण व्यवसाय में वृद्धि के साथ, कंपनी का योगदान मार्जिन इस तिमाही में बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया, जो सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्धि है।
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