
भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उम्मीद के मुताबिक नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखने का निर्णय लिया। इसके साथ आरबीआई ने अपने तटस्थ रुख को बरकरार रखा, जिसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह की शुरुआत में भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव कम हुआ है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एमपीसी के फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि बाहरी चुनौतियां बढ़ गई हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सफल समापन अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।
आरबीआई ने फरवरी, 2025 से रेपो दर में अब तक कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। यह 2019 के बाद से सबसे आक्रामक कटौती है। दिसंबर में हुई पिछली बैठक में आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत वृद्धि और कम मुद्रास्फीति के साथ अच्छी स्थिति में है। मुद्रास्फीति संतोषजनक सीमा से नीचे बनी हुई है और इसका परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।”
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मल्होत्रा ने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बनी सहमति से वृद्धि की गति लंबे समय तक बनी रहने की उम्मीद है।’’
चालू वित्त वर्ष में मुद्रास्फीति औसतन 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य से कम है। मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
आरबीआई ने आगामी वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत (अप्रैल-जून) और 7.0 प्रतिशत (जुलाई-सितंबर) कर दिया है। हालांकि पूरे वर्ष के अनुमान को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया है क्योंकि नई जीडीपी श्रृंखला इसी महीने जारी की जाएगी।
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मल्होत्रा ने ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त उपायों की घोषणा करते हुए कहा कि आरबीआई गलत तरीके से बिक्री, ऋण वसूली और वसूली एजेंटों की नियुक्ति और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देनदारी को सीमित करने से संबंधित तीन दिशानिर्देश का मसौदा जारी करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘छोटे मूल्य के धोखाधड़ी वाले लेनदेन में हुए नुकसान के लिए ग्राहकों को 25,000 रुपये तक की क्षतिपूर्ति के लिए एक रूपरेखा लाने का भी प्रस्ताव है।’’
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इसके अलावा, आरबीआई डिजिटल भुगतान की सुरक्षा बढ़ाने के लिए संभावित उपायों पर एक चर्चा पत्र भी प्रकाशित करेगा। ऐसे उपायों में विलंबित ऋण और वरिष्ठ नागरिकों जैसे विशिष्ट वर्गों के उपयोगकर्ताओं के लिए अतिरिक्त प्रमाणीकरण शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) को बिना किसी गारंटी के कर्ज की सीमा को दोगुना कर 20 लाख रुपये करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए बैंकों को रीट (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) को कर्ज देने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव किया।
इसके अलावा, सार्वजनिक कोष और ग्राहक संपर्क से रहित और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्ति आकार वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पंजीकरण की आवश्यकता से छूट देने का प्रस्ताव है।
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कुछ एनबीएफसी के लिए 1,000 से अधिक शाखाएं खोलने के लिए पूर्व अनुमोदन प्राप्त करने की आवश्यकता को भी समाप्त किया जाएगा।
मल्होत्रा ने वित्तीय बाजारों के लिए कहा कि आरबीआई स्वैच्छिक प्रतिधारण मार्ग (वीआरआर) के तहत निवेश के लिए 2.5 लाख करोड़ रुपये की सीमा को हटाने का प्रस्ताव कर रहा है। वीआरआर के माध्यम से प्रतिभूतियों की प्रत्येक श्रेणी में निवेश सामान्य मार्ग के तहत संबंधित श्रेणी के लिए निवेश सीमा के अधीन होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक अनिश्चितताओं से घिरे चुनौतीपूर्ण बाह्य परिवेश के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च वृद्धि दर्ज कर रही है। मुद्रास्फीति में नरमी वित्तीय स्थिरता को बनाए रखते हुए वृद्धि को समर्थन देने का अवसर प्रदान करती है। हम अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने और वृद्धि की गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’
मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक छह अप्रैल से आठ अप्रैल, 2026 को होगी।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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