अर्थतंत्र

बीते वित्त वर्ष में धोखाधड़ी की राशि तीन गुना हुई, फ्रॉड करने वालों ने बैंकों को भी नहीं छोड़ा, खड़गे ने मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नसों में फ्रॉड और जालसाजी है। खड़गे ने नोटबंदी और नकली नोट को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा।

मुंबई स्थित रिजर्व बैंक का मुख्यालय (फोटो : Getty Images)
मुंबई स्थित रिजर्व बैंक का मुख्यालय (फोटो : Getty Images) Nasir Kachroo

 फ्रॉड करने वालों ने सिर्फ आम आदमी को ही अपना निशाना नहीं बनाया, बल्कि बड़े-बड़े बैंकों को भी नहीं छोड़ा। बीते एक साल में ही धोखाधड़ी के मामलों में करीब तीन गुणा बढ़ोतरी हुई है। आरबीआई के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में धोखाधड़ी वाली राशि बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 12,230 करोड़ रुपये थी।

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कांग्रेस अध्यक्ष ने बैंक फ्रॉड को लेकर मोदी सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मामले को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नसों में फ्रॉड और जालसाजी है। खड़गे ने नोटबंदी और नकली नोट को लेकर भी मोदी सरकार को घेरा।

उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया, "मोदी सरकार के 11 साल में ₹6,36,992 करोड़ के बैंक फ्रॉड्स हुए हैं, जो कि 416% की बढ़ोतरी है। नोटबंदी के बाद भी, पिछले 6 वर्षों में ₹500 के नक़ली नोट की संख्या 291% बढ़ी। इस वर्ष यह सबसे अधिक है। मोदी जी, हमें नहीं मालूम की आपकी रगों-नसों में क्या-क्या है, पर इतना तय है कि आपकी सरकार की नसों में धोखाधड़ी और जालसाजी ज़रूर है!"

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आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, “पिछले वित्त वर्ष में धोखाधड़ी में शामिल राशि में वृद्धि मुख्य रूप से पिछले वित्त वर्षों के दौरान दर्ज किए गए 18,674 करोड़ रुपये के 122 मामलों में धोखाधड़ी वर्गीकरण को हटाने और सर्वोच्च न्यायालय के 27 मार्च, 2023 के निर्णय के अनुपालन को सुनिश्चित करने और पुन: परीक्षण के बाद चालू वित्त वर्ष के दौरान नए सिरे से रिपोर्ट करने के कारण हुई।”

इसमें कहा गया है कि संख्या के लिहाज से धोखाधड़ी मुख्य रूप से डिजिटल भुगतान की श्रेणी में हुई है, जिसमें कार्ड और इंटरनेट शामिल है, और मूल्य के लिहाज से मुख्य रूप से कर्ज खंड में हुई है।

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प्राइवेट और सरकारी बैंक किसकी हिस्सेदारी कितनी?

संख्या के हिसाब से, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत तक धोखाधड़ी के लगभग 60 प्रतिशत मामलों में निजी क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) की हिस्सेदारी है, जबकि मूल्य के हिसाब से इन बैंकों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत से अधिक है।

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तीन गुना बढ़ गई धोखाधड़ी की रकम 

आरबीआई ने एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में धोखाधड़ी वाली राशि बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 12,230 करोड़ रुपये थी। हालांकि, धोखाधड़ी के मामलों की संख्या पिछले वित्त वर्ष में घटकर 23,953 रह गई, जो 2023-24 में 36,060 थी।

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सबसे ज्यादा डिजिटल पेमेंट फ्रॉड

आरबीआई ने रिपोर्ट में कहा, “हालांकि, निजी क्षेत्र के बैंकों में दर्ज धोखाधड़ी की संख्या में कार्ड/इंटरनेट धोखाधड़ी का सबसे अधिक हिस्सा था, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी मुख्य रूप से कर्ज खंड में थी।”

इसमें कहा गया है कि कर्ज से संबंधित धोखाधड़ी संख्या के हिसाब से 33 प्रतिशत से अधिक मामलों और मूल्य के हिसाब से 92 प्रतिशत से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है।

पिछले वित्त वर्ष के अंत तक कार्ड और इंटरनेट धोखाधड़ी श्रेणी के तहत संख्या के हिसाब से 13,516 धोखाधड़ी के मामले थे, जो कुल 23,953 धोखाधड़ी का 56.5 प्रतिशत है।

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