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सिनेजीवन: दुबई में मिसाइल हमलों के बीच फंसीं ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं और बलिया पर फिल्म बनाएंगे सिद्धांत चतुर्वेदी

अभिनेत्री ईशा गुप्ता कुछ दिनों से दुबई में फंसी हुई थीं। मिसाइलों के हमलों और हवाई क्षेत्र के बंद होने की वजह से फ्लाइट्स रद्द हो गई थीं। सिद्धांत चतुर्वेदी ने छोटे शहर से निकलकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

दुबई में मिसाइल हमलों के बीच फंसीं ईशा गुप्ता सुरक्षित लौटीं, बयां किया आंखों देखा हाल

अभिनेत्री ईशा गुप्ता कुछ दिनों से दुबई में फंसी हुई थीं। मिसाइलों के हमलों और हवाई क्षेत्र के बंद होने की वजह से फ्लाइट्स रद्द हो गई थीं। मंगलवार को अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताया कि अब वे सुरक्षित रूप से दुबई से भारत लौट आई हैं।

उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नोट शेयर किया। इस नोट में उन्होंने अपनी आने की जानकारी के साथ वहां के मुश्किल हालातों का जिक्र किया और यूएई की सरकार की तारीफ की। उन्होंने लिखा, "मैं अपने घर पर वापस सुरक्षित लौट आई हूं। आप सभी की प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। मेरे लिए यह स्थिति बहुत कठिन थी, लेकिन भगवान की असीम कृपा से हम सब सुरक्षित हैं।"

उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला 28 फरवरी, रविवार को शुरू हुआ था, जब वे अबू धाबी एयरपोर्ट पर थीं। उन्होंने लिखा, "दोपहर 1 बजे के आसपास एयरपोर्ट बंद हो गया। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। फिर मिसाइल हमलों की खबरें आने लगीं। अगले पल क्या होगा, यह कोई नहीं जानता था। एयरपोर्ट पर अजनबी लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे थे। सब अपने परिवार वालों को फोन करके बता रहे थे।"

अभिनेत्री ने यूएई की तारीफ की। उन्होंने लिखा, "एयरपोर्ट स्टाफ और सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हो गए। वे शांत रहे और स्थिति को संभालने में जुट गए। मैं चेक-इन नहीं कर पाई थी, इसलिए होटल वापस जाना पड़ा। रात के समय होटल में कई लोगों से बात हुई, तो पता चला कि एयरपोर्ट पर फंसे सभी यात्रियों को खाने के लिए पैसे दिए गए। कुछ घंटों बाद लाइन लगाकर उन्हें अबू धाबी के अलग-अलग होटलों में जगह दी गई।"

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बलिया पर फिल्म बनाएंगे सिद्धांत चतुर्वेदी, कहा-मैंने वहां की जिंदगी को करीब से देखा है

बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म को लेकर चर्चा में है। यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद खास बताया जा रहा है, क्योंकि यह उनके होमटाउन बलिया (उत्तर प्रदेश) से जुड़ा है। सिद्धांत ने छोटे शहर से निकलकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में अब उन्हें अपने ही शहर की कहानी को पर्दे पर लाने का मौका मिला, तो यह उनके लिए एक भावुक मोड़ बन गया।

सिद्धांत ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म 'गली बॉय' से की थी, जिसमें उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 'गहराइयां', 'खो गए हम कहां' और 'धड़क 2' जैसी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए और साबित किया कि वे सिर्फ एक ही तरह की भूमिका तक सीमित नहीं हैं।

अब अपने नए प्रोजेक्ट को लेकर सिद्धांत ने खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ''भले ही अभी फिल्म की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन मैं इस बारे में बात करना चाहता हूं। मैंने बलिया की जिंदगी को करीब से देखा और जिया है। वहां के लोग, वहां की संस्कृति, संघर्ष और सपने, इन सबका अनुभव मैंने खुद किया है। इसलिए मैं चाहता हूं कि इन असली अनुभवों को ईमानदारी से पर्दे पर उतारा जाए। मेरा मानना है कि जब कहानी अपने जीवन से जुड़ी हो, तो उसमें सच्चाई अपने आप आ जाती है।''

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शादी के बाद रश्मिका मंदाना ने बयां किए संगीत के खूबसूरत जज्बात

साउथ सिनेमा के कपल रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा इन दिनों अपनी शादी के बाद खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। दोनों ने हाल ही में उदयपुर में तेलुगु और कोडवा रीति-रिवाजों के अनुसार शादी की थी। शादी से पहले के उत्सवों में संगीत की रात खास रही, जिसके बारे में रश्मिका ने सोमवार को एक पोस्ट के जरिए बताया।

रश्मिका ने अपने इंस्टाग्राम पर संगीत की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। इसमें रश्मिका और विजय साथ में नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ तस्वीरों में उनके परिवार के सदस्य भी शामिल नजर आ रहे हैं। रश्मिका ने पोस्ट के जरिए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि यह रात प्यार, खुशी के आंसुओं, हंसी, संगीत, गानों, चमक-दमक और पूरी रात नाचने से भरी हुई थी। उन्होंने लिखा, "सच में, यह अब तक की सबसे मजेदार रात थी।"

रश्मिका ने आगे बताया कि वे और विजय एक-दूसरे को सरप्राइज देने की प्लानिंग कर रहे थे, लेकिन परिवार वालों ने उन्हें सरप्राइज दे दिया। अभिनेत्री ने लिखा, "जब मैंने अपने परिवार को इतने खुले दिल से और जोश से नाचते देखा, तो मैं और विजय खुश और हैरान हो गए। मेरा आउटफिट काफी शानदार था। कपड़े थोड़े भारी थे, लेकिन फिर भी मैं पूरी रात उसी में नाचती रही। 24 फरवरी 2026 वह खास रात थी, जब विजय और मैंने परिवार और दोस्तों के प्यार के बीच दिल खोलकर डांस किया।"

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बादशाह की 'बिंदिया' पर चढ़ा होली का खुमार, फैंस से की सेफ होली खेलने की अपील

'कोयला' और 'बादशाह' जैसी फिल्मों में निगेटिव किरदार के लिए प्रसिद्ध अभिनेत्री दीपशिखा नागपाल आज भी टीवी पर सक्रिय हैं।

सोशल मीडिया से लेकर टीवी तक पर दीपशिखा अलग-अलग किरदारों में फैंस का दिल जीत रही हैं, लेकिन अब होली के मस्ती भरे माहौल में अभिनेत्री का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है। चेहरे पर रंग लगाए, दीपशिखा होली का आनंद ले रही हैं।

 होली के दिन बड़े भी बच्चों की तरह मस्ती है क्योंकि ये त्योहार उमंग और मस्ती का है। 49 साल की दीपशिखा भी होली पर फुल ऑन मस्ती के मूड में हैं और खुद को तैयार कर होली खेलने के लिए निकल पड़ी हैं। आईएएनएस से खास बातचीत में अभिनेत्री ने बताया कि होली उनका फेवरेट त्योहार है और वो हर साल होली का इंतजार करती हैं। उनका यह भी कहना है कि होली पर मस्ती के अलावा, सतर्कता के साथ होली खेलें, क्योंकि हंसी-मजाक में दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं।

होली की खास तैयारियों पर बात करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि केमिकल वाले रंगों से खुद को बचाने के लिए चेहरे पर तैयार किया है और हल्का मेकअप भी रखा है। अभिनेत्री टीवी और ओटीटी पर सक्रिय हैं, ऐसे में चेहरे का ख्याल रखना भी जरूरी है। उन्होंने अपने बचपन की होली की यादों को ताजा करते हुए कहा, "बचपन में होली का सबसे ज्यादा मजा आता था। ऐसा कलर लगाते थे कि कई दिनों तक नहीं हटता था और चेहरा लाल और पीला दिखता था। मजा बहुत आता था लेकिन अब वो बचपन वाली होली नहीं खेल सकते हैं क्योंकि स्किन का ध्यान रखना भी जरूरी है लेकिन हां आज भी खेलने का मन करता है।"

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'रंग बरसे' फिर से: 4 दशक बाद भी होली के रंग को और गाढ़ा करता है यह आइकॉनिक सॉन्ग

भले ही दुनिया कितनी आगे बढ़ जाए या आधुनिक हो जाए, कुछ चीजें क्लासिक ही अच्छी लगती है, जैसे होली के गीत। 

आज डीजे पर बजने वाले 'बलम पिचकारी', 'डू मी अ फेवर लेट्स प्ले होली' या फिर 'पनवाड़ी' गाना ही क्यों न हो, यह गाने डीजे पर थिरकने पर मजबूर तो कर देते है लेकिन दिलों में प्यार की उमंग और होली का रस नहीं जगा पाते। होली आते ही अगर किसी एक गाने की धुन सबसे पहले कानों में पड़ती है, तो वह है ‘रंग बरसे’। चार दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन यह गीत आज भी हर होली पार्टी, हर सोसायटी फेस्टिवल और हर पारिवारिक आयोजन की पहली पसंद बना हुआ है।

यह गीत सिर्फ रंगों की मस्ती नहीं दिखाता, रंगों और भांग के माहौल में दबे हुए भाव बाहर आते हैं, अनकहे रिश्ते खुलकर सामने आ जाते हैं। यही वजह है कि यह गीत महज नाच-गाने का हिस्सा नहीं, बल्कि कहानी कहने का माध्यम बन गया। गीत में शरारत है, चुटीलापन है और साथ ही पारंपरिक होली का रंग भी। समय बदला, होली मनाने का अंदाज भी बदला। ढोलक और मोहल्ले की महफिलों की जगह अब डीजे, बड़ी पार्टियां और सामाजिक माध्यमों की रीलों ने ले ली है। इसके बावजूद ‘रंग बरसे’ की धुन आज भी उतनी ही मजबूती से गूंजती है।

आईएएनएस के इनपुट के साथ

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