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सिनेजीवन: निर्माता संजय कोहली ने समझाया 'भाबीजी घर पर हैं' का '2.0' फॉर्मेट और विवियन डीसेना ने छोड़ा 'लाफ्टर शेफ्स'

संजय कोहली ने कहा, ''यह बदलाव किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं है, बल्कि पूरी क्रिएटिव टीम की सामूहिक सोच का नतीजा है। विवियन अब एक नई फिक्शन सीरीज पर काम करने के लिए 'लाफ्टर शेफ्स: फन अनलिमिटेड 3' से बाहर हो गए हैं।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

निर्माता संजय कोहली ने समझाया 'भाबीजी घर पर हैं' का '2.0' फॉर्मेट, कहा- 'दर्शकों को कहानी से जोड़ना था मकसद'

मुंबई से निकलकर देशभर के दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाला लोकप्रिय कॉमेडी शो 'भाभीबी घर पर हैं' अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। टेलीविजन पर वर्षों तक हंसी का पर्याय बना यह शो अब सिनेमा और नए फॉर्मेट के जरिए खुद को दोबारा गढ़ रहा है। इसी नए प्रयोग को लेकर निर्माता संजय कोहली ने आईएएनएस से खास बातचीत की, जिसमें उन्होंने इस नए कॉन्सेप्ट, कहानी, किरदारों और दर्शकों की बदलती पसंद पर खुलकर बात की।

आईएएनएस से बातचीत में संजय कोहली ने कहा, ''यह बदलाव किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं है, बल्कि पूरी क्रिएटिव टीम की सामूहिक सोच का नतीजा है। शशांक और रघुवीर जैसे रचनात्मक सहयोगियों के साथ मिलकर यह नया स्वरूप तैयार किया गया है। शो का पहला फॉर्मेट पूरी तरह हंसी और पंचलाइन पर आधारित था। उसमें मजेदार पंच, किरदारों की नोकझोंक और हल्की-फुल्की कॉमिक सीन्स के जरिए दर्शकों को हंसाया जाता था।''

उन्होंने कहा, ''अब नए फॉर्मेट में केवल कॉमेडी तक सीमित न रहकर एक मजबूत कहानी जोड़ी गई है। इस बार दर्शकों को हॉरर कॉमेडी का तड़का देखने को मिलेगा। कहानी एक अलग गांव में जाती है, जहां रहस्यमयी माहौल है। यहां सस्पेंस भी है, डर का हल्का एहसास भी और साथ ही वही पुरानी कॉमेडी भी।''

संजय कोहली ने कहा, ''इस बार कहानी का मुख्य सवाल यही है कि असली 'भाभीबी' कौन है, वह सबको परेशान क्यों कर रही है। यही सवाल धीरे-धीरे कहानी को आगे बढ़ाते हैं और दर्शकों को जोड़े रखते हैं।''

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विवियन डीसेना ने छोड़ा 'लाफ्टर शेफ्स', फिक्शन शो की तैयारियों में जुटे अभिनेता

टीवी और रियलिटी शो हमेशा ही दर्शकों के लिए रोमांचक रहे हैं। हर साल नए शो आते हैं; कुछ अभिनेता रियलिटी शो के जरिए अपनी लोकप्रियता बढ़ाते हैं, तो कुछ अपने अभिनय करियर की नई दिशा खोजते हैं। ऐसे ही एक चर्चित अभिनेता हैं विवियन डीसेना, जिन्होंने अब अपने करियर के एक नए मोड़ की ओर कदम बढ़ाया है।

 विवियन अब एक नई फिक्शन सीरीज पर काम करने के लिए 'लाफ्टर शेफ्स: फन अनलिमिटेड 3' से बाहर हो गए हैं। इस कदम से उनके फैंस में उत्सुकता का माहौल है कि आखिर वह अब किस नए प्रोजेक्ट में दिखाई देंगे।

आईएएनएस सूत्रों के मुताबिक, विवियन डीसेना ने 'लाफ्टर शेफ्स' में अपने काम को पूरा करने के बाद यह फैसला किया कि अब वे पूरी तरह से अपने नए फिक्शन प्रोजेक्ट पर ध्यान देंगे। यह नई सीरीज कलर्स चैनल के लिए बनाई जा रही है, लेकिन इसके बारे में फिलहाल कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, विवियन इस नई सीरीज की तैयारी में पूरी तरह व्यस्त हैं। उन्होंने वर्कशॉप्स और प्री-प्रोडक्शन मीटिंग्स में हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। इन तैयारियों का मकसद कहानी और किरदार में जान फूंकना है, ताकि जब शो ऑन एयर हो तो दर्शकों को एक बेहतरीन अनुभव मिले।

सूत्रों का कहना है कि वर्कशॉप्स और मीटिंग्स के कारण विवियन काफी व्यस्त है। वे चाहते हैं कि समय आने पर इस प्रोजेक्ट का खुलासा हो।

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शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे की तुलना पर बोलीं रश्मि देसाई, कहा– 'यह सम्मान की कमी की तरह'

टीवी की दुनिया में अंगूरी भाभी का किरदार हमेशा से ही दर्शकों के दिलों के करीब रहा है। इस किरदार को सबसे पहले लोकप्रिय बनाने वाली शिल्पा शिंदे ने अब दस साल बाद 'भाभीजी घर पर हैं 2.0' में वापसी की। उनकी वापसी और उनके हालिया बयान ने दर्शकों और मीडिया में काफी चर्चा पैदा कर दी। 

शिल्पा ने कहा कि अंगूरी भाभी हमेशा से वह ही रही हैं और वह अपनी किसी से भी तुलना नहीं करती। इस बयान पर कई लोगों की राय अलग-अलग रही, और इसी बीच आईएएनएस से बात करते हुए अभिनेत्री रश्मि देसाई ने अपने विचार साझा किए।

बता दें कि इससे पहले अंगूरी भाभी का किरदार शुभांगी अत्रे ने निभाया था।

आईएएनएस से बात करते हुए रश्मि देसाई ने कहा, ''शिल्पा शिंदे और शुभांगी अत्रे दोनों ही शानदार कलाकार हैं और दोनों ने अपने-अपने समय में अंगूरी भाभी के किरदार को निभाने में अपनी पूरी मेहनत और क्षमता लगाई है। इस तरह की तुलना करना ठीक नहीं है।''

 उन्होंने कहा, ''शिल्पा शिंदे एक वरिष्ठ अभिनेत्री हैं, और उनकी तुलना करना सम्मान की कमी की तरह है। अभिनय में किसी का स्थान केवल मेहनत और प्रदर्शन से तय होता है, और इस तरह के बयान को गलत नजर से देखने की जरूरत नहीं है।''

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श्वेता त्रिपाठी ने बताया कैसे गोलू गुप्ता ने बदली उनकी किस्मत, कहा- 'मैं हमेशा आभारी रहूंगी'

अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी ने 'मिर्जापुर: द मूवी' की मुंबई शेड्यूल की शूटिंग पूरी की। इस बीच अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी ने आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कहा कि फिल्म उनके लिए बेहद खास है। उनके किरदार गोलू गुप्ता ने उन्हें सिर्फ पहचान ही नहीं दी, बल्कि अंदर की ताकत और साहस भी दिया है। 

श्वेता के लिए यह किरदार उनके करियर का एक ऐसा मोड़ है, जिसने दर्शकों की उनकी सोच और उनके लिए उपलब्ध कहानियों को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, ''फिल्म की शूटिंग पूरी करना मेरे लिए एक भावनात्मक अनुभव रहा। गोलू गुप्ता का किरदार हमेशा मेरे दिल के करीब रहेगा और इसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी। मेरा मानना है कि इस किरदार ने मुझे न केवल एक्टिंग में नई चुनौतियां दी हैं, बल्कि मुझे यह भी सिखाया कि कैसे एक महिला किरदार को पूरी गंभीरता और ताकत के साथ पर्दे पर पेश किया जा सकता है।''

उन्होंने कहा, '''मिर्जापुर' को बड़े पर्दे पर लाना रोमांचक भरा अनुभव रहा। इस कहानी और इन किरदारों के लिए दर्शकों का प्यार बहुत गहरा है। शूटिंग के दौरान अपनी पुरानी टीम से फिर से मिलना, खासकर अली फजल से, जो मेरे लिए एक परिवार की तरह है, अच्छा लगा। गोलू के किरदार में वापस उतरना ऐसा था जैसे पुराने घर में नए अंदाज और नई ऊर्जा के साथ लौटना। मैं बेसब्री से इंतजार कर रही हूं कि दर्शक सिनेमाघरों में इस नए अध्याय का आनंद लें।''

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थलापति की फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज पर संकट, सुप्रीम कोर्ट 15 जनवरी को करेगा सुनवाई

थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित तमिल फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज को लेकर कानूनी विवाद बढ़ता जा रहा है। फिल्म के निर्माता केवीएन प्रोडक्शंस ने मद्रास हाईकोर्ट के एक अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

सुप्रीम कोर्ट थलापति की फिल्म 'जन नायकन' मामले की सुनवाई 15 जनवरी को करेगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑग्स्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच इस याचिका पर सुनवाई करेगी। यह मामला फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने से जुड़ा है। फिल्म को पहले यूए सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कुछ शिकायतों के बाद विवाद खड़ा हो गया।

फिल्म के निर्माताओं ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के सामने 18 दिसंबर को फिल्म पेश की थी। बोर्ड की परीक्षक समिति ने कुछ कट्स के साथ यूए सर्टिफिकेट की सिफारिश की थी। निर्माताओं ने जरूरी बदलाव कर दिए, लेकिन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ। बोर्ड ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया, जिसके खिलाफ निर्माताओं ने मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 9 जनवरी को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच (जस्टिस पी.टी. आशा) ने सेंसर बोर्ड को तुरंत यूए सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया।

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