
मशहूर फिल्ममेकर रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर पर फायरिंग की घटना के बाद पूरे मनोरंजन जगत में चिंता का माहौल है। इस घटना को लेकर अब प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी आधिकारिक बयान जारी करते हुए गहरी नाराजगी और चिंता जाहिर की है।
गिल्ड का कहना है कि इस तरह की घटनाएं मुंबई जैसे महानगर की उस पहचान को नुकसान पहुंचाती हैं, जिस पर पूरा देश गर्व करता है।
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि वह इस घटना से बेहद चिंतित और व्यथित है। गिल्ड ने बताया कि रोहित शेट्टी न सिर्फ एक सफल फिल्म निर्माता हैं, बल्कि फिल्म बिरादरी के एक अहम और सम्मानित सदस्य भी हैं। ऐसे में उनके घर को निशाना बनाना पूरी इंडस्ट्री के लिए चिंता का विषय है।
गिल्ड ने घटना को गंभीर बताया है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अपने बयान में प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने मुंबई की उस भावना का जिक्र किया, जिस पर यहां के लोग हमेशा गर्व करते आए हैं।
गिल्ड ने कहा, ''मुंबई एक ऐसा शहर है, जहां आम नागरिक से लेकर बड़े कलाकार तक खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं। यही सुरक्षा और भरोसा इस शहर को देश की कंटेंट प्रोडक्शन कैपिटल बनाता है। फिल्मों, वेब सीरीज और टीवी शोज की शूटिंग के लिए मुंबई पहली पसंद इसलिए भी है क्योंकि यहां एक सुरक्षित माहौल मिलता है। लेकिन इस तरह की घटनाएं उस भरोसे को कमजोर करती हैं।''
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फिल्म और फैशन की दुनिया में फिटनेस और लुक्स काफी मायने रखते हैं। ऐसे में एक्ट्रेसेस के लिए उम्र बढ़ने के साथ यह दबाव और भी बढ़ता जाता है, लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी हैं, जिन्होंने इन दबावों को नहीं माना और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीती हैं। अभिनेत्री लीसा रे उन्हीं में से एक हैं। 50 साल की उम्र में उन्होंने 'बीच बॉडी' की सोच को नए मायने दिए हैं और इसे आत्मस्वीकृति, आजादी और आत्मसम्मान से जोड़कर देखा है।
लीसा रे ने बुधवार को इंस्टाग्राम पर बीच से अपनी कुछ तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों के कैप्शन में उन्होंने लिखा, ''एक समय था जब बीच पर खूबसूरत दिखने का मतलब एक तय इमेज से जोड़ा जाता था, रेड स्विमसूट, रेड लिपस्टिक और हर हाल में परफेक्ट दिखने का दबाव। साल 1991 के ग्लैडरैग्स कवर ने मेरी यही छवि लोगों के मन में बसा दी थी और इसी छवि के सहारे मैंने अपना करियर भी बनाया। लेकिन, आज मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने आज रखती है।''
उन्होंने आगे लिखा, ''शरीर समय के साथ बदला है, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आए हैं, बीमारियों से लड़ी हूं और खुद को फिर से खड़ा किया है। अब दूसरों की मंजूरी से ज्यादा सुकून अपने आप को स्वीकार करने में मिलता है। उन असंभव सुंदरता मानकों से बाहर निकलना ही मुझे असली राहत है। ये मानक महिलाओं के लिए बनाए ही ऐसे गए थे कि उन्हें पूरा करना मुश्किल लगता है।''
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बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए कानूनी कदम उठाया है। उन्होंने अपनी छवि और पहचान के दुरुपयोग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अभिनेता की ओर से वकील सना रईस खान ने कोर्ट में याचिका दायर की है।
मामले में विवेक ओबेरॉय ने अदालत को बताया है कि उनके नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़े तत्वों का कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और वेबसाइट्स पर बिना अनुमति के इस्तेमाल किया जा रहा है। यह इस्तेमाल न केवल व्यावसायिक लाभ के लिए किया गया, बल्कि इससे उनकी सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
विवेक ओबेरॉय का कहना है कि एक सार्वजनिक व्यक्ति होने के बावजूद उनकी पहचान पर पहला और कानूनी अधिकार उन्हीं का है और कोई भी संस्था या व्यक्ति उनकी अनुमति के बिना इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता।
दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीपफेक तकनीक और डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से किसी सेलेब्रिटी की छवि को तोड़-मरोड़ कर पेश करना आसान हो गया है। ऐसे में अगर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो इससे न केवल आर्थिक नुकसान हो सकता है, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
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बॉलीवुड में हर स्टारकिड की राह आसान नहीं होती। बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन की बात करें, तो उनकी जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, भीतर से उतनी ही संघर्षों से भरी रही है। बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिषेक का सपना शुरू से अभिनेता बनने का नहीं था। फिल्मों में कदम रखने से पहले वह एक बिजनेस प्रोफेशनल बनना चाहते थे।
अभिषेक बच्चन का जन्म 5 फरवरी 1976 को मुंबई में हुआ। वह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और जया बच्चन के बेटे हैं। ऐसे परिवार में जन्म लेने के बाद लोगों को लगता है कि रास्ता अपने-आप साफ हो जाता है और करियर बना बनाया मिलता है, लेकिन अभिषेक के साथ चीजें अलग थीं। पढ़ाई के लिए उन्हें विदेश भेजा गया, जहां उन्होंने बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई शुरू की। उनका सपना था कि वह कॉरपोरेट दुनिया में अपना नाम बनाएं और एक सफल बिजनेस प्रोफेशनल बनें।
हालांकि विदेश में पढ़ाई के दौरान ही अभिषेक ने अपने पिता अमिताभ बच्चन के करियर का वह दौर देखा, जब वह आर्थिक और पेशेवर संघर्षों से जूझ रहे थे। पिता को करीब से संघर्ष करते देख अभिषेक का मन बदलने लगा। परिवार के हालात और फिल्मों से जुड़े माहौल ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि शायद उन्हें भी अपने पिता के काम को आगे बढ़ाना चाहिए। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ दी और भारत लौट आए।
साल 2000 में अभिषेक बच्चन ने फिल्म 'रिफ्यूजी' से बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन अभिषेक की सादगी को नोटिस किया गया। इसके बाद उन्होंने कई फिल्में कीं, जिनमें कुछ चलीं और कई असफल रहीं। शुरुआती साल उनके लिए बेहद कठिन रहे। लगातार फ्लॉप फिल्मों के कारण उनकी तुलना पिता अमिताभ बच्चन से की जाती रही और आलोचनाएं भी झेलनी पड़ीं।
फिर आया वह दौर, जब अभिषेक ने अपनी पहचान खुद बनानी शुरू की। 'युवा', 'बंटी और बबली', 'गुरु', 'धूम' फ्रेंचाइजी और 'दिल्ली-6' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। खासतौर पर फिल्म 'गुरु' में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
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टीवी और रियलिटी शो की दुनिया में अपनी पहचान बना रही एक्ट्रेस चाहत पांडे ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी डेब्यू किया है। हंगामा ओटीटी पर रिलीज हुई नई वेब सीरीज 'हसरतें सीजन 3' में उन्होंने एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया है। उनका किरदार कई मायनों में महिलाओं की जटिल भावनाओं, उनकी इच्छाओं और उनके संघर्ष को बयां करता है।
सीरीज के नए एपिसोड 'नया किराएदार' में चाहत पांडे ने स्मिता नाम की गृहिणी की भूमिका निभाई है। स्मिता एक ऐसी महिला है, जो अपने पति के अचानक गायब होने के बाद अकेली और भावनात्मक रूप से असुरक्षित महसूस करती है। उसे अपनी दबंग सास के साथ रहना पड़ता है, जिससे उसके जीवन में दबाव और भी बढ़ जाता है।
समाज की निगाहें, ऑफिस में हो रहे उत्पीड़न और अपनी अधूरी इच्छाओं को दबाने की मजबूरी ने उसकी जिंदगी को थमा दिया है। लेकिन कहानी में बदलाव तब आता है, जब उसके घर में समर्थ नाम का एक युवा म्यूजिशियन किरायेदार बनकर आता है। उनकी बढ़ती दोस्ती स्मिता के भीतर छिपी हुई भावनाओं को फिर से जागृत करती है।
जैसे-जैसे स्मिता समर्थ के करीब जाने लगती है, अचानक उसके पति की वापसी हो जाती है। स्मिता को अब यह तय करना होता है कि वह समाज की बनाई गई मर्यादाओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों में बंधी रहे या अपनी खुशी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को चुने।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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