देश

बिहारः नीतीश सरकार में शराबबंदी का आलम, जिलाधिकारी कार्यालय में शराब पार्टी करते 3 गिरफ्तार

शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिये भले ही नीतीश कुमार एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हों, लेकिन उन ही कर्मचारी खुलेआम इस कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी कार्यालय में दो सरकारी कर्मचारी सहित 3 को शराब पीते रंगे हाथ पकड़ा गया है

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया पूर्वी चंपारण जिले में 2 कर्मचारियों सहित 3 लोगों को जिलाधिकारी कार्यालय में शराब पीते पकड़ा गया

बिहार सरकार शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिये भले ही एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हो, लेकिन अक्सर उसके कर्मचारी ही इस कानून की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं। ऐसा ही मामला पूर्वी चंपारण जिले के जिलाधिकारी कार्यालय में देखने को मिला, जहां कार्यालय बंद होने के बाद जिलाधिकारी ने दो सरकारी कर्मचारियों सहित 3 को शराब पीते रंगे हाथ पकड़ा। इन तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस दौरान एक कर्मचारी भागने में सफल रहा।

उत्पाद विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जिलाधिकारी कार्यालय बंद होने के बाद शुक्रवार शाम कार्यालय के एक कमरे में कुछ कर्मचारी शराब की पार्टी कर रहे थे। इसकी भनक जिलाधिकारी रमन कुमार को लग गई। जिलाधिकारी ने तत्काल इसकी सूचना उत्पाद विभाग को दी। इसके बाद जिलाधिकारी ने खुद मौके पर पहुंचकर 3 लोगों को शराब पीते रंगेहाथ पकड़ लिया। हालांकि, इस दौरान एक व्यक्ती भागने में सफल रहा। गिरफ्तार होने वालों में राजस्व कर्मचारी मनोज कुमार, संजय कुमार और सुनील कुमार हैं। जिलाधिकारी रमन कुमार ने बताया कि इस मामले में कार्रवाई की गई है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि शराब पीते पकड़े गये सभी कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि बिहार में दो साल से पूर्ण शराबबंदी लागू है। मद्यनिषेध और उत्पाद विधेयक-2016 में कड़े सजा के प्रावधान किये गए हैं। इसके तहत 5 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और नशे में पकड़े जाने पर न्यूनतम एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के आर्थिक दंड का प्रावधान है। लेकिन हार में शराबबंदी लागू होने के बाद से विपक्ष समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता ये आरोप लगाते रहे हैं कि इस कानून की आड़ में गरीबों का सबसे ज्यादा शोषण हो रहा है। इसके अलावा ये भी आरोप है कि इस कानून की वजह से पुलिस वालों की कमाई में अथाह बढ़ोतरी हुई है। इन आरोपों के बीच हाल ही में नीतीश कुमार ने इस बात के संकेत दिये कि शराबबंदी कानून को हल्का किया जाएगा। नीतीश ने कहा कि उन्हें इन बातों की जानकारी है और इसे ठीक करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। लेकिन लगता है कि सरकार कोई निर्णय लेती उससे पहले ही बिहार के शराबियों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है और इसके लिये वह जिलाधिकारी कार्यालय का ख्याल भी नहीं रख रहे हैं।

दूसरी ओर, बिहार के शराबबंदी कानून की तर्ज पर चलते हुए उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में मथुरा जिले के घोषित तीर्थस्थलों बरसाना, गोवर्धन, गोकुल, बलदेव, नंदगांव और राधाकुंड में पूर्ण शराबबंदी लागू करने की घोषणा की है। 5 जून को लखनऊ में हुई यूपी कैबिनेट की बैठक में योगी सरकार ने इन तीर्थस्थलों में शराबबंदी के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस फैसले के बाद यहां शराब की 26 दुकानों पर ताले लटक जाएंगे।

लेकिन बिहार में शराबबंदी का जो परिणाम जमीन पर नजर आता है, उसे देखते हुए अहम सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यूपी में इस कानून का कोई खास असर हो पाएगा?

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