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फिर हुआ आईएएस अशोक खेमका का तबादला, 51वें तबादले पर ट्वीटर पर लिखा- हार नहीं मानूंगा 

अशोक खेमका ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार की परतें खोलना शुरू कर दिया था, अगर और कुछ समय विभाग में रहते तो बड़े लोग बेनकाब हो सकते थे।

फोटो: सोशल मीडिया 
फोटो: सोशल मीडिया  

हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी डॉ अशोक खेमका को एक बार फिर तबादले की मार झेलनी पड़ी है। सरकार ने इस बार उन्हें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से हटाकर खेल एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव की जिम्मेदारी दी है।

51वां तबादला होने के बाद आईएएस अशोक खेमका ने ट्वीट के जरिए मन की टीस को सबके सामने रखा। उन्होंने लिखा कि अनेक काम प्लान किए थे लेकिन एक और तबादले की खबर आ गई।

माना ऐसा जा रहा है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अशोक खेमका की सक्रियता सरकार को रास नहीं आई। अशोक खेमका ने विभाग में लंबे समय से चले आ रहे भ्रष्टाचार की परतों को खोलना शुरू कर दिया था। अगर वह और कुछ समय विभाग में रहते तो बड़े लोग बेनकाब हो सकते थे। अशोक खेमका की ओर से लगातार खुलासों की आंच सीधे सरकार पर आने की संभावना थी।

इससे पहले अशोक खेमका का अपने विभाग के मंत्री कृष्ण कुमार बेदी से टकराव की खबरें भी आई थीं। खेमका ने विभाग की गाड़ी मंत्री के साथ अटैच होने का विरोध करते हुए इसे वापस मंगवाने के लिए पत्र लिखा था। पत्र लिखे जाने के अगले दिन ही अंबाला विभाग को गाड़ी वापस भेज दी गई थी। इसके अलावा विभाग के प्रधान सचिव होने के नाते खेमका ने उन 3.22 लाख लोगों की पेंशन बंद कर दी थी जिनके दस्तावेज मौजूद नहीं थे। इनमें से आज भी एक लाख लोगों की पेंशन बंद है।

अशोक खेमका ने दिवाली के मौके पर सीधे हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय से भी पंगा ले लिया था। उन्होंने खट्टर के निजी स्टाफ को दिए जा रहे हजारों रुपये के नगद तोहफे का विरोध करते हुए मुख्य सचिव को पत्र लिख दिया था। इससे पहले खेमका शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा और लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह को भी आड़े हाथों ले चुके हैं।

खेमका की गिनती भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले नौकरशाहों में होती है। उनकी पहली पोस्टिंग 1993 में हुई थी। 1991 बैच के आईएएस खेमका के कई तबादले ऐसे हुए हैं जहां वे एक महीने भी नहीं रह सके। अपनी अब तक की नौकरी के दौरान उन्होंने अलग-अलग विभागों में 8 ऐसे पद संभाले हैं जिनपर जो एक महीने या उससे भी कम समय तक रहे।

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Published: 13 Nov 2017, 3:49 PM IST