
कांग्रेस ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा और चढ़ावा चोरी के मामले में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी )और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर लीपापोती के प्रयास का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में जांच कराने के साथ ही मंदिर के लिए प्राप्त चंदे का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
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पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अयोध्या के भगवान राम के मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी करोड़ों देशवासियों की आस्था के साथ बड़ा विश्वासघात है और इस्तीफों तथा सीमित कार्रवाई के जरिए पूरे मामले में लीपापोती कर असली जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने मांग की कि ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को तत्काल भंग कर शंकराचार्यों, धर्माचार्यों, संतों और अन्य धार्मिक प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित किया जाए।
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उनका यह भी कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (एसआईटी) पर जनता का भरोसा नहीं है, इसलिए मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में स्वतंत्र रूप से कराई जानी चाहिए।
रमेश ने कहा, ‘‘राम मंदिर के लिए नकद और वस्तु के रूप में प्राप्त सारे चंदे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़ें।’’
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इस बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को राम मंदिर आंदोलन के कारण सत्ता में आने का अवसर मिला था, लेकिन अब लोगों में यह भावना बन रही है कि उनकी आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है।
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गहलोत ने आरोप लगाया कि कथित गड़बड़ियों की जानकारी काफी पहले से थी, लेकिन मामले को दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे प्रकरण में लीपापोती की कोशिश की गई, जबकि प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं मंदिर निर्माण में विशेष रुचि दिखाई थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस मामले में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और "डबल इंजन" सरकार भी कथित अनियमितताओं को रोकने में विफल रही है।
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उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग "चाल, चरित्र और चेहरे" की बात करते थे, इस घटनाक्रम से उनका वास्तविक चेहरा सामने आ गया है।
गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और बीजेपी ने मंदिर पर अवैध कब्जा कर रखा है।
उन्होंने कहा कि जब पूरे देश के लोगों ने मंदिर निर्माण के लिए चंदा दिया था तो सभी पक्षों को साथ लेकर चलना चाहिए था।
उन्होंने भी मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर धर्माचार्यों को शामिल करते हुए नया ट्रस्ट गठित करने की मांग उठाई।
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गहलोत ने कहा कि जिस तरह चुनावी बॉन्ड मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद चुनावी चंदे का विवरण सार्वजनिक किया गया था, उसी प्रकार राम मंदिर के लिए प्राप्त चंदे का पूरा ब्योरा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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