
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए बुधवार को कहा कि उसके खुद के ही विधायक सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं।
गहलोत ने आंगनबाड़ी के पोषाहार की खराब गुणवत्ता को लेकर बीजेपी के एक विधायक की कतिपय टिप्पणी के हवाले से यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘राजस्थान की बीजेपी सरकार में क्या चल रहा है? खुद सत्ताधारी दल के विधायक ही आज सरकार के दावों की पोल खोल रहे हैं।’’
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गहलोत के अनुसार, ‘‘उदयपुर की समीक्षा बैठक में गोगुंदा से बीजेपी विधायक प्रताप गमेती का यह कथन बेहद विचलित करने वाला है कि ‘आंगनबाड़ी के पोषाहार को जानवर भी नहीं खाते।’ विशेषकर आदिवासी क्षेत्रों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ ऐसा खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘एक तरफ योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी देरी और दूसरी तरफ मासूमों के निवाले में भ्रष्टाचार? उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के सामने अपनों ने ही आईना दिखा दिया है। बीजेपी सरकार विज्ञापनों और बैठकों से आगे बढ़कर इन गरीब बच्चों की सुध कब लेगी?’’
उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ‘‘क्या इस भ्रष्टाचार की कभी जांच होगी या आदिवासियों के हक पर ऐसे ही भ्रष्टाचार चलता रहेगा।’’
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राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘सच अपने आप सामने आ ही जाता है, जबकि झूठ को सोच-समझकर गढ़ना पड़ता है। बीजेपी विधायक प्रताप गमेती ने सही कहा कि आंगनबाड़ी का पोषण आहार घर जाकर फेंका जा रहा है और उसे जानवर तक नहीं खाते, क्योंकि इसमें भाजपा राज के भ्रष्टाचार की बू आ रही है।’’
जूली के अनुसार जब बीजेपी के विधायक स्वयं संभाग स्तरीय बैठक में उपमुख्यमंत्री के सामने यह कहने को मजबूर हो जाएं कि आंगनबाड़ी का पोषण आहार फेंका जा रहा है और उसे जानवर भी नहीं खाते, तो यह साफ है कि प्रदेश में सरकार नहीं, बल्कि अव्यवस्था का तमाशा चल रहा है।
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जूली के अनुसार, ‘‘ राज्य में 'फेल डबल इंजन' सरकार में इससे ज्यादा शर्मनाक और विफलता का उदाहरण क्या हो सकता है? सरकार “पोषण” और “विकास” के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पोषण आहार की गुणवत्ता इतनी बदहाल है कि अब उसके अपने ही जनप्रतिनिधि इसकी पोल खोल रहे हैं।’’
पीटीआई के इनपुट के साथ
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