
चारधाम यात्रा-2023 को लेकर विभाग ने निर्णय लिया है कि अब ग्रीन कार्ड तभी नवीनीकृत किए जाएंगे, जब वाहन में जीपीएस लगा होगा। इस समय विभाग में 10 हजार से अधिक वाहनों में जीपीएस लगाया जाना है। संयुक्त आयुक्त परिवहन एसके सिंह ने कहा कि वाहनों का ग्रीनकार्ड तभी जारी किया जाएगा, जब उनमें जीपीएस लगा होगा। जीपीएस नहीं तो ग्रीन कार्ड भी नहीं मिलेगा।
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दरअसल, उत्तराखंड में अब बिना जीपीएस लगाए व्यावसायिक वाहनों को चारधाम यात्रा में वाहन संचालन के लिए ग्रीन कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग द्वारा इसके लिए व्यावसायिक वाहन स्वामियों को जीपीएस लगाने के लिए दी गई समय सीमा समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब उसी वाहन को ग्रीनकार्ड जारी किया जाएगा, जिसमें जीपीएस लगा होगा।
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प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण वाहनों की तेज रफ्तार भी है। वाहनों की रफ्तार पर नजर रखने के लिए केंद्र सरकार ने सभी वाहनों में जीपीएस आधारित व्हीकल लोकेशन ट्रेकिंग डिवाइस सिस्टम (वीएलटीएस) लगाना अनिवार्य किया है।
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वर्ष 2019 के बाद बनने वाले सभी व्यावसायिक वाहनों में कंपनियां ही ये डिवाइस लगाकर दे रही हैं। इससे पहले के वाहनों में इसे लगाया जाना है। इससे यह जानकारी मिल जाती है कि वाहन किस गति से चल रहा है, कहां चल रहा है और किस प्रकार चल रहा है। इस पर परिवहन मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से नजर रखी जाती है।
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सरकार ने गत वर्ष चारधाम यात्रा से पहले, वाहनों में जीपीएस लगाना अनिवार्य किया था। वाहन स्वामियों के विरोध को देखते हुए इसे एक वर्ष तक के लिए टाल दिया गया। इस वर्ष फिर इसे लागू करने की बात हुई तो वाहन स्वामियों ने इसके लिए कुछ वक्त मांगा। ऐसे में विभाग ने इन्हें 31 मई तक का समय दिया। अब यह समय सीमा समाप्त हो चुकी है।
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इस बीच सभी यात्रा मार्ग पर चलने वाले वाहनों को ग्रीन कार्ड जारी कर दिए गए हैं। ये ग्रीन कार्ड छह माह तक के लिए दिए गए हैं। विभाग ने निर्णय लिया है कि अब ग्रीन कार्ड तभी नवीनीकृत किए जाएंगे, जब वाहन में जीपीएस लगा होगा। इस समय विभाग में 10 हजार से अधिक वाहनों में जीपीएस लगाया जाना है। संयुक्त आयुक्त परिवहन एसके सिंह ने कहा कि वाहनों का ग्रीन कार्ड तभी जारी किया जाएगा, जब उनमें जीपीएस लगा होगा।
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