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डोनाल्ड ट्रंप जिस दवा को बता चुके हैं कोरोना की लड़ाई में ‘गेमचेंजर’, उसी के इस्तेमाल पर कई देशों ने लगा दी रोक

जिस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कोरोना वायरस की लड़ाई में कई बार गेमचेंजर बताया है उसे लेकर वैज्ञानिक और तमाम देशों के हेल्थ एक्सपर्ट्स अब कोरोना वायरस से लड़ाई में दवा की भूमिका को खारिज करने लगे हैं। 

फोटो: सोशल मीडिया  
फोटो: सोशल मीडिया   

आज से करीब 10 दिन पहले दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका ने एक दवाई के निर्यात को लेकर भारत को धमकी दे डाली थी। ये दवाई थी हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन जिसे कोरोना वायरस के लिहाज से अहम दवा माना जा रहा है। जिसका भारत सबसे बड़ा उत्पादक है। जिस दवा को लेकर अमेरिका भारत को सबक सिखाने की बात कह रहा था, अब उसी दवा को लेकर वैज्ञानिकों का ऐसा बयान सामने आया है जिससे कई चेहरों पर मासूसी छा गई।

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वैज्ञानिक और तमाम देशों के हेल्थ एक्सपर्ट्स की राय

दुनिया भर में मेड इन इंडिया हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की बढ़ती मांग के बीच वैज्ञानिक और तमाम देशों के हेल्थ एक्सपर्ट्स अब कोरोना वायरस से लड़ाई में इस दवा की भूमिका को खारिज करने लगे हैं। कई वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के खिलाफ आगाह भी किया है। गौरतलब है कि ये वही दवा है जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप कोरोना वायरस की लड़ाई में कई बार गेमचेंजर बता चुके हैं। इसकी भारी मांग और अमेरिका की धमकी के कुछ घंटे बाद ही भारत ने इस दवाई के निर्यात पर आंशिक रूप से पाबंदी हटाने की घोषणा कर दी थी।

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आईसीएमआर ने क्या दी सलाह ?

सीमित प्रभाव हाइड्रोक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल सामान्य तौर पर आर्थराइटिस, लूपस और मलेरिया के उपचार में किया जाता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने लोगों को बिना चिकित्सीय परामर्श के हाइड्रोक्लोरोक्वीन ना लेने की सलाह दी है क्योंकि क्लोरोक्वीन की सही डोज ना लेने पर खतरनाक साइड इफेक्ट हो सकते हैं। आईसीएआर के वैज्ञानिक रमन गांगेडकर का कहना है कि लैब से पुष्ट कोरोना वायरस संक्रमित के संपर्क में आने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और घर के सदस्यों के लिए इस ड्रग का इस्तेमाल किया जा सकता है। आईसीएमआर ने अपनी एडवाइजरी में कहा है कि हाइड्रोक्लोरोक्वीन लैब स्टडीज में कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ शुरुआती बचाव में मददगार साबित हुई है। हालांकि, क्लीनिकल ट्रायल में ड्रग की सीमित सफलता ही दिखी है।

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हालांकि इसकी दूसरी तस्वीर भी है पिछले महीने इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एंटीमाइक्रोबायल एजेंट (आईजेएए) में प्रकाशित फ्रेंच वैज्ञानिकों की एक स्टडी में बताया गया था कि 20 मरीजों के हाइड्रोक्लोरोक्वीन से इलाज के बाद उनमें वायरल लोड में कमी आई। इसके अलावा, बाकी मरीजों की तुलना में इस दवा का इस्तेमाल करने वालों के शरीर में वायरस ज्यादा लंबे समय तक मौजूद नहीं रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी स्टडी का हवाला देते हुए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लगातार गेमचेंजर बताया लेकिन अब स्टडी के प्रकाशकों ने कहा है कि यह तमाम मानकों के अनुरूप नहीं है।

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इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एंटीमाइक्रोबायल एजेंट ने खड़े किए सवाल!

इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ एंटीमाइक्रोबायल एजेंट ने इस स्टडी को लेकर तमाम सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शोधकर्ताओं ने अपने डेटा में उन मरीजों को शामिल नहीं किया था जिन पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन ट्रीटमेंट का अच्छा असर नहीं देखने को मिला। शोधकर्ताओं ने 26 मरीजों के साथ प्रयोग की शुरुआत की थी लेकिन 6 मरीजों को ट्रायल के बीच में ही छोड़ना पड़ा। स्टडी के मुताबिक, ट्रायल में शामिल तीन मरीजों को आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा, चौथे मरीज की मौत हो गई जबकि एक मरीज को उल्टी की शिकायत होने पर हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देना बंद कर दिया गया।

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इस देश के अस्पतालों में लगी इस दवा के इस्तेमाल पर रोक

स्वीडन के अस्पतालों ने भी कोरोना वायरस के मरीजों में मलेरिया के ड्रग का इस्तेमाल बंद कर दिया है। इससे मरीजों में भयानक सिर दर्द और विजन लॉस जैसी समस्याएं हो रही थीं। इस दवा को देने के कुछ दिन बाद ही कई मरीजों में माइग्रेन, उल्टी, आंखों की रोशनी कम होने जैसे साइड इफेक्ट नजर आने लगे। 100 में से एक में क्लोरोक्वीन की वजह से हार्ट बीट में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हार्टबीट तेजी से बढ़ने या घटने की वजह से हार्ट अटैक तक की नौबत भी आ सकती है।

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यूरोप में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को ट्रायल तक सीमित रखा जा रहा

इसके अलावा मेडिकल वेबसाइट ड्रग डेटा फीयर्स फार्मा के मुताबिक, यूरोप में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को सिर्फ क्लीनिकल ट्रायल तक सीमित रखा जा रहा है। चीन और फ्रांस में ट्रायल में शुरुआती सफलता के बावजूद, यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी (ईएमए) ने कहा है कि कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के असरदार होने की बात अभी तक साबित नहीं हुई है। वहीं, ब्रिटेन ने क्लीनिकल ट्रायल खत्म ना होने तक डॉक्टरों को इस दवा का इस्तेमाल करने से रोक दिया है। यूके के जाने-माने डॉक्टर प्रोफेसर एंथोनी गार्डन ने डेली मेल से बताया कि अभी तक इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि क्लोरोक्वीन या हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन कोरोना वायरस के इलाज में असरदार है।

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ट्रंप की धमकी के बाद मोदी ने बदले थे दवा निर्यात के नियम

यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कोरोना वायरस के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को लेकर एक गाइडलाइन छापी थी लेकिन इसी सप्ताह इसे हटा दिया गया है। सीडीसी ने अपडेट में लिखा है कि इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल अभी जारी है। गौरतलब है कि इसी दवाई को लेकर अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर उसने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के निर्यात पर लगी रोक नहीं हटाई तो वह भी इसका जवाब देगा। यानी ट्रंप ने मोदी सरकार को ये बताने की कोशिश की थी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अंजाम बुरा होगा। हालांकि ट्रंप की धमकी के 6 घंटे बाद ही भारत सरकार ने दवा निर्यात के नियम में बदलाव कर कहा कि कुछ देशों में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन दवा का निर्यात किया जाएगा।

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