
विश्व टीबी दिवस लोगों को इसके प्रति जागरूक करने और वैश्विक स्तर पर इस महामारी को खत्म करने के प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
भारत में टीबी एक गंभीर समस्या है। साल 2016 में 4,23,000 लोग टीबी के कारण अपनी जान गंवा बैठे थे। पिछले साल 2017 में अक्टूबर में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन 7 देशों की लिस्ट में शामिल था जहां टीबी के सबसे ज्यादा मरीज है।
डब्ल्यूएचओ की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2017 के अनुसार भारत, इंडोनेशिया, चीन, फिलीपींस, पाकिस्तान , नाजीरिया और साउथ अफ्रीका में इससे गंभीर रूप से प्रभावित है। दुनिया में टीबी के मरीजों की संख्या का 64 प्रतिशत सिर्फ इन्हीं सात देशों में है, जिनमें भारत सबसे ऊपर है। भारत के अलावा चीन और रूस में 2016 में दर्ज किए मामलों में करीब आधे 4,90,000 मामलें मल्टीड्रग-रेसिस्टैंट टीबी के है।
डब्ल्यूएचओ का कहना है कि दुनिया के सभी देश अगर सही तरीके से टीबी का इलाज होता रहे तो वर्ष 2030 तक इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
विश्व तपेदिक (टीबी) दिवस के मौके पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ट्वीट किया, “विश्व टीबी दिवस पर मैं हितधारकों से साथ आकर टीबी से मुकाबला करने का आग्रह करता हूं। हमारे देश में टीबी जन स्वास्थ्य के लिए लगातार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। समय आ गया है कि हम सब 2025 तक भारत से इसका नामोनिशान मिटा देने के लिए एक साथ आएं।”
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पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “इस साल के विश्व टीबी दिवस के विषय ‘वांटेड: लीडर्स फॉर ए टीबी फ्री वर्ल्ड’ की भावना को ध्यान में रखते हुए मैं टीबी को खत्म करने के लिए नागरिकों और संगठनों से इस अभियान में आगे आने का आग्रह करता हूं। टीबी मुक्त दुनिया मानवता की एक बड़ी सेवा है।”
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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने आगे कहा, “दुनिया ने जहां 2030 तक टीबी का उन्मूलन करने का लक्ष्य रखा है, हम भारत में 2025 तक टीबी मुक्त होना चाहते हैं। हालिया ‘डेल्ही एंड टीबी समिट’ में मैंने इस विषय के बारे में बात की।”
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टीबी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक हवा के जरिये फैलता है। टीबी से ग्रस्त जब कोई मरीज खांसता, छींकता या थूकता है तब टीबी के कीटाणु हवा में फैल जाते है। अगर यह कीटाणु हवा के जरिये आपके शरीर में चले जाये तब भी आपको टीबी हो सकता है।
टीबी का बैक्टीरिया शरीर के जिस भी हिस्से में होता है, उसके टिश्यू को पूरी तरह नष्ट कर देता है और इससे उस अंग का काम प्रभावित होता है। जैसे फेफड़ों में टीबी हो जाता है को फेफड़े धीरे-धीरे बेकार हो जाते हैं, यूटरस में है तो इन्फर्टिलिटी (बांझपन) की वजह बनती है, हड्डी में अगर हो जाए तो हड्डी को गला देती है, ब्रेन में है तो मरीज को दौरे पड़ सकते हैं, लीवर में टीबी होने पेट में पानी भरने लगता है।
रॉबर्ट कोच ने 24 मार्च 1882 को टीबी के जीवाणु की खोज करने की घोषणा की थी, जिससे इस बीमारी की इलाज ढूंढ़ने में मदद मिली। इसलिए 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है।
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