
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को सोमवार को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत में ले लिया गया है।
इतना ही नहीं, जिस स्थान पर अब्दुल्ला को रखा जाएगा उसे एक आदेश के जरिए अस्थायी जेल घोषित कर दिया गया है। PSA के तहत किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।
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श्रीनगर से लोकसभा सांसद फारूक अब्दुल्ला 5 अगस्त से घर में नजरबंद हैं, जब भारत सरकार ने कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था।
हाल ही में, नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों को फारूक और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला से मिलने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इस प्रतिबंध के साथ कि वे मुलाकात के बाद मीडिया के साथ बातचीत नहीं कर सकते।
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न्यायाधीश संजीव कुमार ने सांसदों जस्टिस (रिटायर्ड) हसनैन मसूदी (अनंतनाग) और अकबर लोन (बारामूला) द्वारा दायर की गई याचिका के बाद अनुमति दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन को नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख की नजरबंदी पर नोटिस भी जारी किया।
बता दें कि हिरासत के दौरान फारूक अब्दुल्ला अपने ही घर में रहने को मजबूर हैं। उन्हें अपने किसी भी अपने मित्र या रिश्तेदार से मिलने की इजाजत नहीं दी गई है। उच्चतम न्यायलय ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए अब्दुल्ला की गिरफ़्तारी के विषय में 15 दिनों के अन्दर जवाब मांगा है।
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गौरतलब है कि करीब 40 दिन पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का आदेश जारी किया था। उसके बाद से अब तक कश्मीर में इंटरनेट और मोबाईल फोन सोवाओं पर पाबंदी लगी हुई है। इसके अलावा राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं को श्री नगर एयरपोर्ट से वापस भेज दिया गया था।
(आईएएनएस इनपुट के साथ)
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