देश

लोकसभा चुनाव में जिन्हें चुना, उनकी कुंडली तो देख लें!

लोकसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और नतीजे भी आ चुके हैं। इस बार 542 में से 300 सांसद ऐसे हैं, जो पहली बार संसद पहुंचे हैं। ऐसे में देश को ये जानना जरूरी है कि हम ने कैसे लोगों को अपने भाग्य का फैसला करने की जिम्मेदारी दी है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

वोट देना सबसे बड़ा नागरिक अधिकार है। संस्थागत रूप से इस बात के तमाम प्रयास किए जाते रहे हैं कि साफ-सुथरे और काबिल लोग चुनकर आएं, लेकिन इस संदर्भ में सबसे बड़ी जिम्मेदारी नागरिकों की होती है। अगर लोग चाहेंगे कि कोई अपराधी चुनकर नहीं आए, तो नहीं आएगा। अगर लोग चाहेंगे कि कोई अशिक्षित नहीं आए, तो नहीं आएगा।

इस बार के आम चुनाव में जीत कर आए सांसदों द्वारा घोषित ब्योरों के औसत को देखें तो 2014 के मुकाबले 2019 में चुने गए सांसदों की संपत्ति में खासा इजाफा हुआ है।

हर चुनाव की तरह 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जीत कर आए सांसदों में करोड़पति सांसदों की संख्या बढ़ी है। 2019 के चुनाव में जीते 88 फीसदी यानी 475 सांसद करोड़पति हैं।

17वीं लोकसभा के लिए जीत कर आए सांसदों के ब्यौरे से पता चलता है कि इस बार सबसे अधिक सांसद खेती-किसानी से जुड़े हैं। ब्यौरे के अनुसार इस बार 30 फीसदी से अधिक सांसद खेतिहर हैं।

भारत के संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि पिछले कई लोकसभा चुनाव से संसद में दागी सांसदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। 2019 के चुनाव में जीतकर आए सांसदों में 43 फीसदी यानी 233 सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव में जीत कर आने वाले मुस्लिम सांसदों की संख्या भले पिछली बार की तुलना में बेशक अधिक है, लेकिन अगर 2009 से तुलना करें तो इनकी संख्या कम है। खास बात ये है कि पिछले लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक सीटों वाले उत्तर प्रदेश से कोई मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया था, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश और बंगाल से सर्वाधिक 6-6 मुस्लिम सांसद चुनकर संसद आए हैं।

पिछले चुनावों के दौरान जीतकर देश की संसद में पहुंचने वाली महिलाओं के प्रतिशत में इजाफा तो हुआ है, लेकिन सीटों की संख्या के लिहाज से यह पर्याप्त नहीं है। इस बार 78 महिलाएं जीतकर संसद पहुंची हैं। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में अब भी हमें लंबी दूरी तय करनी है।

लोकतंत्र में वोट देना सबसे बड़ा नागरिक अधिकार है। और वोट देने के अधिकार में ही एक और बड़ा अधिकार जुड़ जाता है- ‘नोटा’ का अधिकार। धीरे-धीरे चुनावों में नोटा के विकल्प का उपयोग करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। 2019 के चुनाव में नोटा का विकल्प अपनाने वाले मतदाताओं की संख्या पिछली बार की तुलना में कम रही है। इस बार नोटा पर सबसे ज्यादा 8.17 लाख वोट बिहार में पड़े।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए

  • हरियाणाः हिसार कोर्ट के बाहर गैंगस्टर विनोद पन्नू की गोली मारकर हत्या, ताबड़तोड़ गोलीबारी से थर्राया इलाका

  • ,
  • छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए BJP-RSS की मानसिकता जिम्मेदार, लेकिन युवाओं को अब रोका नहीं जा सकताः राहुल गांधी

  • ,
  • बड़ी खबर LIVE: जंतर-मंतर समेत देशभर में प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर SC सख्त, जांच के लिए बनाई हाई पावर कमेटी

  • ,
  • बाढ़ से बेहाल असम: टूटी सड़कें, बहे स्कूल, कांग्रेस ने मांगा ₹10,000 करोड़ का पैकेज, गौरव गोगोई की PM मोदी से अपील

  • ,
  • दुनिया की खबरें: रूस की ड्रोन कार्रवाई पर भड़के रोमानिया के राष्ट्रपति और ईरान पर ट्रंप की आर्थिक नीति से चीन नाराज