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एसएससी घोटाले पर नहीं थमा है छात्रों का रोष: रोजगार के नाम पर सिर्फ सपने बेच रही है मोदी सरकार

छात्रों का कहना है कि जिस मकसद से एसएससी बना था, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। आयोग इस साल 50 हजार से ज्यादा नौकरियां देने का दंभ भर रह रहे हैं, लेकिन क्या छात्रों का चुनाव मेरिट के दम पर होगा

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया 

'वी वॉन्ट जस्टिस' और 'एसएससी हाय हाय' के नारे लगाते और अपना भविष्य बचाने की पिछले 13 दिनों से गुहार लगाते छात्र, यह नजारा है कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का। परीक्षा में धांधली को लेकर सीबीआई जांच की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि एसएससी की कार्यप्रणाली को लेकर छात्रों में लंबे समय से रोष था लेकिन इस घटना ने सब्र का बांध तोड़ दिया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रविवार को एसएससी की तेरहवीं मनाई और सरकार को कोरे आश्वासन नहीं देने की सलाह दी। यकीनन, छात्रों का इशारा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के सीबीआई जांच के आदेश देने के बयान के संदर्भ में था। छात्रों ने कहा कि रोजगार के नाम पर हमें सपने बेचे जा रहे हैं।

बीते 13 दिनों से प्रदर्शन स्थल पर डटे प्रदर्शनकारी छात्र विपिन गौतम ने बताया, "जिस उद्देश्य से एसएससी का गठन हुआ था, वह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। आयोग के चेयरमैन इस साल 55,661 छात्रों को नौकरियां देने का दंभ भर रह रहे हैं लेकिन क्या गारंटी है कि नौकरियां पाने वाले छात्रों का चुनाव मेरिट के दम पर होगा।"

बिहार के मोतिहारी से प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए हिमांशु शेखर ने कहा, "पिछले चार सालों से एसएससी की तैयारी कर रहा हूं। इन सालों में दिन के 16 से 17 घंटे परीक्षा की तैयारी में लगा रहा हूं। एसएससी पर जो विश्वास था वह टूट गया। ये हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है।" एसएससी के खिलाफ इन प्रदर्शनों में देशभर से छात्र हिस्सा लेने पहुंच रहे हैं, जो सरकार से अपना भविष्य बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

हरियाणा से प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए प्रकाश माथुर कहते हैं, "हमारी सिर्फ दो मांगे हैं। पहली कि पिछले एक साल के दौरान हुई परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए और जांच पूरी होने तक सभी परीक्षाएं स्थगित हों। सरकार आंदोलन बंद करवाने के लिए कोरे आश्वासन नहीं दे।"

दरअसल, एसएससी में धांधली के मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब एसएससी सीजीएल की ऑनलाइन परीक्षा शुरू होने से पहले ही उसका प्रश्नपत्र ऑनलाइन लीक हो गया। इसके बाद परीक्षा पहले कुछ घंटे के लिए स्थगित और बाद में रद्द कर दी गई।

बीते 27 फरवरी से एसएससी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे छात्रों में बड़ी संख्या में महिला प्रदर्शनकारी भी हैं। मध्य प्रदेश के शिवपुरी की लता कौशिक जो बीते चार दिनों से इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं, गुस्से भरे लहजे में कहती हैं, "रोजगार के नाम पर हमें सपने बेचे जा रहे हैं। सच्चाई यह है कि नौकरियां नहीं है और जो है, उन पर धांधली से नियुक्तियां की जा रही है और अगर आयोग किसी भी तरह की धांधली से इनकार करता है तो जवाब दे कि एक ही छात्र के 700 एडमिट कार्ड कैसे बने? परीक्षा शुरू होने से पहले लीक कैसे हो गया? छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है और सरकार चुप्पी साधे बैठी है। ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा सिर्फ जुमला बन गया है। प्रधानमंत्री मोदी की जिम्मेदारी है कि वह आगे आकर छात्रों को भरोसा दिलाएं।"

छात्र आयोग की लचर कार्यप्रणालियों से भी खफा हैं और इसमें दुरुस्ती की मांग कर रहे हैं। ऐसे ही एक छात्र हैं, आशीष शर्मा जो कहते हैं, "छात्रों में एसएससी की कार्यप्रणालियों को लेकर लंबे समय से रोष था और इस घटना ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। मैंने 2016 में परीक्षा दी, 2017 में चयन हो गया लेकिन अब मार्च 2018 आ गया है लेकिन अभी तक नियुक्ति पत्र तक नहीं मिला है। मैं अकेला नहीं हूं, मेरे जैसे हजारों बच्चे हैं जो परीक्षा पास तो कर लेते हैं लेकिन कई सालों तक उनकी नियुक्तियां लटकी रहती हैं।"

इस पूरे प्रकरण पर स्वराज इंडिया के प्रवक्ता अनुपम कहते हैं, "पैसे के बल पर लोगों को नौकरियां मिल रही हैं। सीटें बिकी हुई हैं। राजनीतिक शह के बिना इस तरह की धांधली मुमकिन नहीं है। हम एसएससी के भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ हैं और छात्रों के साथ खड़े हैं।"

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