
केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती करने के फैसले के बाद विपक्ष के सांसदों ने असंतोष व्यक्त किया है। सांसदों का कहना है कि टैक्स में छूट मिलनी चाहिए थी, जिस पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है।
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "सरकार का राजस्व जनता से ही आता है, जो टैक्स के रूप में इकट्ठा किया जाता है। अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती करती है तो वह अपने पैसों से कुछ नहीं दे रही बल्कि लोगों की जेब से इकट्ठा किए गए पैसे ही सरकार का राजस्व बनते हैं। सरकार को इस कटौती का इतना प्रचार करने की आवश्यकता क्यों है।"
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आरजेडी सांसद मीसा भारती ने कहा कि कीमतों में थोड़ी कटौती हुई है, लेकिन फिर भी ये तेल और एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुएं अब भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। चाहे एलपीजी हो, पेट्रोल हो या डीजल, हर जगह लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।"
मीसा भारती ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की भारी कमी के कारण जनता को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है। पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें और उपलब्धता की कमी आम आदमी की रोजमर्रा की जिन्दगी को प्रभावित कर रही है।
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वहीं, टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पिछले तीन हफ़्तों तक सरकार दावा कर रही थी कि तेल और गैस की सप्लाई पर्याप्त है लेकिन अब जब स्थिति आपातकालीन बन गई है, तभी सरकार ने एक्साइज़ ड्यूटी कम की। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार की विफलता को दर्शाता है। विशेष रूप से एलपीजी की भारी कमी को लेकर
उन्होंने चिंता व्यक्त की और बताया कि इससे छोटे उद्योग, रेस्टोरेंट, मजदूर, छात्र और बुज़ुर्ग सभी प्रभावित हो रहे हैं। पहले कुछ नहीं किया गया और अब जब यह एक आपातकाल बन गया है, तब सरकार हरकत में आई है। यह साफ़ तौर पर उसकी विफलता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहले ध्यान दे देती तो आज देश में इतनी परेशानी न होती, देश के हालात खराब होने पर इनको देश की याद आती है।
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