
खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध के चलते एक ओर जहां रसोई गैस और पेट्रोल डीजल की किल्लत सामने आ रही है। वहीं रसोई गैस और कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि भी हुई है। इसे लेकर विपक्षी दल मोदी सरकार पर हमलावर हैं। विपक्षी दलों ने एलपीजी संकट के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। इंडिया गठबंधन के सांसदों ने गुरुवार को इस मुद्दे पर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के सांसद रामकृपाल यादव, एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले समेत कई सांसद शामिल हुए। उन्होंने ‘‘मोदी जी एलपीजी’’ और "नाम नरेंदर, काम सरेंडर" के नारे भी लगाए।
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विपक्षी सांसदों ने गैस सिलेंडर की आकृति वाली तख्तियां भी ले रखी थीं। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कहना है कि ईंधन संकट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है लेकिन वह ख़ुद अलग कारणों से घबराए हुए नज़र आ रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'पीएम बोल रहे हैं कि पैनिक करने की जरूरत नहीं है लेकिन वे खुद पैनिक में हैं कई अन्य कारणों की वजह से। वे एपस्टीन की वजह से पैनिक में हैं, वे अडानी केस की वजह से पैनिक में हैं। कल पीएम की कुर्सी खाली पड़ी थी। वे देश को कह रहे थे कि पैनिक ना करें और खुद पैनिक में हैं।'
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बता दें कि, पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से देश में होटल, रेस्तरां, फैक्टरियां, शादी समारोहों के कैटरर्स और पर्यटन प्रतिष्ठान रोजाना के कामकाज में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
घरेलू और कमर्शियल गैस ग्राह, सिलेंडर के लिए एजेंसियों पर भीड़ लगा रहे हैं। वहीं व्यवसायिक सिलेंडरों की नई बुकिंग नहीं हो रही, जिससे उद्योगों पर असर पड़ा है। वहीं कुछ रेस्तरां संचालक अब कोयला भट्ठी, डीजल बर्नर का सहारा लेने पर विचार कर रहे हैं।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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