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पेट्रोल-डीजल पर सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी, अब कितनी घटेंगी कीमतें?

सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है, जिससे मिडिल ईस्ट तनाव और महंगे कच्चे तेल के बीच कीमतों में राहत की उम्मीद बढ़ी।

फोटो: Getty Images
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सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती की है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी 10 रुपये से घटाकर पूरी तरह शून्य कर दी गई है। इस फैसले से देश में ईंधन की कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

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मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ा दबाव, महंगा हुआ कच्चा तेल

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ा है। सप्लाई बाधित होने से कच्चा तेल महंगा हो गया, जिससे भारत की फ्यूल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया। इसी बीच नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल के 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ा दिए। हालांकि राज्यों के VAT और अन्य टैक्स के चलते यह बढ़ोतरी कुछ जगहों पर 5.30 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है।

देशभर में नायरा एनर्जी के 1,02,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 पंप संचालित हैं।

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सरकारी कंपनियों ने सीमित कैटेगरी में बढ़ाए दाम

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अभी तक सामान्य पेट्रोल-डीजल के दामों में बदलाव नहीं किया है, लेकिन प्रीमियम और इंडस्ट्रियल कैटेगरी में कीमतें बढ़ाई गई हैं।

दिल्ली में प्रीमियम 95-ऑक्टेन पेट्रोल 99.89 रुपये से बढ़कर 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गया है। वहीं, बल्क या इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 87.67 रुपये से बढ़कर 109.59 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है।

देश के लगभग 90% फ्यूल मार्केट पर इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी कंपनियों का कब्जा है।

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कच्चे तेल में हल्की गिरावट, अमेरिकी फैसले का असर

शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका द्वारा ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमले 10 दिनों के लिए रोकने की घोषणा के बाद बाजार में राहत दिखी।

ब्रेंट फ्यूचर्स 0.8% गिरकर 107.11 डॉलर प्रति बैरल और U.S. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.88% गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि एक दिन पहले ही इन कीमतों में क्रमशः 5.7% और 4.6% की तेज बढ़त देखी गई थी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 88% आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आता है। जंग के बीच ईरान ने इस अहम समुद्री मार्ग पर नियंत्रण बढ़ाते हुए व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सीमित कर दी।

हालांकि भारत जैसे ‘फ्रेंडली देशों’ के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए ईरान की शर्तों को मानना होगा। साफ किया गया है कि केवल वही जहाज इस मार्ग से गुजर सकेंगे, जो ईरान के खिलाफ किसी कार्रवाई में शामिल नहीं हैं।

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28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष, हजारों की मौत

अमेरिका और इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

ईरान और लेबनान में हुए हमलों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है। इस युद्ध ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है और तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

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