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पंचायत और शहरी निकाय चुनाव को लकर पायलट और गहलोत का राजस्थान सरकार पर हमला, राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग

सचिन पायलट ने कहा, “सत्तारूढ़ पार्टी को हार का डर है, इसलिए वह जानबूझकर स्थानीय निकाय चुनावों में देरी कर रही है।”

फाइल फोटोः विपिन
फाइल फोटोः विपिन 

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार पंचायत और शहरी निकाय चुनाव कराने में विफल रही है, इसलिए राष्ट्रपति और राज्यपाल को हस्तक्षेप करना चाहिए।

सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने यह बात कही।

उन्होंने कहा, ‘‘डॉ. भीमराव आंबेडकर का संविधान निर्माण में योगदान इतिहास में दर्ज है। जो लोग कभी आंबेडकर के सिद्धांतों में विश्वास नहीं करते थे, वे आज सत्ता में हैं और उनकी जयंती मना रहे हैं। उन्हें संविधान पर कोई आस्था नहीं है और वे उसे तार-तार कर रहे हैं।’’

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गहलोत ने कहा, ‘‘पंचायत और नगर निकाय चुनाव नहीं कराए जा रहे हैं। अगर वास्तव में संविधान में विश्वास होता तो चुनाव समय पर होते।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी बार-बार ‘संविधान बचाओ’ का नारा देते हैं, क्योंकि संविधान का उल्लंघन हो रहा है और लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।

गहलोत ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति और राज्यपाल को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। चुनाव समय पर होने चाहिए थे, अन्यथा इस सरकार का सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार क्या है।’’

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राजस्थान में बीजेपी सरकार पंचायत चुनावों में देरी कर रही : सचिन पायलट

वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने राजस्थान में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार पर राज्य में पंचायत चुनावों के आयोजन में जानबूझकर देरी करने का मंगलवार को आरोप लगाया।

पायलट ने संवाददाताओं से बातचीत में स्थानीय निकाय चुनावों में देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार अदालत के निर्देशों के बावजूद चुनाव टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “सत्तारूढ़ पार्टी को हार का डर है, इसलिए वह जानबूझकर स्थानीय निकाय चुनावों में देरी कर रही है।”

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पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार को न तो अदालत के निर्देशों की परवाह है और न ही राज्य की जनता की।

उन्होंने कहा, “उच्च न्यायालय ने 15 अप्रैल की समयसीमा दी थी, इसके बावजूद चुनावों को किसी न किसी बहाने टालने की कोशिश की जा रही है।”

कांग्रेस नेता ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत ग्रामीण रोजगार कार्य ठप हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।

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