
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को फैसला सुनाया कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट ही 'असली' शिवसेना है। विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी माना कि तत्कालीन चीफ व्हिप (मुख्य सचेतक) सुनील प्रभु पद पर नहीं रहे और नए चीफ व्हिप भरत गोगावले वैध रूप से निर्वाचित चीफ व्हिप थे।
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विधानसभा अध्यक्ष का फैसला एकनाथ शिंदे के लिए बड़ी राहत और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-यूबीटी के लिए एक बड़ा झटका है, जिन्होंने अलग हुए समूह के दावों का विरोध किया था।
महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर ने कहा कि उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंदे को नेता पद से हटाने का अधिकार नहीं है, बल्कि एकनाथ शिंदे को हटाने का फैसला राष्ट्रीय कार्यकारिणी का होना चाहिए। एकनाथ शिंदे को विधायक दल के नेता पद से हटाया जाना स्वीकार नहीं किया जा सकता। स्पीकर राहुल नार्वेकर ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी का फैसला सर्वामान्य होगा।
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महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, "शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। रिकॉर्ड के अनुसार, मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है।"
राहुल नार्वेकर ने कहा कि दोनों पार्टियों (शिवसेना के दो गुटों) की ओर से चुनाव आयोग को सौंपे गए संविधान पर आम सहमति नहीं बनी है। लीडरशिप को लेकर दोनों गुटों के विचार अलग-अलग हैं। एकमात्र पहलू विधायक दल का बहुमत है। मुझे विवाद से पहले मौजूदा लीडरशिप स्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक संविधान तय करना होगा।
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शिंदे गुट के विधायकों की अयोग्यता पर महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर फैसला सुना रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि संशोधित संविधान पर दोनों पक्षों को भरोसा है।
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इस पूरे मामले में जो सबसे खास सवाल था कि, क्या 21 जून की एसएसएलपी बैठक से विधायकों की अनुपस्थिति अयोग्यता का कारण बनती है? इस पर स्पीकर ने कहा कि, इस आधार पर मेरा मानना है कि शिंदे गुट को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि शिंदे गुट ही असली पार्टी थी और गुट के उभरने के बाद से ही सुनील प्रभु सचेतक नहीं रहे।
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