
मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर अब भारत के औद्योगिक शहरों तक साफ दिखाई देने लगा है। गुजरात के सूरत में एलपीजी गैस की कमी ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांव लौटने को मजबूर हो गए हैं।
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'जनसत्ता' की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत में एलपीजी की कमी के चलते छोटे उद्योग और फैक्ट्रियां प्रभावित हो रही हैं। कई यूनिट्स अस्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं, जिससे मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। गैस न मिलने के कारण उत्पादन ठप पड़ रहा है और इसका सीधा असर मजदूरों की आय पर पड़ रहा है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवासी मजदूरों ने बताया कि पिछले कई दिनों से गैस नहीं मिल रही है, जिससे कंपनियां बंद हो रही हैं। एक मजदूर सचिन के मुताबिक, हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को गांव लौटना पड़ रहा है क्योंकि न काम बचा है और न ही पैसे। उन्होंने बताया कि गैस के लिए कोशिश की, लेकिन कहीं मदद नहीं मिली और अब कई लोग वापस जा रहे हैं।
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मजदूरों के सामने सिर्फ रोजगार ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी भी चुनौती बन गई है। सीमा देवी ने बताया कि गैस की कमी की वजह से अपनी बेटी के साथ गांव लौट रही हैं, जबकि परिवार के बाकी सदस्य यहीं रहेंगे। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से गैस नहीं मिल रही है और छोटे सिलेंडर तक खत्म हो चुके हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोग अब उपलों से खाना बनाने को मजबूर हैं।
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यह स्थिति दिखाती है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब आम लोगों की जिंदगी तक पहुंच चुका है। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से स्थानीय उद्योगों और श्रमिकों पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
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इस बीच केंद्र सरकार ने राज्यों से पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार में तेजी लाने की अपील की है। इसके बदले राज्यों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए एलपीजी की अतिरिक्त आपूर्ति का प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, जिससे संकट को कुछ हद तक कम किया जा सके।
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