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'मोदी सरकार ने गलवान के बाद चीन के प्रति अपनाया नरम रुख, आयात में हुई बढ़ोतरी', खड़गे बोले- राष्ट्रीय हितों को पहुंचा नुकसान

खड़गे ने कहा, ‘‘छह वर्ष पहले गलवान में 20 भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बाद पीएम मोदी ने चीन को "क्लीन चिट" दे दी थी। भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने भारत के हितों के समक्ष चीन के प्रति नरम रुख अपनाया।’’

गलवान के बाद सरकार ने चीन के प्रति नरम रुख अपनाया, कई क्षेत्रों में निर्भरता बढ़ी: खड़गे
गलवान के बाद सरकार ने चीन के प्रति नरम रुख अपनाया, कई क्षेत्रों में निर्भरता बढ़ी: खड़गे  फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि गलवान घाटी की घटना के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने चीन के प्रति नरम रुख अपनाया, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की चीन पर निर्भरता बढ़ी है तथा राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा है।

खड़गे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर यह भी दावा किया कि वर्ष 2020 में हुई गलवान की घटना के बाद वर्ष 2025-26 तक चीन से भारत का आयात 101.81 प्रतिशत बढ़ गया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘छह वर्ष पहले गलवान में 20 भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को "क्लीन चिट" दे दी थी। भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने भारत के हितों के समक्ष चीन के प्रति नरम रुख अपनाया।’’

खड़गे ने कहा कि भारत के एंटीबायोटिक आयात का 86 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है।

उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में भारत के 66 प्रतिशत पुर्जों का आयात चीन से होता है, जबकि भारतीय ईवी में इस्तेमाल होने वाली लगभग 75 प्रतिशत लिथियम-आयन बैटरियां आयातित हैं और इनमें अधिकतर चीन से आती हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत की निर्भरता चीन पर बनी हुई है।

खड़गे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अब चार चीनी कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देकर चीन के लिए और अवसर खोल दिए हैं।

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