
कांग्रेस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से जुड़े मामले को लेकर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले एक दशक में एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को दोबारा लिखने की शर्मनाक और शरारतपूर्ण कवायद को अंजाम दे रहा है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि यह एक पूरा गिरोह है जिसकी जांच होनी चाहिए।
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जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, "एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के आलोचनात्मक संदर्भों पर उच्चतम न्यायालय का नाराज होना उचित है। दरअसल पिछले एक दशक में जिस तरह से एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों को दोबारा लिखा गया है वह शर्मनाक होने के साथ-साथ खतरनाक भी है।"
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आरएसएस द्वारा संचालित शरारत और द्वेष से भरी एक कवायद रही है। रमेश ने कहा कि इस ‘गिरोह’ की जांच होनी चाहिए।
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भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय होने को लेकर बुधवार को कड़ी आपत्ति जताई, जिसके बाद एनसीईआरटी ने विवादित पाठ्यपुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया।
न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एनसीईआरटी की इन किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और किताबों की सभी प्रतियों को जब्त करने के साथ-साथ इसके डिजिटल संस्करणों को भी हटाने का आदेश दिया।
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शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य के अधिकारियों को उसके निर्देशों का तुरंत पालन करने का आदेश दिया और चेतावनी दी कि अगर निर्देशों का किसी भी रूप में उल्लंघन किया जाता है तो ‘‘गंभीर कार्रवाई’’ की जाएगी।
एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भ्रष्टाचार, बड़ी संख्या में लंबित मामले और काफी संख्या में न्यायाधीशों की कमी न्यायिक प्रणाली के समक्ष पेश आने वाली चुनौतियों में शामिल हैं।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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