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गुजरात चुनाव: मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने वाला साम्प्रदायिक वीडियो वायरल, किसे होगा फायदा? 

मानवाधिकार संगठन के वकील गोविंद परमार ने कहा कि इस वीडियो का इस्‍तेमाल वोटों के धुव्रीकरण और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए हो सकता है। उन्होंने वीडियो क्लिप का प्रसार रोकने की मांग की है।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

गुजरात विधानसभा का चुनावी प्रचार जोरों पर है। सोशल मीडिया पर भी प्रचार और दुष्प्रचार दोनों जारी है। हार्दिक पटेल की कथित सेक्स सीडी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि एक और वीडियो ने बीजेपी को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। हालांकि बीजेपी ने इस वीडियो से कोई नाता नहीं होने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो में चुनाव को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई है। 1.15 मिनट का वीडियो गुजराती भाषा में है। वीडियो में एक घबराई हुई लड़की जल्‍दबाजी में अपने घर की तरफ जाते दिखाया गया है। जिस दौरान लड़की सड़क पर चल रही है, उस वक्त बैकग्राउंड में अज़ान की आवाज आ ही है। लड़की के मां-बाप घर पर बेचैनी से उसका इंतजार कर रहे हैं। घर में भगवान कृष्‍ण की फोटो टंगी है। लड़की के घर पहुंचते ही उसकी मां दरवाजा खोलती है और उसे गले से लगा लेती है, पिता भी राहत भरी सांस लेते हुए बेटी के माथे पर हाथ फेरते हैं।

इसके बाद लड़की की मां कैमरे की तरफ घूमकर कहती है, “आप लोग गुजरात में ऐसा होता देखकर हैरान क्‍यों हो?” इसके बाद लड़की के पिता कहते हैं, “22 साल पहले ऐसा हुआ करता था और ऐसा फिर हो सकता है अगर वे लोग आए तो।” फिर लड़की बोलती है, “परेशान मत हों। कोई नहीं आएगा। क्‍योंकि यहां मोदी है।” वीडियो क्लिप का अंत भगवा रंग में गुजराती में लिखी एक पंक्ति से होता है, जिसका मतलब है, “अपना वोट, अपनी सुरक्षा।” यह वीडियो बनाने की जिम्‍मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। इस पूरे वीडियो से साफ है कि मुसलमानों का डर दिखाकर हिन्दू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशइस की जा रही है।

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मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क (एचआरएलएन) से जुड़े वकील गोविंद परमार ने चुनाव आयोग और गुजरात पुलिस को पत्र लिखकर इस वीडियो क्लिप का प्रसार रोकने की मांग की है। परमार ने कहा, “इस क्लिप का इस्‍तेमाल राज्‍य में वोटों के धुव्रीकरण और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए हो सकता है। यह साफ है कि वीडियो का मकसद बहुसंख्‍यकों में मुसलमानों के प्रति डर फैलाना है। यह वोटों के ध्रुवीकरण के लिए किया गया है, जो एक अपराध है।”

लोगों का मानना है कि वीडियों के पीछे बीजेपी हो सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सेक्स सीडी के फेल होने के बाद वह गुजरात चुनाव को साम्प्रदायिक रंग देने में जुट गई है?

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