
देश में नए मतदाताओं के पंजीकरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। निर्वाचन आयोग (ECI) ऑनलाइन फॉर्म-6 में एक नया डिक्लेरेशन जोड़ रहा है, जिसके तहत नए वोटर बनने के लिए आवेदन करने वालों को अपने या अपने माता-पिता की पिछली Special Intensive Revision (SIR) के दौरान की मतदाता सूची से जुड़ी जानकारी देनी होगी। हालांकि, इस बदलाव को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं, क्योंकि अभी तक फॉर्म-6 में संशोधन के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
ECI के ECINET पोर्टल पर अपलोड किए गए ऑनलाइन फॉर्म-6 में पार्ट "J" और "K" के बीच एक नया डिक्लेरेशन सेक्शन जोड़ा गया है। इसमें आवेदक से पूछा जा रहा है कि पिछली SIR के दौरान उसका या उसके माता-पिता का नाम मतदाता सूची में था या नहीं। दिलचस्प बात यह है कि ऑफलाइन डाउनलोड होने वाले फॉर्म-6 में यह नया डिक्लेरेशन शामिल नहीं है। यानी कागजी आवेदन करने वालों को यह जानकारी नहीं देनी होगी, जबकि ऑनलाइन आवेदन करने वालों के लिए यह प्रक्रिया लागू है।
यह नया सेक्शन उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन दिखाई दे रहा है, जहां वर्ष 2025-26 के दौरान SIR पूरी हो चुकी है या अभी चल रही है। इस व्यवस्था में सिर्फ बिहार शामिल नहीं है, क्योंकि वहां पिछले साल जून में ही SIR पूरी कर ली गई थी। वहीं असम में कानूनी कारणों से SIR नहीं कराने का फैसला किया गया है।
पिछले वर्ष शुरू हुए SIR अभियान के तहत अब तक 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष पुनरीक्षण पूरा किया जा चुका है। इस अभियान के दौरान देशभर की मतदाता सूची से 5.58 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। जानकारों का मानना है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके बच्चों के नए वोटर रजिस्ट्रेशन पर इस नई व्यवस्था का असर पड़ सकता है।
इसका सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लागू कुछ विशेष प्रावधानों के बाद न्यायिक निर्णय (एडजुडिकेशन) के दौरान 27 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटा दिए गए। इसके चलते वे इसी वर्ष अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव में मतदान नहीं कर सके। इन मामलों से जुड़ी अपीलें अभी भी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं और अंतिम फैसला आना बाकी है।
नए ऑनलाइन सेक्शन में आवेदकों को तीन विकल्प दिए गए हैं— पहला, उनका नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था; दूसरा, उनके माता-पिता (पिता, माता, दादा या दादी) का नाम पिछली SIR में था; और तीसरा, न उनका और न ही उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में था।
अगर कोई आवेदक पहले या दूसरे विकल्प का चयन करता है, तो उसे विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और सीरियल नंबर जैसी पुरानी जानकारी भी देनी होगी। कई आवेदकों के सामने समस्या यह है कि उनके पास यह जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे तीसरा विकल्प चुन सकते हैं, लेकिन ECINET पोर्टल पर अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि तीसरा विकल्प चुनने के बाद आवेदन की आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
निर्वाचन आयोग ने पिछले वर्ष 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुई SIR तथा वर्तमान में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी SIR के दौरान मौजूदा मतदाताओं से गणना फॉर्म में इसी तरह की जानकारी मांगी थी। हालांकि नए मतदाताओं के लिए उपयोग होने वाले वैधानिक फॉर्म-6 में अब तक किसी संशोधन की आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कानून मंत्रालय की समय-समय पर जारी गजट अधिसूचनाओं में भी ऐसे किसी बदलाव का उल्लेख नहीं मिलता।
यह पूरी व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 से शक्ति प्राप्त करती है, जो पात्र वयस्क नागरिकों को मतदाता के रूप में पंजीकरण का अधिकार देता है। वहीं जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 28 के अनुसार, केंद्र सरकार निर्वाचन आयोग से परामर्श के बाद राजपत्र में अधिसूचना जारी कर नियमों में बदलाव कर सकती है।
मौजूदा निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के तहत फॉर्म-6 में केवल साथ रहने वाले परिवार के सदस्यों के नाम और उनके EPIC नंबर देने का प्रावधान है। ऐसे में ऑनलाइन फॉर्म-6 में जोड़ा गया नया सेक्शन नए मतदाताओं के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया और नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
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